Tuesday, 3 March 2026

यादव अहीर

तर्क से आओ!
मेरा उद्देश्य किसी समाज को नीचा दिखाना नहीं था। प्रत्येक जाति को खुद के जाति पर गर्व होना चाहिए।
अपनी जाति बताते वक़्त हीन भावना व असुरक्षा के भाव नहीं आने चाहिए।
कुछ वर्षों से मैं निरंतर देख रहा हूँ कि क्षत्रियों को नीचा दिखाया जा रहा है। क्षत्रिय इतिहास को राजपूत इतिहास से अलग बताकर उपहास उड़ाया जा रहा है।
मुगलों के साथ राजपूतों का संबंध बताकर उन्हें गद्दार घोषित किया जा रहा है।
वैसे तो इस कृत्य में कई समाज सम्मिलित है।
परन्तु मुख्य रूप से संलिप्त समाज है अहीर, जाट और गूजर।
लगभग महीने भर से मैं देख रहा हूँ की अहीर समाज द्वारा रोज - रोज सोशल मिडिया के माध्यम से जहर उगला जा रहा है।
इतिहास पर सवाल उठाये जा रहे हैं।
राजपूतों को मुग़लपूत बोला जा रहा है।
अहीर समाज काल्पनिक पात्र जोधा बाई और किसी एक पुराण( ब्रह्मवैर्त पुराण ) को कोट कर के राजपूतों पर ग़लत टिप्पणी किया जा रहा है।
वैसे देखा जाए तो ग्रंथ लिखने वालों ने लगभग जातियों में कमियाँ निकाल रखी है।
इसलिए हमें किसी दूसरे पर कीचड़ नहीं उछालना चाहिए।
परन्तु ज़ब कोई सवाल कर बार - बार उकसाए तो जबाव जरूर देना चाहिए।
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:: =अहिरों का ऐतिहासिक साक्ष्य =::
♦️ वाल्मीकि रामायण - 
1. युद्ध कांड (सर्ग 22) आभीर पापकर्म करने वाले दस्यू, लुटेरा...।
2. समुद्र ने अहीरों का वर्णन करते हुए कहा कि वे लोग उसके जल का स्पर्श कर उसे अपवित्र कर रहे हैं और वे स्वभाव से भयानक, पापी और लुटेरे हैं।
3. समुद्र देव ने प्रकट होकर राम से प्रार्थना की और उत्तर दिशा में स्थित 'द्रुमकुल्य' नामक स्थान के बारे में बताया, जहाँ आभीर (अहीर) जाति के लोग रहते थे।
4. उत्तरेणावकाशोऽस्ति कश्चित्पुण्यतमो मम।
द्रुमकुल्य इति ख्यातो लोके ख्यातो यथा भवान्॥ 29॥
तत्र पापकृतो धूर्ता आभीराः प्रमुखा दयः।
ते मे तोयं पिबन्त्येते न सह्ये पापकर्मिणः॥ 30॥
♦️ रामचरित मानस -
1. "आभीर जवन किरात खस स्वपचादि अति अघरूप जे। कहि नाम बारक तेपि पावन होहिं राम नमामि ते॥" 
2.रामचरितमानस में अहीरों को तेली, कुम्हार, कोल और कलवार जैसी अन्य जातियों के साथ 'वर्णाधम' (वर्णों में नीचे) या शूद्रवत श्रेणी में रखा गया है।
♦️  महाभारत ( जयसंहिता ) -
1. सभा पर्व (अध्याय 32, श्लोक 10)
शूद्राभीरगणाश्चैव ये चाश्रित्य सरस्वतीम्।
वर्तयन्ति च ये मत्स्यैर्ये च पर्वतवासिनः॥

अर्थ: जो शूद्र आभीर गण सरस्वती नदी के आश्रय में रहते हैं, जो मछलियों पर जीविका चलाते हैं और जो पर्वतों के निवासी हैं (उन पर नकुल ने विजय प्राप्त की)। 
2. अश्वमेधिक पर्व (अध्याय 29, श्लोक 16) 
आभीरा द्राविडाश्चैव काम्बोजा यवनास्तथा।
वृषलत्वं परिगता ब्राह्मणनामदर्शनात्॥

आभीर, द्रविड़, कम्बोज और यवन जाति के लोग ब्राह्मणों (संस्कारों) के दर्शन न होने या उनके संपर्क से दूर रहने के कारण वृषल  बन गए।
3. शल्य पर्व (अध्याय 37, श्लोक 1)
ततो विनशनं राजन् जगाम सरितं वरा।
शूद्राभीरान् प्रति द्वेषाद् यत्र नष्टा सरस्वती॥ 

