Monday, 2 February 2026

शबर शब्द शबरी

शबर शब्द जाति सूचक नहीं है। शिव के द्वारा उपदिष्ट तान्त्रिक मन्त्रों को शाबर मन्त्र कहते हैं। दक्षिण ओड़िशा तथा उसके निकट के छत्तीसगढ़ और आन्ध्र प्रदेश के क्षेत्रों को शबर क्षेत्र कहते हैं। मीमांसा दर्शन का शाबर भाष्य प्रसिद्ध है जो उस क्षेत्र के एक विद्वान् द्वारा प्रणीत था। यह वराह अवतार तथा वैखानस दर्शन से सम्बन्धित क्षेत्र है।

जाति और ब्राह्मण

ब्राह्मणों को जातिवाद के लपेटे में जबरन लिया जाता है। यदि जाति ब्राह्मण को पसंद होती तो स्वयं ब्राह्मणों के भीतर ही वैसी ही जातियाँ नहीं होतीं जैसी आरक्षितों में मिलती हैं? 

ब्राह्मण जाति से नहीं गोत्र से चला। जाति और गोत्र में फर्क है। जाति सामाजिक ( social) है, गोत्र पैतृक( patrilineal)। भारद्वाज, कश्यप, अत्रि, विश्वामित्र, वशिष्ठ , गौतम, जमदग्नि सबके गोत्र हैं। गोत्र व्यवस्था सगोत्र विवाह का निषेध करती थी। जाति व्यवस्था अपनी जाति में विवाह को प्रोत्साहित करती है। 

ब्राह्मणों की श्रेणियाँ अवश्य हैं। पर वे स्थानिकता के आधार पर हैं। कोंकणस्थ हैं, देशस्थ हैं, कान्यकुब्ज हैं, सरयूपारीण हैं, गौड़ हैं, कश्मीरी हैं, सारस्वत हैं, मैथिल हैं, उत्कल हैं, द्रविड़ हैं। जाति जैसी चीज उनके यहाँ नहीं है। ये सब एक ही वर्ण — ब्राह्मण — के अलग-अलग भौगोलिक समूह हैं। पर इनमें से कोई भी एक दूसरे की जाति नहीं है। मतलब, कोंकणस्थ और कान्यकुब्ज के बीच वह दीवार नहीं है जो दो अलग जातियों के बीच होती है। ये स्थानिक भेद हैं, जैसे कि एक देश में अलग-अलग क्षेत्रों के लोग होते हैं।और सबसे ज़रूरी बात — इनमें से कोई भी दूसरे को "नीचा" नहीं मानता। जाति व्यवस्था में ऊँचा-नीचा होता है। पर ब्राह्मणों के इन स्थानिक समूहों में वह पदानुक्रम (hierarchy) नहीं है जो जाति व्यवस्था बनाती है। वहाँ फर्क था भी तो वेद पाठ के आधार पर था। द्विवेदी थे, त्रिवेदी थे, चतुर्वेदी थे। दो तीन चार - जितने वेद पढ़े हों। फर्क का आधार ज्ञान था। 

यह समझिये कि तब ‘ब्राह्मणों’ की बात करनी कुछ लोगों की मजबूरी क्यों हो जाती है।इसलिए कि ब्राह्मण एक जाति है ही नहीं, वह वर्ण है।

यानी ब्राह्मण इस बात के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं कि practice before you preach.

तब आरक्षित और अनुसूचित जातियां भी वैसी ही जातिमुक्तता क़ायम करें जैसी ब्राह्मण वर्ण ने करके दिखाई। खुद जाति के मोह में रहें, टोह में रहें और दूसरों पर दोषारोपण करते रहें- यह हमारा पाखंड है। पहले हम स्वयं खंड खंड में बँटे न रहें, फिर आगे बढ़ें।  

कम ऑन, फ्रेंड्स लेट्’स डू इट। चैरिटी बिगिन्स एट होम।