Tuesday, 28 July 2026

शरीर वाणी और मन।

शरीर मनो वाक यत कर्म प्रारभते नर:।
न्यायम वा विपरीतम वा तस्य एतै पंच हेतवम्।।
भगवतगीता। 
वाणी से व्यक्त किए गए विचारों से व्यक्ति की पहचान संभव नहीं होती।

 क्योंकि कर्म करने के तीन साधन उपलब्ध हैं। शरीर वाणी और मन।

 अब इनमें मन सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि वह स्रोत है वाणी और शरीर द्वारा किए जाने वाले कर्म का।

और किसके मन में क्या खिचड़ी पक रही है यह जानना संभव नहीं होता साधारण जन के लिए। सिर्फ योगी और महात्मा ही झांक सकते हैं किसी दूसरे के मन में।

जो बोल देता है उसे आप पहचान लेते हो, जो बोलता नहीं है और सारे कृत्य या दुष्कृत्य करता रहता है उसे आप महात्मा मान लेते हो

किसी शायर ने कहा है:
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी।
जिसको भी देखिए कई बार देखिए।

मुखौटे इतने होते हैं हमारे अंदर, कि कई बार हम स्वयं भी भ्रमित हो जाते हैं कि हमारा असली चेहरा कौन सा है?

सत्य बोलने का साहस नहीं होता सबके अंदर, क्योंकि मनुष्य भविष्य में होने वाले लाभ और हानि का गणित सदैव करता रहता है। इसलिए अनेक मुखौटे धारण करना आवश्यक हो जाता है। मन में अपार घृणा को भी मीठे शब्दों की चाशनी में लपेटकर प्रस्तुत करता है, या करवाता है, यदि उसके अनुयाई हुए तो। और अनुयाई प्रायः वही होते हैं जो लोभ और लाभ की गणित में कुशल होते हैं: मनसा वाचा कर्मणा। 
ऋषियों ने कहा है:
मनसा में वाचा प्रतिष्ठा। 
वाचा में मनसा प्रतिष्ठा। 
अर्थात जो मेरे मन में हो वही मेरी वाणी से मुखरित और ध्वनित हो। और मेरी वाणी से वही मुखरित हो जो मेरे मन में हो।
साधारण सांसारिक जीवन में यदि ऐसा हो तो गर्दनें उतर जाएं, कपार फूट जाय, आपस में, घर परिवार में, पास पड़ोस में, यार मित्रों में, शत्रुओं की तो बात ही छोड़ दीजिए। 
तो क्या ऋषि गण असत्य बोल रहे हैं, गलत सीख दे रहे हैं? 
ऐसा नहीं है। वे असत्य नहीं बोल रहे हैं। असत्य नहीं है परंतु अव्यवहारिक है संसार में, संसारी जीव के लिए। 

 अव्यवहारिक इसलिए क्योंकि आज ही नहीं, पूर्व में भी, व्यवहार का सदैव यही अर्थ रहा है कि वह बोलो जिससे मामला न बिगड़े। सत्य ऐसा हो जो प्रिय हो। जो प्रायः संभव नहीं होता। इसीलिए लोग कहते हैं सत्य कड़वा होता है। 
 व्यवहारिक होना जीवन में सफल होने की कुंजी है। 
  इसे ही आजकल प्रैक्टिकल होना बोला जाता है। 

मुझसे बहुत से लोग बोलते थे कि भाई तुम प्रैक्टिकल नहीं हो। मैं उनसे पूछता था कि इसका अर्थ समझा दीजिए कि ऐसा कहने का तात्पर्य क्या है आपका। वे समझाते नहीं थे। शायद उन्हें स्वयं इसका तात्पर्य नहीं पता था, या संभवत: वे मुझे समझाना नहीं चाहते थे। 
परंतु मेरी समझ के अनुसार व्यवहारिक होने का अर्थ है मुखौटा धारण करना। जिसकी ट्रेनिंग बचपन से ऐसी होती है, वे जीवन में अत्यंत व्यवहारिक होते हैं, सफल होते हैं। सफलता का अर्थ अपने अपने अनुसार व्याख्या कीजिए। परंतु उन्हें अंतत: इतने मुखौटे धारण करने पड़ते हैं कि उन्हें स्वयं का अपना चेहरा विस्मृत हो जाता है। 
ऋषि जो कह रहा है वह उस मार्ग की बात कर रहा है जब आप अपने स्वरूप को जानने की ओर अग्रसर होते हैं। उसने निष्पत्ति बताई है, उस प्रक्रिया की, उस साधन की, जहां ये मार्ग हमें ले जायेगा। जब आप राग द्वेष से मुक्त होंगे, तो आपके मन में ऐसी कोई बात ऐसा कोई विचार आएगा ही नहीं, जिसे व्यक्त करने से किसी को आघात पहुंचे, किसी के मन को चोट पहुंचे। 
ऋषि वीतराग अवस्था के मन की स्थिति का वर्णन कर रहा है, जो है तो सत्य के अत्यंत निकट, परंतु व्यवहारिक नहीं है। इसलिए संसार में जब तक रहना है इस मार्ग को त्याग दें, व्यवहारिक बनें, मुखौटा धारण करें, वरना असफलता निश्चित है। 

इस पर गहन विचार कीजिए। 
❤️❤️

® त्रिभुवन सिंह

राजा राममोहन रॉय

"#राजा_राममोहन_रॉय को 31वर्ष की उम्र में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने पेरोल (नौकरी) पर रखा। उसने अपना कैरियर क्लर्क के रूप में शुरू किया, और उत्तरी बंगाल के मुर्शिदाबाद अपीलेट कोर्ट के रजिस्ट्रार थॉमस वुडफोर्ड के प्राइवेट क्लर्क (मुंशी) के पद पर पदोन्नति पाया। अंततः उसे ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा दी गई "राजा" की उपाधि मिली। उसने विलियम केरी से सांठगांठ किया, और उसको ब्रिटिश द्वारा ब्रिटिश भारत में "भारतीयों" के लिए शिक्षा तंत्र के सुधारक के रूप में प्रचारित किया गया। बौद्धिक वेश्याएं प्रत्येक स्थान पर हैं। इस तरह "बंगाल माफिया" ब्रिटिश इंडिया में  सांठगांठ करने वाले अन्य लोगों से बाजी मार लिया"। 
: प्रदोष अईच 

यह लेख उद्धृत है प्रदोष aich द्वारा 2015 में लिखी गई एक रिसर्च पुस्तक "TRUTHS" में। पेज 407

इसलिए लिखा गया है कि लोगों को आज भी भ्रम है कि राम मोहन राय कोई राजा थे।
समाज सुधारक थे। 
 
पुस्तक की स्नैप शॉट भी है। 
इस पुस्तक ने विलियम जोन्स, मैक्समूलर मैकाले आदि समस्त फ्रॉडेस्टर का भांडा फोड़ किया है। 

