शायद हमारे त्रिकालज्ञ ऋषि जानते रहे होंगे कि ऐसे प्रवाद भी रचे जायेंगे तो उन्होंने फलश्रुति की परम्परा विकसित की।
अब उसके अनुसार स्थिति यों है:
१.ब्रह्म पुराण (Brahma Purana)फलश्रुति: इसे 'आदिपुराण' भी कहते हैं। इसके श्रवण से ब्राह्मण वेदों और ब्रह्मज्ञान का ज्ञाता बनता है, क्षत्रिय संग्राम में विजयी होकर पृथ्वी का पालन करता है, वैश्य व्यापार में समृद्धि और शूद्र उत्तम आरोग्य तथा सुख-सम्मान प्राप्त करता है।
२. पद्म पुराण (Padma Purana)फलश्रुति: भगवान विष्णु के नाभि-कमल की महिमा वाले इस पुराण को सुनने से ब्राह्मण परम गति को पाता है, क्षत्रिय बल-पराक्रम से युक्त होता है, वैश्य को अटूट धन की प्राप्ति होती है और शूद्र सब पापों से छूटकर पवित्र हो जाता है।
३. विष्णु पुराण (Vishnu Purana)फलश्रुति: भगवान पराशर द्वारा रचित इस पुराण के पाठ से ब्राह्मण का आत्मबल और वाक-सिद्धि बढ़ती है, क्षत्रिय को शत्रुओं पर विजय मिलती है, वैश्य पशुधन और धान्य से समृद्ध होता है तथा शूद्र भगवान विष्णु की भक्ति पाकर श्रेष्ठ गति प्राप्त करता है।
४. वायु पुराण / शिव पुराण (Vayu / Shiva Purana)फलश्रुति: शिव-महिमा से ओतप्रोत इस पुराण को सुनने से ब्राह्मण को शिवसायुज्य (ज्ञान) मिलता है, क्षत्रिय का तेज बढ़ता है और वह अजेय बनता है, वैश्य का व्यापार देश-विदेश में फैलता है और शूद्र को समाज में उच्च सम्मान और सुख की प्राप्ति होती है।
५. श्रीमद्भागवत पुराण (Srimad Bhagavata Purana)फलश्रुति: भक्ति का सर्वोपरि ग्रंथ होने के कारण इसकी फलश्रुति आध्यात्मिक है। इसके श्रवण से ब्राह्मण को भक्तिरस और ज्ञाननिष्ठा, क्षत्रिय को धर्मपरायणता और न्यायपूर्ण विजय, वैश्य को निष्काम कर्म से शुद्धि और शूद्र को दुःखों से आत्यंतिक मुक्ति तथा भगवद-धाम मिलता है।यह भी कि:
विद्याप्रकाशो विप्राणां राज्ञां शत्रुजयो विशाम् । धनं स्वास्थ्यं च शूद्राणां श्रीमद्भागवताद् भवेत्॥
६. नारद पुराण (Narada Purana)फलश्रुति: इस पुराण के अनुसार, इसे सुनने वाला ब्राह्मण जितेंद्रिय होकर तपस्वी बनता है, क्षत्रिय संकटों से मुक्त होकर राज्य सुख भोगता है, वैश्य ऋणों से मुक्त होकर धनवान बनता है और शूद्र का अंतःकरण शुद्ध हो जाता है।यह भी कि इसके पाठ से ब्राह्मण वेदोंका भण्डार होता है, क्षत्रिय इस भूतलपर विजय पाता है, वैश्य धन-धान्यसे सम्पन्न होता है तथा शूद्र सब प्रकारके दुःखोंसे छूट जाता है।
७. मार्कण्डेय पुराण (Markandeya Purana)फलश्रुति: इसमें 'दुर्गा सप्तशती' भी शामिल है। इसका पाठ करने से ब्राह्मण को मंत्रसिद्धि, क्षत्रिय को शौर्य और शत्रुओं का नाश, वैश्य को लक्ष्मी की स्थायी कृपा तथा शूद्र को भय, व्याधि और क्लेशों से सर्वथा मुक्ति मिलती है।
८. अग्नि पुराण (Agni Purana)फलश्रुति: इस ज्ञानकोषीय पुराण को सुनने से ब्राह्मण समस्त विद्याओं (चौदह विद्याओं) में पारंगत होता है, क्षत्रिय अस्त्र-शस्त्र और कलाओं में निपुण होकर विजयी होता है, वैश्य धन-धान्य का स्वामी बनता है और शूद्र सब प्रकार के भयों से मुक्त होकर सुख पाता है।
९. भविष्य पुराण (Bhavishya Purana)फलश्रुति: भविष्य की घटनाओं और सूर्योपासना से युक्त इस पुराण के श्रवण से ब्राह्मण तेजस्वी और ज्योतिर्विद बनता है, क्षत्रिय दीर्घजीवी राजा बनता है, वैश्य कृषि और वाणिज्य में अपार लाभ पाता है तथा शूद्र आरोग्यता और लंबी आयु प्राप्त करता है।
