Tuesday, 17 March 2026

मनुष्यों में मोह पुरष और माया स्त्री होती है।

मनुष्यों में मोह पुरष और माया स्त्री होती है। 

हमारे शास्त्रों में लिखा है कि पुरष स्थिर और स्त्री अस्थिर होती है। 

माया या स्त्री या शक्ति क्योंकि ऊर्जा का रूप होती है इसलिए ऊर्जा स्थिर नहीं रहती। बल्कि लगातार परिवर्तित होती है एक रूप से दूसरे में ना ही ऊर्जा को स्टोर किया जा सकता है। इसलिए माया या स्त्री या शक्ति जब किसी मोह या पुरष के संपर्क में आती है तो वह पूरे के पूरे मोह या पुरष में व्याप्त हो जाती है और वहां किसी दूसरी माया या स्त्री या शक्ति की उपस्थिति की बर्दास्त नहीं कर सकती यही कारण है सास बहू ननद भाभी आदि के आपसी रंजिश का। 

लेकिन माया तो अंतहीन है इसलिए माया या स्त्री या शक्ति किसी पुरष या मोह में व्याप्त होने के बावजूद भी बाकी संसार में फैलाव बना कर रखती है। 

इसीलिए हमारे शास्त्रों में लिखा है कि माया या स्त्री को कभी गुप्त भेद की बातें नहीं बतानी चाहिए। इसलिए कोई पुरष या मोह किसी भी स्त्री या माया या शक्ति को पूरी तरह से जान नहीं पाता। जबकि माया या स्त्री या शक्ति किसी भी पुरष या मोह में क्योंकि पूरी तरह से व्याप्त होती है इसलिए कोई भी स्त्री या माया या शक्ति उसकी पूरी नस नस से वाकिफ होती है।

इसलिए आप ने देखा होगा जब भी कोई पुरष अपने सामान्य काम काज में व्यस्त होता है तो उसकी पत्नी या गर्लफ्रेंड उसकी कोई ज्यादा परवाह नहीं करती लेकिन जैसे ही वह किसी दूसरी स्त्री या माया या शक्ति से मिलने का कार्यक्रम बनाता है तो उसकी पत्नी या गर्लफ्रेंड चाहे सात समुंदर पार हो उसे उस बात की भनक लग जाती है और वह चाहे फोन पर या खुद एकदम से आपके पास पहुंच जाएगी और आपकी ऐसी तैसी कर के छोड़ेगी। क्योंकि स्त्री या माया या शक्ति का फैलाव अंतहीन होता है।

लेकिन जब यही काम स्त्री या माया या शक्ति खुद करे और किसी दूसरे पुरष या मोह के साथ अंतरंग संबध बना रही हो और उसके पति या मोह या ब्वॉयफ्रेंड का उसी समय फोन भी आ जाए तो वह दूसरे पुरष को दो मिनट चुप रहने को कह कर अपने पति या बॉयफ्रेंड को ऐसी डांट लगाएगी की उसका पति या बॉयफ्रेंड भूल कर भी दूसरी बार यह गलती नहीं करेगा। 
और वापिस घर आ कर ऐसा तगड़ा विक्टिम कार्ड प्ले करेगी कि आप हाथ जोड़ कर माफी मांगने पर मजबूर हो जाएंगे। और कोई पति समझ ही नहीं पाएगा की ऐसा भी हो सकता है। 

पुरष कभी भी स्त्री या माया के असली कारनामों को ना कभी सोच सकता है ना समझ सकता है ना कभी उसे इन बातों का आभास हो सकता है। क्योंकि मोह या पुरष स्थिर होता है। 

अब यही बात लेवल सिस्टम से समझते हैं। पुरष या मोह को शास्त्रों में स्थिर कहा गया है। इसलिए कोई भी पुरष अपने जन्म नक्षत्र और ग्रह स्थिति के अनुसार किसी एक लेवल पर फोकस होता है जबकि स्त्री अपने हार्मोनल साइकिल की वजह से पूरे माह में सभी लेवल्स पर बारी बारी से फोकस बदलती रहती है। और अपने फोकस के हिसाब से किसी एक लेवल पर फोकस्ड पुरष को अपने साथ दूसरे लेवल पर ले के जाना चाहती है और लगातार यह खीचतान जीवन भर चलती रहती है। 

अगर आप में से कोई भी ऐसा पुरष है जो अपने घर में अपनी स्त्री से छुपा कर कोई अपनी वस्तु रख सकता है तो बताएं यह एक एक्सेप्शनल केस होगा। लेकिन स्त्री अपनी पता नहीं कितनी चीजे पूरा जीवन भर पति से छुपा कर पूरे घर में रखती हैं और पति को भनक भी नहीं लगती। कभी आप अपनी पत्नी कि अलमारी को अपनी मर्जी से खोल कर देखो क्या हालत होगी। जबकि आप अपनी जेब भी पत्नी से छुपा कर नहीं रख सकते।