राजा राम मोहन राय कोई राजा नहीं थे। मुंशी थे कचहरी में। 
 यह टाइटल अंग्रेजों ने उन्हें अपना पिट्ठू बनाने के लिए और अपना हित साधने के लिए उन्हें दिया था। 

लेकिन इतिहास में उन्हें समाज सुधारक बताया गया है। 
किस समाज का  सुधारक?
जो समाज अनंतकाल से ईसाई लुटेरों के आने के पूर्व तक विश्व की 25% जीडीपी का उत्पादक था। 
क्या सुधार करता वो व्यक्ति?
आज लोग जीडीपी से परिचित हैं। 
आज चीन की जीडीपी भारत की तुलना में पांच गुना है। अमेरिका से थोड़ा पीछे। 
वहां किसी सुधारक की आवश्यकता अनुभव नहीं करता कोई?
न चीनी, और न कोई ईसाई।
क्यों?
यही है #इति_हास्य का #इतिहास। 

आप उपरोक्त हैशटैग को दबाइए तो आपको ऐसे ऐसे लेख मिलेंगे कि आपको भ्रम हो जाएगा कि इस नाम का  कोई देवदूत अवतरित हुआ था भारत की धरती पर।

यही होती है नरेटिव बनाने की कला। पढ़े लिखे लोग इन्हीं अफवाहों के शिकार हैं। 
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फूलन देवी का असली सच

जानिये फूलन देवी का असली सच जो उसको बेफजूल वीरांगना माने बैठे हुए हैं,,😊🙏

दीदी जानती हो, आज पच्चीस जुलाई है?
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यह तो सच ही है कि बीहड़ के पानी की तासीर ही कुछ ऐसी है कि बदला गोलियों से लिया जाता है। खैर वह दौर तो नहीं रहा जब बीहड़ का मरद मेहरारू की जगह 315 माउजर साथ लेकर सोता था पर किस्सों में बीहड़ खूब जिंदा है।आज पच्चीस जुलाई है और नारीवादियों का नारीवाद उफान पर है। कारण है कि नारीवाद को बीहड़ में हांफ-हांफ कर जिंदा करने वाली बीहड़ की डकैत फूलन देवी की आज पुण्यतिथि है। 

फूलन को मरे एक अरसा हो गया लेकिन अब फूलन की गैंग बीहड़ से निकलकर कैम्पस और मीडिया मंडी तक पहुंच गई है। जितना कबाड़ा फूलन गैंग की बंदूक ने नहीं  किया उससे ज्यादा उसकी गैंग की कलम कर रही है। हमारा तो उसूल रहा है कि बंदूक की बगावत बंदूक से और कलम की बगावत कलम से होनी चाहिए। सिलसिलेवार उन सभी क्रांतिकारियों को यहां जवाब दिया जा रहा है जिन्हें फूलन में नारीवाद की मिसाल नजर आती है।

डार्लिंग, हालातों ने फूलन को डकैत नहीं बनाया और ना ही वह सच पूरा है जो तुम शेखर कपूर की बेंडिड क्वीन के आईने में देखती हो। लेखिका अरुंधति राय लिखती है कि अगर बलात्कार से कोई महिला डकैत बनती तो आज हजारों महिलाएं बंदूक उठाकर बीहड़ में घूम रही होती। 

बीहड़ के जितने भी बागी हुए है उनमें एक जो बात सबसे कॉमन मिलती है वो यह है कि हर गैंग का सरदार अपनी गैंग में एक लौंडिया जरूर रखता था। निर्भय सिंह गुर्जर तो इस मामले में इतना उस्ताद था कि बिग बॉस फेम सीमा परिहार,सरला जाटव,नीलम गुप्ता उसकी गैंग में हुआ करती थी। पुलिस ने भी अपनी सरकारी रायफल की गोलियां इन लौंडिया के कंधों पर रखकर ही दागी है। एक दौर में मुरैना जिले के नामी बागी हुए रमेश सिंह सिकरवार अपने इंटरव्यू में कहते है कि बीहड़ में बागी को लंगोट का पक्का होना चाहिए क्योंकि पुलिस जब रडार पर लेती है तो सबसे पहले बागी का लंगोट ही खोलती है।

खैर, हुआ यूँ था कि एक डकैत की यौन इच्छा ही फूलन को बीहड़ तक ले आई थी। फूलन उन दिनों अपनी रिश्तेदारी में गई हुई थी। वहां से बाबू सिंह गुर्जर नाम का एक डकैत फूलन को उठाकर बीहड़ में ले जाता है। बाबू सिंह गुर्जर की गैंग में ही एक रंगरूट होता है जिसका नाम विक्रम मल्लाह है। वह फूलन की ही जात का है और फूलन के यौवन पर लट्टू हो जाता है। बागियों की गैंग का एक ओर उसूल होता है कि लौंडिया पर पहला हक गैंग के सरदार का होगा। लेकिन विक्रम मल्लाह को फूलन का बाबू सिंह गुर्जर के साथ हमबिस्तर होना नागवार गुजरता है। फूलन यह बात भी भली भांति जानती है कि विक्रम उस पर लट्टू हुआ पड़ा है। लेकिन फूलन वह सब स्वीकार करती है जो गैंग का उसूल है। बागियों की सल्तनत में क्या ? उसूल और काहे की आजादी। 315 माउजर की 8 MM की नली के आगे या तो मरो या मार डालो। विक्रम मल्लाह एक दिन अचानक मौका देखकर अपने सरदार बाबू सिंह गुर्जर की हत्या कर देता है और खुद गैंग का सरदार बन बैठता है। बाबू सिंह गुर्जर की हत्या के बाद विक्रम को गैंग और फूलन दोनों मिल जाती है। लेकिन फूलन की किस्मत में अब भी हांफना ही बचता है बस मरद बदल जाता है।

वक्त गुजरता है और सलाखों में बन्द एक खूंखार बागी लालाराम वापस गिरोह में लौटता है। विक्रम मल्लाह भी इसी लालाराम का शार्गिद है तो एक बार फिर गैंग का सरदार और फूलन का मरद दोनों बदल जाते है। इस बात से परेशान विक्रम अपनी नई गैंग बना लेता है और ठाकुरों की गैंग से उसकी छिटपुट झड़पें चलती रहती है। एक दिन बड़ी मुठभेड़ में विक्रम मल्लाह ढेर हो जाता है। लालाराम की गैंग फूलन को उठाकर बेहमई गांव ले जाती है जहाँ उसके साथ बलात्कार होता है। 

