इस आलेख में मैं कोशिश करूंगा कि जिन्हें पढ़कर हम आप बड़े हुए, हमने जिन्हें अपने तर्क, बहसों का आधार बनाया उनके मुखौटे के पीछे का वास्तविक चेहरा दिखा सकूं। ये वो लोग हैं जिनकी किताबें कॉलेज में पढ़ाई जाती हैं, पर जिनकी जिंदगी पुलिस फाइल में होनी चाहिए थी।
आज नौ लोगों पर संक्षिप्त चर्चा करते हैं, मार्क्स से शुरू करते हैं,
1. कार्ल मार्क्स : घर का पूंजीपति
लिखता है कि मालिक मजदूर को लूटता है।
किया - घर की नौकरानी हेलेन से बेटा पैदा किया, नाम तक नहीं दिया। बेटे को नौकर बना कर रखा। एंगेल्स को बोला - तू बाप बन जा। बाहर क्रांति, घर में सबसे गंदा शोषण।
2. मार्टिन हाइडेगर - दर्शन का नाजी
लिखता है कि प्रामाणिक बनो।
किया - 1933 में नाजी पार्टी जॉइन की। रेक्टर बनते ही यहूदी प्रोफेसरों को निकलवाया। छात्रों को हिटलर का नारा लगवाया। और खुद की प्रेमिका यहूदी थी जिसके आगे पीछे वह कुकुर बनकर घूमता था । मतलब कुर्सी के लिए कुछ भी बेच देगा।
3. सार्त्र और सिमोन द बोउवार - स्वतंत्रता के शिकारी
नारा - शादी गुलामी है, खुला रिश्ता आजादी है।
धंधा - बोउवार अपनी 15-17 साल की छात्राओं को फुसला कर सार्त्र के पास भेजती थी। जिस लड़की ने मना किया, उसकी इज्जत उछाली। सरकार ने इसी कारण बोउवार का लाइसेंस छीन लिया था। 1977 में दोनों ने एक चिट्ठी पर साइन किया जिसमें कहा गया - बच्चों के साथ संबंध भी जायज है। ये आजादी नहीं, गुरु का सबसे घटिया क्राइम है।
4. मिशेल फूको - सत्ता का नशेड़ी
लिखता है कि सत्ता तुम्हें हर जगह दबाती है।
किया - ट्यूनीशिया में पैसे देकर नाबालिग लड़कों के साथ संबंध। खुद लिखा - यहाँ मुझे असली आजादी मिलती है। दूसरों की सत्ता पर किताब, अपनी सत्ता का नशा।
5. मालिनोव्स्की - आदिवासी का दुश्मन
किताब - आदिवासियों को उनके बीच रहकर समझो।
डायरी - जब मरा तब डायरी छपी। उसी आदिवासियों के लिए लिखा है - "काले, बदबूदार, नफरत है इनसे"। दिन में उनके साथ खाना, रात में डायरी में गाली।
6. लुई अल्थूसर - आखिरी मर्डर
लिखता है कि आदमी कुछ नहीं, सिस्टम सब कुछ है।
किया - 1980 में अपनी ही बीवी हेलेन का गला दबा कर मार दिया। वही बीवी जिसने 30 साल उसके पागलपन को झेला था। कोर्ट ने कहा पागल है, छोड़ दो। सिस्टम के नाम पर इंसान को खत्म करने वाला आखिर में सच में इंसान को खत्म कर गया।
7. कामू, रसेल, वेबर - तीन तरह के पाखंडी
कामू - लिखता था नैतिक बनो, पत्नी अस्पताल में सड़ रही थी और वो पेरिस में आशिकी कर रहा था।
रसेल - लिखता था शादी जेल है, 4 शादियां की, दर्जनों अफेयर, बेटा पागल हो गया, बेटी बर्बाद।
वेबर - इतना नैतिक बना कि खुद नपुंसक हो गया, प्रेमिका थी पर छूने से डरता था कि पाप लग जाएगा।
इन्हें पढ़ने के बाद आप सोचिए किन लोगों को पढ़ रहे थे। यूनिवर्सिटी में मार्क्स की तस्वीर लगी है, घर दफ्तर में मार्क्स की तस्वीर लगी है। इसका अर्थ है कि हर जगह सुविधानुसार औरतों का भोग करो और बच्चा पैदा हो जाए तो खलनायक रंजीत जैसे बोल दो, इतनी लड़कियां आती हैं किस किस बच्चे का बाप बनूँगा।
नारा होना था कि मार्क्स जात धोखा है।
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