Friday, 6 February 2026

ब्रह्मा सरस्वती विवाह



अक्सर मुस्लिम और वामपंथी दुष्प्रचार करते हैं कि ब्रह्मा ने सरस्वती से विवाह किया था लेकिन जब आप उनसे पूछोगे यह किस किताब में लिखा है तब वह कहेंगे #सरस्वती पुराण में लिखा है। उसके बाद जब आप उनके सामने 18 पुराणों के नाम बता देंगे और फिर आप पूछेंगे इन 18 पुराणों में कोई सरस्वती पुराण तो है ही नही, तो वह गूगल पर सर्च करेगा और कहेगा #डीएनझा की किताब में लिखा है.....
       यह डीएन झा, रोमिला थापर, इरफान हबीब ,सतीश चंद्र यह भारत के सभी इतिहासकार एक ऐसी संस्था की उपज है, जो संस्था मार्कसिस्ट हिस्टोग्राफी कहलाती है। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के अधिवेशन में वामपंथी नेताओं ने एक प्लानिंग की कि भारत जैसे देश पर वामपंथ का शासन कैसे हो सकता है क्योंकि भारत के युवा वामपंथियों के जाल में इतनी आसानी से नहीं फंसने वाले है....
         क्यूबा के कम्युनिस्ट शासक फिदेल कास्त्रो, ने एक समय कहा था कि हमें 10 साल या 20 साल की प्लानिंग नहीं करनी होगी, हमें सबसे पहले जिस भी देश पर कब्जा करना है उस देश के इतिहास को विकृत करना पड़ेगा, उस देश के शिक्षा संस्थानों में घुसना पड़ेगा । फिर उन शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों में हम उनकी मूल संस्कृति मूल धर्म के प्रति ऐसा जहर बोयेंगे कि वह धीरे-धीरे वामपंथी विचारधारा का हो जाएगा । इसके लिए हमें कम से कम 50 से 80 साल की प्लानिंग लेकर चलनी होगी....
        जब भारत को 'आजादी' मिली तब वामपंथी दलों ने नेहरू (जो खुद एक कट्टर कम्युनिस्ट थे) से एक समझौता किया । कि आप देश चलाइए हम आपको देश चलाने में कोई डिस्टर्ब नहीं करेंगे, हमें आप देश के कुछ शिक्षा संस्थान दे दीजिए, इतिहास लिखने का काम दे दीजिए और हमारी पसंद का शिक्षा मंत्री नियुक्त करते रहिए... परिणामस्वरूप भारत का जो पहला शिक्षा मंत्री (मौलाना अबुल कलाम) बना, उसके पास कोई डिग्री नहीं थी बल्कि उसके पास मुफ्ती की डिग्री थी, वह मक्का में पैदा हुआ था और 30 साल से मक्का की मस्जिद में तकरीरें देता था। सऊदी अरब का नागरिक था..
       उसके बाद वामपंथियों ने भारतीय इतिहास प्रतिष्ठान से लेकर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी तमाम जगहों पर कब्जा किया। अपने विचारधारा के इतिहासकारों से झूठ का पुलिंदा इतिहास की किताबें लिखवाइँ । नेहरू के बाद इंदिरा गांधी ने भी इस परंपरा को जारी रक्खा , इंदिरा गांधी ने भी वामपंथियों को खुली छूट, इस शर्त पर दे दी कि कम्युनिस्ट , इंदिरागांधी की सरकार को डिस्टर्ब न करें...
                 मार्क्सवादी इतिहास इतिहासकार में से सबसे झूठे और षड्यंत्रकारी इतिहासकार प्रोफेसर डीएन झा की गवाही,मुस्लिम पक्ष की ओर से राम मंदिर केस में हुई थी,उन्होंने बयान दिया था , कि राम कभी हुए ही नहीं थे,काल्पनिक थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके ही शोध के आधार पर केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रामसेतु तोड़ने का आदेश दिया था ।
           हिंदू पक्ष के वकील ने डीएन झा का एक सेमिनार में दिया गया वीडियो चलाया जिसमें वह भगवान राम को शराबी और मांसाहारी बता रहे थे। उसके बाद जज ने उनसे सवाल किया कि आप एक व्यक्ति को काल्पनिक बताते हैं फिर दूसरे सेमिनार में उसी व्यक्ति को शराबी और मांसाहारी बताते हैं, ऐसा कैसे हो सकता है कि जो व्यक्ति काल्पनिक है तो आपने यह कैसे शोध कर लिया कि वह शराबी और मांसाहारी भी है? उसके बाद डीएन झा की बोलती बंद हो गई और उनकी गवाही को और उनके रिसर्च को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
        अभी रक्षाबंधन के दिन तमाम अखबारों में AMU के प्रोफेसर इरफान हबीब ने एक लेख लिखा कि रक्षाबंधन के दिन अकबर से लेकर जहांगीर के दरबार में लाखों महिलाएं आती थी और मुगल बादशाह सबसे राखी बधवाते थे। जबकि सच्चाई यह है कि जब अकबर छोटा था तब से बैरम खां और उसकी बेगम सलीमा सुल्ताना अकबर की संरक्षक थी। अकबर ने अपने ही बहनोई बैरम खां का कत्ल करवा कर अपनी सगी फुफेरी बहन से निकाह कर लिया था ।
                    अब ऐसे मुगलों के दरिंदे आचरण को किस तरह से यह इतिहासकार छुपाकर एक इनकी शानदार छवि बनाने की कोशिश करते हैं सोचिए, भारत के कम्युनिस्ट और 'सेकुलर' इतिहासकारों ने जो गंदगी फैलाई है उसे मिटाने में कई सदी लगेगी..... हालांकि अधिकांश बंटाधार तो हो ही चुका है...

जयश्रीराम 🙏

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