अब यहां एक और बात समझने की जरूरत है कि फूलन को बेहमई गांव ही क्यों ले जाया जाता है। जबकि लालाराम और राम ठाकुर तो बेहमई गांव के नहीं थे। राम ठाकुर का गांव बेहमई गांव के पास ही दमनपुर है तो इस पूरी कहानी में बेहमई गांव की क्या भूमिका है। नदी के किनारे बसा यह गांव बागियों के छिपने का बढ़िया और सुरक्षित ठिकाना हुआ करता था। जबकि इस गांव के लोग ना तो राम ठाकुर की गैंग में शामिल थे और ना ही फूलन पर उन्होंने कोई अत्याचार किया। बल्कि बेहमई गांव के लोग तो खुद ही इन बागियों से परेशान थे। ये बागी जब मन आये तब ही इस गांव के लोगों को धमकाकर रासन, पैसे और जरूरी सामान ले जाया करते थे। 

बेहमई गांव से फूलन जैसे तैसे बच निकलती है और यहां से देश और बीहड़ दोनों के जातीय समीकरण तेजी से बदलते है। यह ठीक वहीं दौर था जब मान्यवर काशीराम 'तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार' का झंडा उठाये हुए थे और लालू जैसे दोगले समाजवादियों ने भूरा बाल साफ करो कि अमल(अफीम का पानी) पिछड़ों को चटा दी थी।

ये सब कवायद तो संसद का समीकरण बदलने की थी लेकिन संसद से पहले इस समीकरण की चपेट में बीहड़ आ गया। उस वक्त बीहड़ में हर दूसरी गैंग ठाकुरों की थी। हर दूसरी गैंग का सरदार भी ठाकुर ही हुआ करता था। लेकिन बाकी जातियों ने तय कर किया कि अब ठाकुरों की गैंग में रहकर पिट्ठू लादने से अच्छा है कि खुद की गैंग बना ली जाए और फूलन ने इस काम के लिए एक बहाना दे दिया। ठाकुरों की गैंग से परेशान दूसरे रंगरूट फूलन को साथ लेते है और एक दिन बेहमई गांव पहुंच जाते है। वहां फूलन द्वारा एक आवाज दी जाती है कि राम ठाकुर और लालाराम कहाँ है। उसके बाद पूछा जाता है कि इस गांव से राम ठाकुर की गैंग को रसद कौन देता है। मतलब फूलन अपने साथ हुए बलात्कार का बदला लेने नहीं बल्कि उस गांव के लोगों को इस लिए मारने गई थी कि वे राम ठाकुर को रसद देते थे। 

एक रिपार्ट यह भी बताती है कि बेहमई कांड में गोली चलाने का आदेश खुद फूलन ने नहीं दिया था। जबकि फूलन तो गोलीबारी के बीच इतना कांप गई कि उससे बंदूक की एक गोली तक नहीं चली। गोली चलाने का आदेश फूलन के पीछे खड़े गैंग के दूसरे सरदार ने दिया। 

बेहमई गांव में फूलन की गैंग द्वारा की गई ठाकुरों की हत्या ने पूरे देश मे सनसनी ला दी। फूलन एक बड़ी आबादी के लिए आदर्श बन गई। लोकतंत्र में एक वर्ग का आदर्श बराबर एक वोटबैंक का ठेकेदार भी होता है। मीडिया अब तक इस हेड लाइन के साथ गाल बजाता है कि अपने ऊपर हुए अत्याचार का बदला लेने के लिए फूलन ने ठाकुरों को मौत के घाट उतार दिया। 

यहां से राजनीति की चौसर जमती है। ठाकुरों की गैंग फूलन को सलटाने के लिए बीहड़ छान मारती है लेकिन फूलन का जिंदा रहना अब राजनीतिक समीकरणों को जिंदा रखने के लिए जरूरी हो गया था। फूलन के साथ जिस मल्लाहों की गैंग ने बेहमई कांड किया था वह पूरी गैंग अचानक भूमिगत हो जाती है और उत्तर-प्रदेश के बीहड़ों को छोड़कर मध्य-प्रदेश के बीहड़ों में गुजर बसर करती है। मध्य-प्रदेश में उन दिनों दलित और पिछड़ों के मसीहा अर्जुन सिंह शासन कर रहे थे। फूलन का ठाकुरों की किसी गैंग के साथ सीधी मुठभेड़ में गिराया जाना एक वोटबैंक का बड़ा नुकसान था। इसलिए फूलन को भीतर से कितना राजनीतिक संरक्षण मिला इस बात से रत्तीभर भी इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन फूलन को बहुत जल्दी समझ आ गया कि इन हालातों में बीहड़ में बसर करना ज्यादा दिन मुमकिन नहीं हो पायेगा। अंततः 14 फरवरी 1981 को फूलन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर देती है। जेल काटने के बाद मुलायम सिंह यादव फूलन को संसद पहुंचा देते है। 

राजनीतिक समीकरण फिर बदलते है और उत्तर प्रदेश के दलित बहुजन समाज पार्टी के पीछे लामबंद होते है। मुलायम को समझ आ जाता है कि अब फूलन का पोलिटिकल माइलेज पहले वाला नहीं रहा क्योंकि दलित वोटबैंक मायावती के पीछे हो लिया था। समाजवादी पार्टी को समझ आया कि कैसे भी ठाकुरों को लपक लिया जाए तो माइलेज का मामला जम जाएगा। चरकनगर की एक राजनीतिक सभा से इसकी शुरुआत होती है जहां मंच पर फूलन और मुलायम सिंह दोनों होते है। फूलन का भाषण होता है वह कहती है कि "ठाकुरों का मेरे ऊपर बहुत उपकार है। जब मैं बीहड़ में चारो तरफ से घिर गई थी तो इसी इलाके के ठाकुर जसवंत सिंह सेंगर की कृपा से मेरी जान बच पाई।"

ओह माय गॉड व्हाट इज दिस? फेमिनिज्म का मेकअप उतार कर थोड़ा पॉलिटिक्स भी समझा करो ना डार्लिंग।

उसके बाद जानती हो क्या हुआ डार्लिंग ? एक कुसमा नाइन नाम की बागी भी हुई थी उसी बीहड़ में। फूलन से कहीं ज्यादा क्रूर और बर्बर। उन दिनों वह फूलन के जानी दुश्मन लालाराम की गैंग की कमांडर हुआ करती थी। एक दिन कुसमा बेहमई कांड का बदला लेने के लिए फूलन की जाति के 13 मल्लाहों को लाइन में लगाकर 325 माउजरों से भून देती है इस ऐलान के साथ कि मैंने ठाकुरों की हत्या का बदला लिया है।

फूलन और कुशमा की आपसी हत्या प्रतिस्पर्धा में ही भदेख रियासत अंतर्गत रोमाई देवरा गांव वीराने में बदल गया और उससे जुड़ी 2500 एकड़ उपजाऊ जमीन आज भी बंजर है ।

जो फूलन ने बोया वह कुसमा ने काट लिया। उधर 20 मारे गए। मैंने कहा था ना कि बीहड़ की तो तासीर ही ऐसी है कि गोली का बदला बस गोली होती है। दिल किया तो तुम्हें कभी कुसमा नाइन की कहानी भी सुना देंगे। 