अर्थ: हे राजन! शूद्रों आभीरों के प्रति द्वेष के कारण वह श्रेष्ठ नदी (सरस्वती) विनशन नामक स्थान पर लुप्त हो गई।
4. मौसल पर्व (अध्याय 7) 
ततस्ते पापकर्माणो लोभोपहतचेतसः।
आभीरा मन्त्रयामासुः समेत्येदममर्षणः॥
अर्थ: तब उन पापकर्म करने वाले और लोभ से भ्रष्ट बुद्धि वाले आभीरों ने एक साथ मिलकर क्रोधपूर्वक यह सलाह की (कि अर्जुन अकेला है और इनके पास बहुत धन है, अतः इन्हें लूट लिया जाए)। 
5. वन पर्व अध्याय  188
आन्ध्राः शकाः पुलिन्दाश्च यवनाश्च नराधिपाः।
काम्बोजा बाह्लिकाश्चैव शूराश्चाभीरा नरोत्तम॥ 35॥
न तदा ब्राह्मणः कश्चित् स्वधर्ममुपपालयेत्।
शूद्रतुल्या भविष्यन्ति त्रयो वर्णा नरोत्तम॥ 36॥
♦️ मनुस्मृति -
1. मनुस्मृति (अध्याय 10, श्लोक 15)
आभीर की उत्पत्ति: ब्राह्मण पिता और अम्बष्ठ जाति की माता के संसर्ग से जो संतान उत्पन्न होती है, उसे 'आभीर' कहा जाता है।
2.मनुस्मृति के दसवें अध्याय में विभिन्न जातियों की उत्पत्ति का वर्णन है, जहाँ आभीरों (अहीरों) की उत्पत्ति और उनके सामाजिक वर्ग को स्पष्ट किया गया है। मनुस्मृति में इन्हें 'वर्णसंकर' (मिश्रित जाति) की श्रेणी में रखा गया है।
♦️  व्यास स्मृति -
1.व्यास स्मृति के अनुसार, अहीरों (आभीर) को शूद्र श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है। ग्रंथ के प्रथम अध्याय के श्लोक 10, 11 और 12 में विशेष रूप से 'अहीर, गोप और ग्वाले' का उल्लेख करते हुए उन्हें शूद्र वर्ण का बताया गया है।
2.मूल श्लोक (व्यासस्मृति, 1.10-12)
बर्द्धिको नापितो गोप: आशापः कुम्भकारकः।
वणिक् किरातः कायस्थः मालाकारः कुटुम्बिनः॥
वरटो मेदश्चाण्डालः दासः श्वपच कोलकः।
एते अन्त्याः समाख्याता ये चान्ये गवासनाः॥ 
♦️ पुराण - पुराणों के अनुसार अहीर शूद्र और अंत्यज है।
1.वायु पुराण
2.मत्स्य पुराण 
3.भागवत पुराण 
4.विष्णु पुराण 
5.ब्रह्मांड पुराण 
इन पुराणों में अहिरों को नीच व पापी माना गया है।
♦️ मध्यकाल में - मध्यकाल में अभीरों कन्याओं को राजपूतों के रखैल के रूप में वर्णित है।
♦️ अकादमिक किताबों और साहित्यों में - 
अकादमिक किताबों और साहित्यों में अहिरों को शूद्र और पिछड़ा बताया गया है।
♦️ इतिहास के किताबों में - इतिहास के किताबों में अहिरों को शूद्र बताया गया है।
♦️ सरकारी आंकड़ों में - सरकारी आंकड़ों में अहिरों को पिछड़े वर्ग में रखा गया है।
♦️ सरकारी गजेटियर - 
सरकारी गजेटियर (जैसे 'इम्पीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया') और ब्रिटिश कालीन जनगणना अभिलेखों में अहीरों की सामाजिक स्थिति के बारे में मिश्रित विवरण मिलते हैं:
1. कई पुराने ब्रिटिश गजेटियर और ऐतिहासिक स्रोतों में अहीरों को उनके पशुपालन और कृषि संबंधी व्यवसायों के कारण पारंपरिक हिंदू वर्ण व्यवस्था में शूद्र श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया था।
2.उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ गजेटियर में उन्हें "स्वच्छ शूद्र" (Clean Shudra) माना गया है, जिनसे उच्च वर्ण के लोग जल ग्रहण कर सकते थे।
♦️ आरक्षण - पिछड़े वर्ग का आरक्षण भी शूद्र होने की वज़ह से ही मिला था।
♦️1990 के दशक - अहिरों की स्थिति 1990 तक बदतर हुआ करती थी। अन्य दलित और अहिरों में विशेष फ़र्क नहीं था।
♦️ वर्तमान सामाजिक स्थिति - क्षत्रिय बनना ही जीवन का उद्देश्य है।
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तुम एक जोधा बाई का नाम लेकर राजपूतों को नीचा दिखाते हो जिसका कोई ऐतिहासिक साक्ष्य भी नहीं है।
लेकिन तुम्हारे विरुद्ध अनगिनत साक्ष्य है...।
मैं प्रस्तुत करना नहीं चाह रहा था किन्तु तुमलोगों ने मजबूर किया।
किसी पुराण को कोट करते हुए तुमने माँ सरस्वती पर अभद्र टिप्पणी की।
तुमने कहा बेटीचोद शब्द तब से प्रचलित है ज़ब से ब्राह्मण ब्रह्मा ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया।
ये बात सच है की ब्रह्मा का किसी पुराण में सरस्वती से विवाह का जिक्र है...।
किन्तु बेटीचोद बोलना कितना नैतिक था?
ज़ब तुमने ब्रम्हा वाले मुद्दे को सच मान लेते हो क्योंकि कहीं लिखा हुआ है।
ज़ब तुम जोधा को सच मान लेते हो क्योंकि कहीं लिखा हुआ है। फिर तो अहिरों के बारे में बहुत कुछ लिखा है धर्म ग्रंथों में।
सबको सच मान लो...।
एक बात याद रखना अहिरों! तुम्हारे क्षत्रिय बनने का भूत न उतार दिया तो मेरा नाम भी रूद्र प्रताप सिंह नहीं।
आज से तुम्हारी खुदाई शुरू कर चुका हूँ।
अभी राणा समर, विक्रांत ठाकुर और निशांत सिंह राजपूत के पोस्ट आने बाकि ही है।
जबाव और प्रतिकार तैयार रखो।
तार्किक तौर पर.... बकैती नहीं करनी है।

✍️ रूद्र प्रताप सिंह 
क्षत्रिय शौर्य 

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