१०. ब्रह्मवैवर्त पुराण (Brahmavaivarta Purana)फलश्रुति: कृष्ण और राधा की लीलाओं वाले इस पुराण को सुनने से ब्राह्मण हरिभक्त और विद्वान बनता है, क्षत्रिय की कीर्ति दिगंत में फैलती है, वैश्य को महालक्ष्मी का वरदान मिलता है और शूद्र को संसार के सभी सुख और अंत में मुक्ति मिलती है।
११. लिंग पुराण (Linga Purana)फलश्रुति: भगवान शिव के लिंग स्वरूप की महिमा वाले इस ग्रंथ से ब्राह्मण निष्पाप होकर रुद्रलोक जाता है, क्षत्रिय का यश बढ़ता है, वैश्य धनवान बनता है और शूद्र जन्म-मरण के चक्र से छूटकर परम पद पाता है।
१२. वराह पुराण (Varaha Purana)फलश्रुति: पृथ्वी के उद्धार की कथा वाले इस पुराण से ब्राह्मण सदाचारी और वेदमार्गी होता है, क्षत्रिय भूमिपति बनता है, वैश्य व्यापारिक लाभ से संतुष्ट रहता है और शूद्र मानसिक शांति और दीर्घायु प्राप्त करता है।
१३. स्कन्द पुराण (Skanda Purana)फलश्रुति: सबसे बड़े इस पुराण के श्रवण से ब्राह्मण को गया-काशी आदि तीर्थों का संपूर्ण पुण्य मिलता है, क्षत्रिय दिग्विजयी होता है, वैश्य कुबेर के समान समृद्ध होता है और शूद्र सब पापों से मुक्त होकर शिवभक्ति प्राप्त करता है।
१४. वामन पुराण (Vamana Purana)फलश्रुति: भगवान विष्णु के वामन अवतार की इस कथा से ब्राह्मण का कुल पवित्र होता है, क्षत्रिय को शौर्य और पराक्रम मिलता है, वैश्य को उत्तम संतान और धन मिलता है तथा शूद्र को समाज में आदरणीय स्थान और सुख मिलता है।
१५. कूर्म पुराण (Kurma Purana)फलश्रुति: भगवान के कच्छप अवतार द्वारा कहे गए इस ज्ञान से ब्राह्मण को आत्मज्ञान, क्षत्रिय को न्यायप्रियता और तेज, वैश्य को दान-पुण्य की बुद्धि और संपत्ति तथा शूद्र को धर्म की प्राप्ति और पापों का क्षय मिलता है।
१६. मत्स्य पुराण (Matsya Purana)फलश्रुति: प्रलयकालीन नौका और वेदोद्धार की इस कथा के श्रवण से ब्राह्मण परम ज्ञानी बनता है, क्षत्रिय संकटों को पार कर विजयी होता है, वैश्य का कोष कभी खाली नहीं होता और शूद्र को समस्त ऐहिक (सांसारिक) सुख मिलते हैं।
१७. गरुड़ पुराण (Garuda Purana)फलश्रुति: प्रेत कल्प और सदाचार का विवेचन करने वाले इस पुराण के श्रवण से ब्राह्मण को सद्गति और ज्ञान, क्षत्रिय को अकाल मृत्यु से सुरक्षा, वैश्य को संकटों से मुक्ति और समृद्धि तथा शूद्र को दुर्गति से मुक्ति और उत्तम पुनर्जन्म या मोक्ष मिलता है।
१८. ब्रह्मांड पुराण (Brahmanda Purana)फलश्रुति: (इसमें 'ललिता सहस्रनाम' और 'अध्यात्म रामायण' समाहित हैं)। इसके पाठ से ब्राह्मण ब्रह्मलीन होने की योग्यता पाता है, क्षत्रिय चक्रवर्ती राजा बनने का पुण्य पाता है, वैश्य अक्षय धन का स्वामी बनता है और शूद्र समस्त मानसिक और शारीरिक कष्टों से मुक्त होकर कीर्तिमान बनता है।
पंचम वेद कहे जाने वाले महाभारत में यह थी:
ब्राह्मणो वामयीं सिद्धिं क्षत्रियो भूमिपालिताम्।वैश्यो लाभमवाप्नोति शूद्रः कीर्तिमवाप्नुयात्॥
और रामायण के लिए यह थी:
पठन् द्विजो वागृषभत्वमीयात् स्यात् क्षत्रियो भूमिपतित्वमीयात्। वणिग्जनः पण्यफलत्वमीयाज्जनश्च शूद्रोऽपि महत्त्वमीयात्।।
(१.१.७९)
इस फलश्रुति में चारों वर्णों के लिए रामायण-पाठ का फल वर्णित है-
१. ब्राह्मण - वाणी में श्रेष्ठता
२. क्षत्रिय - भूमि का राज्य
३. वैश्य - वाणिज्य में लाभ
४. शूद्र - महत्त्व (महानता)
शूद्रों को यह सब पाठ-फल देना ही सिद्ध करता है कि उनसे इन ग्रंथों का पाठ अपेक्षित था।
फिर भी दुराग्रह की ज़ुबान कौन पकड़ सकता है?
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