साभार:- ✍️


सच्चाई थोड़ा अधूरी वही फूलन को उसके चाचा ने सबसे पहले परिवारिक झगड़े शोषण किया जेल भेजा ठाकुर ने जेल छुड़वाया था उसी समय फूलन खुद चाचा से बदला लेना चाहती थी प्रतिशोध की आग जल रही तभी उड़ने बीहड़ की तरफ़ गूजर की ओर गई थी दूसरी बात गांव। ठाकुर की हत्या वो प्लान मुलायम का सम्बन्ध मान अहीर डाकू से था उसने हत्या की थी ये डाकू के संग खुद गई कोई ठाकुर शोषण नहीं किया इश्का गैंग लाला राम श्रीराम की होती थी वो जेल जाने से गुजर और मल्लाह उसे चला रहे थे डाकू खुद सुंदरी सुरा रखते थे

भीमा कोरेगांव का सच

यह समुदाय से कोई झगड़ा नहीं है लेकिन भीमकोरेगांव 1818 के नाम पर गलत नॉरेटिव फैलाया जाएगा तो उसका 
जवाब दिया जाएगा हमारा किसी की जाति या संप्रदाय से कोई झगड़ा नहीं है लेकिन सत्य को असत्य नही लिखने दिया जाएगा 
इतिहासकारों की दृष्टि से जनवरी 1818 भीमा कोरेगांव का मंजर था पेशवाओं की 30000 सेना के सामने अंग्रेजों की 90 हजार सेना खड़ी है यह पेशवाओं और अंग्रेजों के मध्य तीसरी लड़ाई भी है इससे पहले दो लड़ाई अंग्रेज बुरी तरह से हार चुके हैं और अपनी पूरी शक्ति के साथ तीसरी लड़ाई में डटे हुए है इस हार का मतलब है अंग्रेज देश छोड़कर भाग जाते हैं इस युद्ध में भी पेशवाओं की सेना अंग्रेजो भारी पड़ रही है लेकिन इसी बीच में पेशवाओं ने अपने रेजीमेंट में महार जाति के 500 जमादारों को पेशवाओं के सेना में गद्दारी करने के लिये इनाम के लालच में भेज दिया जो अंग्रेजों की नौकरी करने के नाम पर वहां पर गए और वहां जाकर उन्होंने धोखे से पेशवाओं के रसद में जहर मिला दिया जिसके कारण पेशवा बीमार पड़ने लगे कुछ मर गए और पेशवा वह युद्ध हार गए जिसके कारण देश गुलाम हो गया और पेशवा को लाकर बिठूर के जेल में अंग्रेजों ने कैद कर दिया महारों की इस गद्दारी को इतिहास में लिखा गया और देशवासियो ने गद्दारी की सजा में सामाजिक बहिष्कार में #म्हारो_को_अछूत_घोषित कर दिया गया दूसरी ओर अंग्रेजों ने महारो को इस बात के लिए आरक्षण दिय और #महारों के नेता अम्बेडकर ने इस गद्दारी को छुपाने के लिए नया स्वांग रचते हुए 1926 में भीमा कोरेगांव में 30हजारसाहसी पेशवाओ पर 500 महारों की जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया जो आजाद भारत में भी 2018 तक मनाया गया... अंबेडकर ने अपनी किताब में लिखा है कि अगर महार ना होते तो अंग्रेज इस देश पर शासन न कर पाते.. इसको कहते हैं चोरी और सीना जोरी..
 क्या कभी संभव है कि 500 महार 30000 परम् वीर अदमय साहसी पेशवाओं के सामने एक मिनट भी टिक पाते.. जिन्होंने 41 लड़ाईया में विजित रहकर मुगलों का लगभग लगभग सफाया कर दिया था.. जिनके डर से दिल्ली का मुगल शासक 3 दिन तक बंकर में छुपा रहा हो.. उनके लिए 500 जमादार ऐसी बातें कहेंगे तो चुप नहीं रहूंगा..
 जो अंग्रेजों की सेना में जमादार थे वह लोग भी जब अपना इतिहास बताते हैं तब मुझको अपनी लेखनी चलानी पड़ती है ताकि सत्यता सामने आ जाए और लोग दिशा भ्रमित ना हो..
 अपनी गद्दारी से देश को गुलाम बनाने वाले अपने आप को तीस मार खाँ ना लिखें..
 जिसको ना पता हो वे इतिहास के किताब को उठाएं गूगल सर्च करें और इतिहास के प्रोफेसर से डिस्कशन करें

