Sunday, 1 March 2026

सरदार सिख

श्री तेजोमल जी (गुरु तेग बहादुर) को (सिख समुदाय का कोलेजियम) गुरु पद के योग्य नहीं मानता था। आठवें गुरु हरकिशन जी अल्प आयु में ही चेचक के कारण प्रलोक सिधार गये थे। काफी समय तक गुरु पद खाली रहा। तेजोमल जी हरि मन्दिर से भी निष्कासित रहै और झारखण्ड में जा बसे थे। पटना में उन के स्पुत्र गोबिन्द राय ( गुरु गोबिन्द सिंह) का जन्म हुआ था।बाद में तेजोमल जी जम्मु के पास शिफ्ट हो गये थे और कशमीरी पण्डितों के आग्रह पर औरंगजेब के सामने गये थे। बीच में बहुत कुछ विवादस्पद घटनायें हैं जिनका जिक्र मैं अभी नहीं कर रहा हूं। औरंगजेब ने उन से कई कारणों से सफाई मांगी थी जिस का अपेक्षित उत्तर ना मिलने के कारण उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। गुरु गोबिन्द सिहं पिता की शहादत के पश्चात (जो उस समय 13-14 वर्ष के थे) ने हिम कुण्ड स्थान पर शिव आराधना कर के देवी भगवती की प्रेरणा से खालसा पंथ की नीवं रख कर वीरता के साथ कर्तव्य पथ पर कर्म योग सिखाया।

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