Monday, 12 October 2026

सवर्ण ब्राह्मण

अभी मेरे पास कंफर्म स्रौत नही है मगर सुनने में आ रहा है कि बम्बई में देवेन्द्र फडणवीस सरकार मराठों को आरक्षण देने जा रही हैं। यदी ये सही है तो बम्बई में भी 73 फीसदी ओबीसी आरक्षण विस्तार के बाद आरक्षण हो जाएगा।

मध्य प्रदेश में 100 करोड़ भारतीय रूपये केवल 73 प्रतिशत आरक्षण को माननीय उच्च न्यायालय में डिफेंड करने के लिए बहा दिया गया है। ये पैसा मोहन यादव या गरीब माँ के बेटे नरेद्र मोदी अपने घर से लाये थे ?

पटना में आरक्षण 65 प्रतिशत करने के कारण कोर्ट में लताड़े गये थे। अभी मध्य प्रदेश में 73 प्रतिशत आरक्षण देने के कारण कोर्ट में लताड़े गये हैं। अब बम्बई में भी लताड़े ही जायेंगे।

मित्रो पहला ऐतिहासिक दृष्टि से पक्ष ये है कि बम्बई में 13 में से 10 मुख्यमंत्री इधर मराठे ही हुए हैं। मनोहर जोशी , देवेन्द्र फडणवीस ब्राह्मण हैं और उद्धव ठाकरे कायस्थ थे। आईएएस में ब्राह्मणो और कायस्थों के बाद तीसरी सबसे अधिक प्रतिनिधित्व मराठो का ही है । 

दूसरा ऐतिहासिक पक्ष बहुत मजबूर और बेबस होकर बता रहा हूँ क्युकी भाजपा और कांग्रेस दोनो (आगे आप समझ गई होंगे ) हैं।
भारत मे पहली यूनिवर्सिटी कलकत्ता में 1910 में बनी थी। पहली महिला डॉक्टर कोई शायद तिवारी थी। इंजीनियर भी पहला ब्राह्मण था। हाँ मगर पूरी जिम्मेदारी से बता रहा हूँ कि केवळ डॉक्टर इंजीनियर ही नही यूनिवर्सिटी से नही निकले थे, आगे नेता, पत्रकार और क्रांतिकारी भी निकले थे इसलिए भद्रलोक बोला जाता है।

यही कारण है कि गरम दल के फेश पंडित बाल गंगाधर तिलक, नरम दल के गोपाल कृष्ण गोखले, संघ के संथापक डॉ हेडगेवार या जनसंघ/बीजेपी के फाउंडर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी या 24 कैरट सुद्ध दक्षिणपंथी हिन्दू महासभा के वीर सावरकर आदी सभी ब्राह्मण थे। एक भी आपको गैर ब्राह्मण नही मिलेगा। इवन समाजवाद और साम्यवाद में भी यही हाल था। 

सही बात है कि पंडित नेहरू ही केवल भारत नही है मगर 14 साल से 16 साल के जो अमर शहीद क्रांतिकारी फाँसी पर चढ़े थे चाहे घोष हो या कोई और, ब्राह्मण और कायस्थ छोड़के तीसरी जाति के लिए आपको चैट GPT और गूगल जैमिनी का सहारा जरूर लेना पड़ेगा। 

भारत के पहले अमर शहीद क्रांतिकारी चाफेकर बंधु हैं या मंगल पांडेय हैं, इसमें इतिहासकारो में मतभेद हैं मगर मेरी बात इरफान हबीब और रोमिला थापर जैसे वामपंथी इतिहासकार भी नही काट पाएंगे कि वो ब्राह्मण ही थे। 

शायद इसी बात के लिये हमें सरकार दंड दे रही है क्युकी जब बाकी बिलों में छुपे हुए थे तो यहाँ युवा फाँसी पर चढ़कर देश को जगाने का कार्य कर रहे थे।

अब एकदम खुल्लम खुल्ला हो रहा है। कोई शोषित वंचित का एंगल भी नही दिया जा सकता है। अब सँख्याबल की ब्लैकमेलिंग शुरू हो चुका है और ये बस यही तक नही रुकेगा। 

हम तुर्को से भी लड़े थे, अंग्रेजो से भी लड़े थे और अब इन काले अंग्रेजो से भी लड़कर जीतेंगे। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट दोनो मीडिया पूरी तरीके से मैनेज हैं। जैसे ही कंफर्म होगा मैं अपडेट करूँगा, जैसे UGC और मध्य प्रदेश पर किया था। ये भी कयास है मगर जहाँ चिंगारी होती हैं, वही आग भी लगता है, एक कहावत तो आपने सुनी भी होगी।

जय भवानी जय शिवाजी महाराज।

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