Sunday, 26 July 2026

मोदी और मुल्ला प्रेम 3

हिंदू बेवकूफ होता है.
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उसे बेवकूफ बनने में मजा भी आता है.
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बहुत जल्दी प्रचार तंत्र के झांसे में आ जाता है और झांसे में आकर व्यक्ति पूजा में जुट जाता है.
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पहले अंग्रेजों द्वारा भारतीय राजनीति में इंप्लांटेड मोहनदास को महात्मा बनाकर अपने सर पर बैठा लेता है और ईश्वर अल्लाह तेरो नाम गाना शुरू कर देता है.
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मोहन दास के गुणगान और पूजा शुरू कर देता है.
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करोड़ों की संख्या में कट जाता है अपनी मां, बहन, बेटियों की इज्जत लुटा कर... पीढियों की अपनी संपत्ति गंवाकर... जब आंखें खुलती हैं तो रोता हुआ गांधी को कोसता है और गोडसे को धन्यवाद देता है.
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फिर उसे बेवकूफ बनाने को दूसरा गुजराती आ जाता है. 56 मुस्लिम देशों की उम्मत द्वारा भारतीय राजनीति में इंप्लांटेड यह गुजराती, गुजरात दंगों में 300 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या करने और 50,000 हिंदुओं को जेलों में ठूंस देने के बाद... त्रिपुंड लगाकर फोटो खिंचवाकर, खुद को हिंदू हृदय सम्राट बना कर दिखाने का प्रचार करता है, और देश की सत्ता प्राप्त करते ही मुसलमानों के विश्वास को जीतने का नारा देता है और जी जान से मुसलमानों का विश्वास जीतने में लग भी जाता है.  
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बेवकूफ हिंदू फिर झांसे में आकर आरती उतारने लगता है और अंधी भक्ति में जुट जाता है.
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उससे पूछो कि भैया 10 वर्षों में हमारे लिए काम क्या किया यह भी तो बताओ? 
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तो अनपढ़ अंध भक्त अपने भगवान पर उंगली उठाने के जुर्म में गाली गलौज पर उतर आता है.
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तो मेरे प्यारे... बहुत ही अकलमंद मोदी की तरह ही बिल्कुल असली डिग्री वाले हिंदूओ... जरा नीचे पूछे गए सवालों का जवाब तो देने की कोशिश तो करो.
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और नहीं दे पाओ तो आंखों पर एक पट्टी और बांधकर ईश्वर अल्लाह तेरो नाम का गाना चालू रखो.
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क्योंकि तुम बेवकूफ बनने... कटने... और मरने के लिए ही बने हो.
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हम हिंदुओं के वोटों से सत्ता सुख भोग रहे नरेंद्र मोदीजी... भाजपा... और मोहन भागवत जी कृपया हम हिंदुओं के प्रश्नों का जवाब दीजिए.
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1....... विपक्ष में रहते हुए पहले जिस सच्चर कमेटी का आप लोग स्वयं पुरजोर विरोध करते रहे... सत्ता में आने के बाद उसी सच्चर कमेटी के हिंदू विरोधी प्रावधानों को क्यों लागू कर दिया? 
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2....... CAA बना तो लिया पर उसे आज तक लागू क्यों नहीं किया? CAA के तहत जान बचाकर भारत के बॉर्डर पर इकट्ठा हुए बांग्लादेशी हिंदुओं को देश में शरण क्यों नहीं की गई??? उन्हें लुटने मरने के लिए बॉर्डर से वापस क्यों भेजा गया??? मोदी जी अपने रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमान को लाखों की संख्या में देश में बसाया है.. क्या रोते-बिलखते अपनी जान की भीख मांगते कुछ हजार हिंदुओं को हिंदुओं के देश में, हिंदुओं की सरकार, कुछ दिन भी शरण नहीं दे सकती थी???
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3....... मोदी जी द्वारा खुद गुजरात में और भाजपा द्वारा अनेक राज्यों में मुसलमानों को रिजर्वेशन का फायदा दिलाने के लिए OBC में शामिल क्यों किया गया? हमारे ओबीसी भाइयों का हक छीनकर मुसलमानों को फायदा क्यों पहुंचाया गया???
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4....... केवल दिखावे के लिए धारा 370 हटाकर 1 साल बाद ही एग्रीकल्चरल लैंड कानून बनाकर, 15 साल का डोमिसाइल लगाकर बैकडोर से धारा 370 वापस क्यों लागू कर दी गई? क्यों नहीं भारत देश के नागरिकों को कश्मीर में जमीन खरीदने का अधिकार नहीं दिया गया???
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5.... .. एन.आर.सी.... एन.आर.सी... का झुनझुना क्यों बजाते रहे... आज तक देश में एनआरसी क्यों नहीं लागू किया गया? क्यों नहीं देश में घुसे मुस्लिम घुसपैठियों की पहचान नहीं की जा रही???
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6....... मोदी जी 2014 के पहले जिन्हें देश से बाहर निकालने के लिए चीख-चीख कर भाषण देते फिर रहे थे, उन रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर क्यों नहीं भेजा?
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7....... मोदी सरकार ने दिल्ली में रोहिंग्या / बांग्लादेशी मुसलमानों को पुलिस सुरक्षा के साथ EWS फ्लैट्स क्यों दिए?
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8....... कांग्रेस से मांग करते रहे पर खुद सत्ता में आने के बाद रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित क्यों नहीं किया? विपक्ष में रहकर मोदी जी अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती करने की मांग कांग्रेस से लगातार करते रहे... पर उन्हें खुद सत्ता में आए 11 वर्ष बीत गए, अहमदाबाद का नाम कर्णावती क्यों नहीं किया गया???
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9....... प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही राम मंदिर के लिए ढाई एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के लिए एक लाइन का अध्यादेश क्यों नहीं लाए? लगभग 5 साल कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा क्यों की गई और शंकराचार्यों, हिंदू संतो और हिंदू संगठनों द्वारा लड़े गए केस का निर्णय हिंदुओं के पक्ष में आने के बाद सारा क्रेडिट स्वयं क्यों ले लिया गया?
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10..... अयोध्या में 5 एकड़ जमीन मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए देने वाले कोर्ट के आदेश पर आपत्ति क्यों नहीं की?
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11..... हमारी आस्था के केंद्र मथुरा और काशी के मंदिरों को अपने एजेंडे से बाहर क्यों किया?
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12..... ज्ञानवापी विवाद में हिंदुओं की ओर से लड़ रहे एडवोकेट विष्णु शंकर जैन का समर्थन क्यों नहीं किया?
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13..... मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद को गिरफ्तार करने की बजाए आधी रात को देश के सर्वोच्च शक्तिशाली एनएसए अजीत डोभाल को उससे सलाह मशविरा करने के लिए भेज कर, उसे कहां और क्यों छिपा दिया गया? 
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14..... अनेक राज्यों में हिंदू हित के लिए अपनी आवाज उठा रहे आंदोलनरत हिंदुओं पर लाठियां क्यों चलवाई गईं?
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15..... बंगाल में हिंदुओं के ऊपर हिंसा, बलात्कार, आगजनी और पलायन क्यों नहीं रोका गया? क्या इसलिए कि मरता और पिटता हुआ हिंदू आप को वोट देता है और वोटों की खातिर आप उसे पिटने-मरने के लिए छोड़ देते हैं?
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16..... मणिपुर में कृष्ण भक्त मैतेयी हिंदुओं को मार रहे, उनके घरों और दुकानों को जला रहे कुकी आतंकियों के खिलाफ आप कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे? क्यों नहीं उन बेकसूर हिंदुओं की हत्याओं और बलात्कार पर आपके मुंह से एक शब्द भी नहीं फूट रहा??? क्यों उन कृष्णभक्त मैंतेई हिंदुओं के ईसाई कुकी हत्यारों के साथ सरकार चला कर उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है??? क्या देश के हिंदुओं ने आपको हिंदुओं को मरवाने के लिए वोट देकर सत्ता सुख प्रदान किया था???
