पुराणों के अनुसार परीक्षित जन्म के १५०० वर्ष बाद नन्द का अभिषेक हुआ था। उसके बाद मौर्य साम्राज्य का तीसरा राजा अशोक का काल १४७२-१४३६ ईपू था। प्रायः उसी काल में कश्मीर में गोनन्द वंश का राजा अशोक हुआ था (१४४०-१४०० ईपू)-राजतरंगिणी (१/१०१-१६१)। कश्मीर का अशोक बौद्ध हुआ था जिसके कारण वहां के बौद्धों ने मध्य एशिया को बौद्धों को बुलाकर कश्मीर पर आक्रमण करवाया। ऐसा ही वर्तमान काल में भी चल रहा है-बौद्ध के बदले मुस्लिम बाहर से आक्रमण कराते हैं। मौर्य अशोक कभी बौद्ध नहीं हुआ था। अन्तिम मौर्य राजा बृहद्रथ का सेनाध्यक्ष पुष्यमित्र शुंग ब्राह्मण था जिसे बौद्ध अपना विरोधी कहते हैं। बौद्ध ग्रन्थों में २८ बुद्धों की चर्चा है जिनमें ३ बुद्ध ओड़िशा में थे। अशोक के निगलिहवा शिलालेख में अन्य ४ बुद्धों का नाम है। फाहियान ने ५ बुद्धों का काल तथा स्थान लिखा है। इतिहास में ३ बुद्ध प्रसिद्ध हैं। शुद्धोदन के पुत्र सिद्धार्थ का जन्म ३०-३-१८८७ ई. वैशाख पूर्णिमा को लुम्बिनी में हुआ। वह ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध हुए, बीच में कभी गौतम नहीं हुए थे। गौतम बुद्ध कौशाम्बी में ५६३ ईपू में हुए थे। उन्होंने बौद्ध धर्म का पूरे भारत में प्रचार किया। सिद्धार्थ का काम सारनाथ तथा राजगीर के बीच था तथा बिम्बिसार-अजातशत्रु के सहयोगी थे। विष्णु अवतार बुद्ध मगध में अजिन ब्राह्मण के पुत्र थे, जिनका मूल नाम बुद्ध था। उन्होंने ७५६ ईपू में पश्चिम एशिया के असुरों के दमन के लिए मालव गण की स्थापना की थी, जिसका उल्लेख असीरिया तथा ग्रीक इतिहास में भी है।
No comments:
Post a Comment