🏵️ बहुत से लोग पूछते हैं कि क्षेत्रपाल कौन हैं ?
🎷1. ये स्वरूप किसका है ?
🙏शास्त्रों के अनुसार क्षेत्रपाल साक्षात् भगवान शिव के अंश , कालभैरव का ही स्वरूप हैं ।
🫵 लिंगपुराण में इन्हें "क्षेत्रपाल भैरव" कहा गया है । लोक भाषा में इन्हें ही खेतल,खेतपाल , भैरू बाबा, खंडोबा कहा जाता है।
🫵 शिवपुराण के अनुसार राक्षसों से पृथ्वी की रक्षा के लिए भगवान शिव ने ही क्षेत्रपालों को प्रकट किया ।
🎷2. कितने माने गए हैं ?
🙏मुख्य रूप से 8 क्षेत्रपाल माने गए हैं - जो 8 दिशाओं के रक्षक होते हैं, और ये 8 भैरव
🔥1. असितांग भैरव 🔥2. रुद्र भैरव
🔥3. चन्द्र भैरव
🔥4. क्रोध भैरव
🔥5. उन्मत्त भैरव
🔥6. कपाल भैरव
🔥7. भीषण भैरव
🔥8. संहार भैरव
🎷आगम शास्त्रों में इनका विस्तार 52 भैरव, 64 क्षेत्रपाल और 96 तक बताये गये है । 💐 जैन परम्परा में 96 क्षेत्रपाल का वर्णन है । हर गाँव, नगर, तीर्थ और श्मशान का अलग अलग क्षेत्रपाल होता है ।
💢3. कार्य क्या है ?
शब्द ही अर्थ है "क्षेत्रं पालयति इति क्षेत्रपाल:" जो क्षेत्र की रक्षा करे वो क्षेत्रपाल ।
💥शास्त्रों में 3 मुख्य कार्य बताए गए हैं 💥
💐 सुरक्षा करना ...
गाँव, खेत, मंदिर की सीमा और मर्यादा की रक्षा। इसीलिए इनका मंदिर गाँव के बाहर या शिव मंदिर के ईशान कोण में बनाया जाता है ।
💐न्याय करना ...
ये न्याय के देवता हैं । अच्छे को पुरस्कार और बुरे को दण्ड देते हैं।
💐विघ्न हटाना ...
वास्तु पूजा में क्षेत्रपाल की पूजा इसलिए अनिवार्य है कि बिना इनकी आज्ञा के उस भूमि पर कोई भी देवता पूजा स्वीकार नहीं करते । नया घर, खेत लेने पर पहले क्षेत्रपाल को रोट, भोग लगाया जाता है ।
🫵 इसलिए कहा भी गया है ...
जिस क्षेत्र में रहो, उस क्षेत्र के क्षेत्रपाल को प्रणाम ( पूजा ) करके रहो तो कोई संकट नहीं आता है ।
🙏जय श्री क्षेत्रपाल भैरव नाथ🙏
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