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17..... पूरे देश में हो रही स्वयंसेवकों, अपने कार्यकर्ताओं और अन्य हिन्दुओं की नृशंस हत्याओं पर दुख क्यों नहीं व्यक्त किया गया और शबाना आजमी को चोट लगने पर मोदी जी तुरंत संवेदना व्यक्त करने क्यों निकल आए? क्यों बाइक चोर तबरेज अंसारी, दो तस्कर पहलू खान और गौ हत्यारे अखलाक के लिए मोदी जी आंखों में आंसू लाकर बयान देने निकल आए???
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18..... हिंदू संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए के लिए अपनी जान पर खेलकर मुस्लिम तस्करों से लड़ते आ रहे जांबाज गौरक्षकों को गली का गुंडा क्यों कहा गया? उनके डोजियर तैयार करवाने का निर्देश देकर उन्हें अपराधी क्यों बनाया गया?
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19..... मेवात में दंगाई मुसलमानों से हिंदुओं की रक्षा के लिए आगे आए मोनू मानेसर और उसके साथी बहादुर हिंदू युवकों को गिरफ्तार क्यों किया गया?
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20..... केन्द्रीय स्तर पर आज तक गौहत्या निषेध कानून क्यों नहीं बनाया गया?
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21..... जीवित पशुओं को विदेश भेजकर कटवाने के लिए विक्रय करने का हिंदू धर्म विरोधी फैसला क्यों किया गया?
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22..... आतंकवादियों पर लगाम लगाने के लिए विदेशी चंदा कानून (FCRA) निरस्त क्यों नहीं किया गया?
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23..... कांग्रेसियों द्वारा बनाए गए और हिंदुओं की संपत्ति हड़प रहे वक्फ एक्ट और वक्फ बोर्ड को समाप्त क्यों नहीं किया गया?
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24..... हिंदुओं के मंदिरों पर कब्जे के लिए कांग्रेसियों द्वारा बनाए गए Places of Worship Act को निरस्त क्यों नहीं किया गया?
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25..... हिंदुओं के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त क्यों नहीं किया? हमारे मंदिरों को दिए गए दान का पैसा मुस्लिमों और ईसाइयों के समाज के लिए खर्च करने पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही?
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26..... मोदी जी की डबल इंजन सरकार ने कर्नाटक में 2600 से ज्यादा हिंदू मंदिर क्यों तुड़वा दिए?और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विश्व हिंदू परिषद ने इसके विरोध में आवाज क्यों नहीं उठाई???
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27..... मोदी सरकार द्वारा काशी विश्वनाथ काॅरिडोर बनाने के लिए हजारों वर्ष पुराने सैकड़ों पुराणोक्त मंदिर व मूर्तियां क्यों तुड़वाए गए? और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विश्व हिंदू परिषद ने इसके विरोध में आवाज क्यों नहीं उठाई???
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28..... UPSC और अन्य सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की अधिकाधिक भर्ती करने के लिए छात्रवृत्ति, मुफ्त कोचिंग आदि योजनाएं क्यों बनाईं गई? हिंदुओं पर राज करने के लिए एक एक लाख रुपए की सरकारी मदद दे दे कर और इंटरव्यू में 13-13 नंबर बढ़ाकर कांग्रेस के जमाने से 10 गुना ज्यादा मुस्लिम आईएएस और आईपीएस क्यों बनाए गए?
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29..... अयोध्या में राममंदिर के समूचे शिल्पकार्य का कान्ट्रैक्ट राम मंदिर के दुश्मन और राम मंदिर की लड़ाई के दौरान हजारों हिंदुओं के हत्यारे मुसलमानों की कंपनियों को क्यों दिया गया?
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30..... कांग्रेस से भी कई गुना ज्यादा मुस्लिम तुष्टिकरण क्यों किया जा रहा है?
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31..... पिछले 9 वर्षों के लंबे समय में आप लोगों ने अहिंसक और शांतिप्रिय हिंदुओं की रक्षा हिंसक मुसलमानों से उनकी जान माल की सुरक्षा और हितों के लिए क्या किया?
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32..... मुस्लिमों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए कानून क्यों नहीं लाए गए?
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33..... मुस्लिम समाज के लिए अपनी लड़कियों की शादी 15 साल में करके उनकी जनसंख्या तेजी से बढ़ा कर भारत पर कब्जा करने के षडयंत्र को रोकने के लिए कोई कानून क्यों नहीं बनाया गया. या फिर हिंदू लड़कियों की शादी 18 साल से कम पर नहीं हो सकती यह कानून क्यों नहीं हटाया गया?
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34..... ईसाइयों और मुसलमानों द्वारा हिंदुओं का तेजी से किया जाता धर्मांतरण रोकने के लिए कड़ा कानून क्यों नहीं बनाया गया?
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35..... 14% मुसलमानों को हिंदुओं के खून पसीने की कमाई का 40% हिस्सा उनके लिए 300 विशेष योजनाएं बनाकर क्यों दिया गया?
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36..... हिंदुओं से अनाधिकृत रूप से जजिया कर वसूल करने वाली और हिंदुओं के उस पैसे को हिंदुओं के ही विनाश में लगाने वाली लाखों करोड़ की हलाल सर्टिफिकेशन की व्यवस्था को क्यों समाप्त नहीं किया गया? आज हिंदू अपने परिवार के लिए जो भी खरीदता है उसमें मुसलमानों के हलाल सर्टिफिकेशन का जजिया कर भी चुकाता है. यहां तक कि बाबा रामदेव तक को अपने सारे प्रोडक्ट पर हलाल सर्टिफिकेशन का निशान मुसलमानों से खरीदना पड़ता है.
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37..... क्यों पिछले 9 वर्षों में हमारे ही देश में हमारे धर्म की शिक्षा हमारे बच्चों को देने की आजादी हम हिंदुओं को नहीं दी गई?
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38..... क्यों पिछले 9 वर्षों के लंबे समय में औरंगजेब बाबर हुमायू के नकली इतिहास को हटाकर हमारे गौरवशाली इतिहास को भारत की शिक्षण व्यवस्था में शामिल नहीं किया गया?
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39..... क्यों 9 राज्यों में अल्पसंख्यक हो चुके हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा और सुविधाएँ नहीं दिलवा पाए? 
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40..... क्यों देश के शिक्षा तंत्र से ईसाईयों का नियंत्रण नहीं हटा पाए, जिनका एकमात्र मकसद भारत के हिंदुओं पर ईसाई सभ्यता और संस्कारों को थोप कर परोक्ष धर्मांतरण है. 
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41..... मुसलमानों की दादागिरी, गुंडागर्दी, लवजिहाद, हिंदुओं के हर त्यौहार पर पत्थरबाजी और सर तन से जुदा के विरुद्ध कानून क्यों नहीं बनाए गए?
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42..... क्यों हमारे देश की सबसे बड़ी मेजोरिटी मुसलमानों का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त नहीं किया गया?
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43..... अल्पसंख्यक मंत्रालय और अल्पसंख्यक आयोग को खत्म क्यों नहीं किया गया?
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44...... बिल्कुल असली डिग्री वाले मोदी जी हर साल दरगाहों पर चादर चढ़ाकर हिंदुओं को क्या संदेश देना चाहते हैं???
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45..... मोहन भागवत जी... 50 साल के लिए अपने देवी देवता भूल जाओ... मुसलमानों के बिना हिंदुत्व की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती... हिंदू और मुसलमान का डीएनए एक है... हर मंदिर के नीचे शिवलिंग क्यों ढूंढना... राम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लेना हमारी मजबूरी थी और संघ इसके बाद किसी भी मंदिर आंदोलन में कोई हिस्सा लेना नहीं चाहता... हिंदू समाज में समलैंगिकता महाभारत के जमाने से ही चली आ रही है... हिंदुओं में शादी एक कॉन्ट्रैक्ट होता है... जैसे ज्यादा अकलमंदी भरे आपके बयानों के पीछे हिंदू समाज को कौन सी दिशा देने का इरादा होता है?
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मोदी मुल्ला प्रेम 1

