गुरु शंकराचार्य जी के कुल देवता भगवान् कृष्ण हैं गुरु शंकराचार्य जी ने चांडाल को भी दंडवत किया है।सभी स्थान का अलग अलग महत्व होता,जब व्यक्ति मणिकर्णिका घाट काशी जाता है वहां के डोम राजा को ही प्रणाम करना पड़ता है और जब व्यक्ति मंदिर जाता है तब वहां के अर्चक को ,उस समय उस व्यक्ति का ही महत्व होता है।राजदरबार में जाने पर एक ब्राह्मण भी राजा को विष्णु स्वरूप मानकर प्रणाम करता है।व्यक्ति,स्थान और समय का महत्व होता।
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