इसी खींचतान से पुरष को कर्म करने की शक्ति प्रदान करती है। और स्त्री या माया या शक्ति अपने अंतहीन फैलाव के कारण समाज में उस पुरष को अन्य लोगों से जोड़े रखती है। चाहे रिश्तों से चाहे दोस्ती से चाहे दुश्मनी से। मतलब माया या स्त्री समाज में एक्शन इंटरेक्शन बनाए रखती है। नहीं तो शक्ति या स्त्री या माया के बिना शिव या पुरष या मोह एक शव ही होता है।

इसलिए स्त्री को सृष्टि का जन्मदाता कहा जाता है। अगर स्त्री या माया ना हो तो संसार रुक जाएगा।

जब मोह या पुरष या शिव या पदार्थ या मैटर या पॉजिटिव आयन और माया या स्त्री या शक्ति या ऊर्जा या नेगेटिव आयन। 

जब एक दूसरे से अलग होते है तो क्या क्या हो सकता है। साधारण भाषा में समझ ले पति पत्नी या गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड का जब रिश्ता टूटता है।  

जैसा मैने ऊपर ही लिखा है कि माया या स्त्री किसी पुरष या मोह में पूरी तरह समा जाने के बावजूद भी बाकी संसार में अनन्त तक फैली रहती है। इस प्रकार से एक स्त्री या माया किसी पुरष या मोह को बाकी दुनिया के साथ जोड़ कर रखती है चाहे दोस्ती में चाहे दुश्मनी में या किसी दूसरे रिश्तों में। स्त्री या माया किसी पुरष या मोह को एक्शन और इंटरेक्शन में उलझाए रखती है। 

लेकिन जीवन की परिभाषा में किसी भी जीव में स्त्री के जीवन का मूल बायलॉजिकल उद्देश्य संतान उत्पन्न करना होता है ताकि सृष्टि आगे बढ़ती रहे। अब कोई भी स्त्री या माया जब किसी मोह या पुरष से अलग होती है तो यह घटना एक रासायनिक क्रिया की तरह होती है। जब तक एक बॉन्ड पूरा नहीं टूटता और नया नहीं बन जाता तब तक ऊर्जा का इस्तेमाल या निकलना जारी रहता है। 

मतलब स्त्री या माया जब एक मोह या पुरष से पूरी तरह निकल कर किसी दूसरे मोह या पुरष में नहीं चली जाती तब तक कोई ना कोई एक्शन रिएक्शन होता रहता है। यह काम एक झटके में नहीं होता इसको वर्षों भी लग सकते हैं। 

जब तक कोई स्त्री एक पुरष से अलग हो कर दूसरे पुरष से पूरी तरह गहन रूप से शारीरिक और मानसिक संबध नहीं बना लेती या संतान प्राप्त नहीं कर लेती तब तक पहले वाला पुरष या मोह चैन से नहीं जी पाता मतलब उस स्त्री की याद में डूबा रहता है और उदासी भरे गाने सुनता रहता है या मदिरा का करते रहता है। 

जब कोई स्त्री या माया या शक्ति किसी पुरष या मोह के प्रेम में होती हैं तो यह बात सौ प्रतिशत तय है कि वह स्त्री उस पुरष के साथ गहन शारीरिक और मानसिक संबंध बनाने का या फिर संतान उत्पन्न करने का विचार बनाए रखती है। और ऐसे हर प्रेमी जोड़े में यह वचन एक दूसरे के साथ किया जाता है। दोनों मिल कर अपने होने वाले बच्चों कि कल्पना अवश्य करते है। क्योंकि जीवन का मूल बोलॉजिकल उद्देश्य हर जीव का यही होता है अपना वंश आगे बढ़ाने का इसी कारण यह स्त्री पुरष का आकर्षण होता है।

अब जब तक स्त्री पहले पुरष से अलग होकर जब तक दूसरे पुरष से गहन क्षणों का मिलन या संतान उत्पन्न नहीं कर लेती तब तक पहले वाला पुरष उस स्त्री से मानसिक रूप से जुड़ा रहता है । चाहे उनकी आपस में बातचीत हो या ना हो। वे एक दूसरे की स्थिति और विचार सिर्फ अपनी कल्पनाओं में ही पता लगा लेते है।

अगर सालों से बिछड़े ऐसे जोड़े अगर कभी मिल जाएं तो आपस में नज़रें भी नहीं मिला पाते। लेकिन मन ही मन एक दूसरे से बातें कर लेते हैं।

इससे उन दोनों में ऊर्जा का आदान प्रदान होता है। 

इसलिए ऐसे बिछड़े प्रेमी जोड़े को एक दूसरे के लिए प्रार्थना करनी चाहिए कि वे जल्दी से समागम के गहन क्षणों में उतरे या फिर जितना जल्दी हो संतान उत्पन्न कर लें। ताकि ये मोह और माया का एक्शन रिएक्शन समाप्त हो सके। या किसी व्यक्ति को चाहिए कि ऐसे एक्शन रिएक्शन से बचने के लिए वह अपना फोकस माया स्त्री या शक्ति के साथ गहन क्षणों पर केंद्रित करे। 

इस प्रक्रिया में महीनों या कभी कभी वर्षों भी लग सकता है।

आज बस इतना ही......

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