आज भी मुगलों के अंडकोष पर झूला झूल रही है मोदी सरकार
कटु किंतु यही सत्य है 

-दिलीप पाण्डेय

ये लाइन लिखने के लिए इसलिए विवश हुआ क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद किसी चम्पू ने ये रोना रोया कि बताओ उस शिक्षा मंत्री को हटा दिया गया जिसने मुगलों को इतिहास से हटा दिया । 

ये पूरी तरह गलत है । आज भी भारत के स्कूलों में भोले भाले बच्चों को मुगलों का पाठ पढ़ाया जा रहा है । इतिहास में किसी का नाम लिखा जाना उसका महिमा मंडन ही होता है । या तो फिर नाम इस तरह लिखा जाए कि पाठक के मन में घृणा पैदा हो । लेकिन वर्तमान इतिहास की स्कूली पुस्तकें नीरस हैं जिनसे बच्चों को कोई भी प्रेरणा नहीं मिलती है ना ही विदेशी हमलावरों के खिलाफ कोई घृणा पैदा होती है । ये मर्द वाली बातें हैं जो जफर सरेशवाला के चरणचुंबक नपुंसक लोग कभी नहीं समझ पाएंगे । 

चलो वक्फ बोर्ड नहीं खत्म कर सके... एक कानून लाकर पुरानी अवैध वक्फ इमारतों को वैध कर दिखावे की मर्दानगी पर तालियां बटोर ली लेकिन कम से कम इतिहास तो सही कर सकते थे क्या इससे भी अमेरिका रोक रहा था ?

12 साल बहुत होते हैं । एक पीढ़ी तैयार हो जाती है । 12 साल हो गए मोदी सरकार को अगर इतिहास भी हिंदुत्ववादी लिख दिया होता तो भी हम मानते कि इस सरकार ने कम से कम कुछ तो सुधार किया स्कूली शिक्षा में ।

सीखो इजराइल से... क्या इजराइल ये पढ़ाता है कि हिटलर के नाजी साम्राज्य की वास्तुकला कैसी थी और उन्होंने कौन कौन से युद्धों में जीत दर्ज की थी ? 

सारी दुनिया मानती है कि इस्लामिक राज में हिंदुओं के साथ जो हुआ वो दुनिया के इतिहास में बर्बरता की पराकाष्ठा है लेकिन ये मोदी सरकार मुगलों की वास्तुकला का पाठ पढ़ाते हुए मुगलों के अंडकोष से खेलते हुए ये दावा भी करती है कि वो हिंदूवादी है । 

इसको वो मुगलिया वास्तुकला नजर नहीं आती जिसमें सिरों के मीनार बनाए गए थे । अरे ! तुम्हारे अंदर इतनी भी बौद्धिकता नहीं कि स्कूली इतिहास इस लायक लिख सको कि हिंदू बच्चों को हिंदुत्व की प्रेरणा मिले । 

कालापानी में जाकर सावरकर की फोटो के आगे मत्था रगड़ते रगड़ते बोर हो गए तो ब्रह्माजी को रंडीबाज बताने वाले ज्योतिराव फुले के कदमों में लेट गए । यही तुम्हारी बौद्धिकता है । तुम सावरकर के अनुयायी हो कि फुले के ये तो तय कर लो ? 

अगर सच में कोई सावरकर के विचारों पर चलने वाली सरकार 12 साल तक चली होती तो आज देश में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिलता जो हमें बिलकुल भी नजर नहीं आ रहा है । नजर आ रहे हैं तो प्रधानमंत्री आवास के तहत हिंदुओं के टैक्स से बने हुए जिहादियों के करोड़ों मकान और उनमें चल रहे लव जिहाद ! 

और देखो कैसी अहसान फरामोशी है । हमने यूजीसी के खिलाफ इतना लिखा, यहां फेसबुक पर जो लिखा जाता था वो 24 घंटे में सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की जुबान से निकलता था । मां सरस्वती की कृपा से हमने अपनी लेखनी की ताकत से और लाखों बहादुर लोगों ने ऐसे काले कानून पर स्टे लगवाया । और मोदी समर्थकों की बहन बेटियों को ओबीसी जिहादियों से बचाया वरना यूजीसी के बाद तो ओबीसी जिहादी मोदी समर्थकों की बहन बेटियों को खुल्ले आम उड़ा ले जाते और किसी प्रधानमंत्री आवास योजना से बने मकान में ले जाकर अक्कड़ बक्कड़ खेलते । लेकिन इसके बाद भी निर्लज्ज मोदी के निर्लज्ज समर्थक हमारा अहसान ही नहीं मानते, इससे ज्यादा अहसानफरामोशी और क्या हो सकती है ? 


मोदी मुल्ला प्रेम 2

अगर आपमें मोदी जी के कपड़े, दाढ़ी, टोपी, झांकी और शानदार वीडियोज से ऊपर उठ कर देखने की दृष्टि हो... अगर तर्क करने की... प्रश्न पूछने की और सोचने की शक्ति हो आपमें... और साथ-साथ थोड़ा तथ्यों, थोड़ा घटनाओं का ज्ञान भी हो... तो जरा सोच कर बताएं...
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जिस तरह महाभारत और रामायण के युद्धों के अनुयाई... और अपने हर देवता को शस्त्रों के साथ पूजने वाले... लड़ाका हिंदुओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाने के लिए, उनके हथियार छीन लेने के लिए और हमारे देश को लूटने के लिए अंग्रेजों ने मोहनदास गांधी को भारतीय राजनीति में इंप्लांट किया था...
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उसी तरह क्या मोदी भारतीय राजनीति में 57 मुस्लिम देशों की उम्मत (संगठन) द्वारा गजवा-ए-हिंद के लिए बढ़ाया गया एक मोहरा है?
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अगर इस दृष्टिकोण से... आप मोदी के मुख्यमंत्री शासन या प्रधानमंत्री शासन के पूरे कार्यकाल को देखेंगे तो मुसलमानों के विश्वास और मुसलमानों के तृप्तिकरण की सारी पिक्चर, सारा परिदृश्य बिल्कुल साफ साफ नजर आएगा... 
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1..... गुजरात का मुख्यमंत्री रहते 2002 के दंगों में 300 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या मोदी ने क्यों कराई? ये पुलिस की गोलियों से मारे गए हिंदुओं की संख्या का गुजरात सरकार का ऑफिशियल फिगर है, याद रहे असली संख्या सरकारी फिगर से हमेशा कई गुना ज्यादा होती है. यहाँ ये भी याद रहे कि जलियांवालाबाग के हत्यारे जनरल डायर ने 379 मारे थे और मुल्ला मुलायम ने 28... मोदी के प्रचार तंत्र के चलते हम 28 हिन्दुओं को मारने वाले को मुल्ला मुलायम और 300 से ज्यादा हिंदुओं को मारने वाले मोदी को हिंदू हृदय सम्राट पुकारते हैं.
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2..... 50,000 से ज्यादा हिंदुओं को जेलों में क्यों डाल दिया गया? 
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3..... क्यों गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और आर एस एस का संगठन तबाह कर दिया गया? क्यों गुजरात में सैकड़ो हिंदू मंदिरों को नष्ट किया गया? जिसके विरोध में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल भी खड़े हुए थे. मोदी को गजनी ठहराते हुए उनका वीडियो इंटरनेट पर वायरल है.
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4..... क्यों हिंदुओं के गरजते शेर प्रवीण तोगड़िया को बर्बाद किया गया? 
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5..... क्यूँ हिंदू धर्म और हिंदुओं के लिए आवाज बुलंद करने वाले नूपुर शर्मा, नवीन जिंदल, अरुण यादव, काजल हिंदुस्तानी, पायल रोहतगी और राजा सिंह, बिट्टू बजरंगी, मोनू मानेसर का जीवन तबाह किया गया? क्यों हिंदुओं के लिए कानून बनाने की लगातार मांग करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्वनी उपाध्याय को झूठे आरोपों में जेल भेजा गया?
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6..... क्यों आधी रात को देश के सबसे ज्यादा शक्तिशाली व्यक्ति नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल को भेज कर मौलाना साद को फरार होने में मदद की गई?
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7..... क्यों मुसलमानों का विश्वास जीतने और उनका तृप्तिकरण करने की बात की गई, और मुसलमानों का तुष्टिकरण करने में कांग्रेस के भी रिकॉर्ड तोड़ दिए गए और गौ रक्षकों को गली का गुंडा ठहराया गया? 
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8..... क्यों हिंदुओं पर राज करने के लिए और गजवा ए हिंद के लक्ष्य पाने में मुसलमानों को मदद करने के लिए थोक के भाव कांग्रेस के जमाने से 10 गुना ज्यादा मुस्लिम आईएएस और आईपीएस... एक एक लाख की सरकारी मदद दे दे कर और फ्री कोचिंग फ्री रहना खाना दे देकर तैयार किए गए?
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9..... क्यों मुसलमानों को 300 विशेष योजनाएं प्रदान की गईं और हिंदुओं को एक भी नहीं?
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10..... कांग्रेस तक ने जिस सच्चर कमेटी को डस्टबिन में डाल के रखा था और जिसके हिंदू विरोधी प्रावधानों का भाजपा ने विपक्ष में रहते पुरजोर विरोध किया था, उसे क्यों लागू किया गया? 
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11... क्यों फ्री वैक्सीन अधिकतर मुस्लिम देशों को दिए गए? 
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12... क्यों मुस्लिम देशों पर संकट आने पर मोदी जी... हिन्दुओं के टेक्स का आटा, दाल, चावल, ट्रक्स, संसाधन और लाव-लश्कर लेकर तुरंत मदद को दौड़ पड़ते हैं? अफगानिस्तान हो या तुर्की, पाकिस्तान हो या हमास वाला फिलिस्तीन या हिंदुओं का कत्लेआम करने वाला बांग्लादेश.
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13... क्यों बड़े-बड़े मुस्लिम देश मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाज रहे हैं? ऐसा क्या किया है मोदी ने उनके लिए... जी बड़े-बड़े मुस्लिम देश मोदी को सर्वोच्च सम्मान से इसलिए नवाज रहे हैं इसलिए पुरस्कार दे रहे हैं क्योंकि मोदी मुस्लिम एजेंडे को फॉलो कर रहे हैं...हिंदुस्तान को तेजी से गजवा ए हिंद की तरफ ले जा रहे हैं.
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14... क्यों हर मुस्लिम की मौत पर मुखर होकर बयान देने वाले मोदी हिंदुओं के मरने पर जुबान सिल कर बैठ जाते हैं? गौ हत्यारे अखलाक की हत्या पर बोलने वाले, बाइक चोर तबरेज अंसारी और गौ तस्कर पहलू खान की हत्या पर दुख व्यक्त करने वाले, और तो और शबाना आजमी के पैर में चोट लग जाने पर दुख व्यक्त करने वाले मोदी बंगाल में हजारों हिंदुओं के मर जाने पर भी एक शब्द अपने मुंह से नहीं निकालते... पूरे हिंदुस्तान में हिंदुओं की हो रही हत्याओं पर मोदी ने एक बार भी मुंह खोला हो तो हमें जरूर बताइएगा.
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15... क्यों पिछले 9 सालों के लम्बे समय में हिंदुओं के लिए अति-आवश्यक मुद्दों जैसे मुस्लिम जनसँख्या पर लगाम... हमारे मंदिरों को शासन से मुक्ति... हमारे धर्म की शिक्षा हमारे बच्चों को देने की आजादी... हमारे गौरवशाली इतिहास को शिक्षण में शामिल करना और गुलामी का इतिहास समाप्त करना... 9 राज्यों में अल्पसंख्यक हो चुके हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा और सुविधाएँ दिलवाना... देश के शिक्षा तंत्र से ईसाईयों का नियंत्रण हटाना... धर्मांतरण के विरुद्ध सख्त से सख्त कानून बनाना... मुसलमानों की दादागिरी, गुंडागर्दी, लवजिहाद, सर तन से जुदा के विरुद्ध कानून बनाना... हिंदुओं के पैसे से आतंकवादियों को मदद में जुटी हलाल इकोनॉमी पर बैन लगाना... हिंदुओं की सम्पत्ति हथिया रहे वक्फ बोर्ड कानून को समाप्त करना... हमारे देश की सबसे बड़ी मेजोरिटी मुसलमानों का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त करना... अल्पसंख्यक मंत्रालय और अल्पसंख्यक आयोग समाप्त करना... हमारे हजारों मंदिरों पर मुसलमानों के कब्जे को बरकरार रखने के लिए बनाए गए प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट को हटाना... के साथ हिंदू समाज की अनेकों समस्याओं पर कोई काम नहीं किया गया... सच तो ये है कि पिछले 9 सालों में हिंदू समाज और देश के 100 करोड़ हिंदुओं की भलाई के लिए के लिए कोई भी काम किया ही नहीं गया. अगर आपके हिसाब से हमारे देश के 100 करोड़ हिंदू समाज के लिए कुछ किया गया है तो उस योजना... उस एक काम को... मुझे जरूर बताएं.
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मुझे तो पूरा यकीन है कि एक दिन हमको जरूर पता चलेगा... कि मोदी को भारतीय राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए ही 57 मुस्लिम देशों की उम्मत ने गोधरा ट्रेन का अग्निकांड और पुलवामा विस्फोट कराया था..