Saturday, 20 December 2025

शूद्र सूत पुत्र

, एकलव्य वैसे तो दलित नहीं था। क्षत्रिय पुत्र था, जरासंध के सेनापति का पुत्र था। जरासंध को तो आप जानते ही होंगे कि वह कौन था। और किसके पक्ष में था। 

 शंबूक का वर्णन मैंने न वाल्मीकि रामायण मे पढ़ा न तुलसी दास के रामचरित मानस में।

 कर्ण शूद्र नहीं था, सूतपुत्र था। और सूत महाभारत के शांति पर्व, जिसका संदर्भ डॉ #अम्बेडकर ने अपनी पुस्तक, "शूद्र कौन थे", में देते हुए लिखा है कि सूत राजा के मंत्रिमंडल का अंग थे, यह अनिवार्य शर्त थी, राजा के कैबिनेट की।

 भगवान कृष्ण ने अर्जुन के रथ का संचालन किया तो वह सूत कर्म था। कर्ण के रथ का संचालन पांडवों के मामा साल्व ने किया था। वह भी सूतकर्म था। 

 चौथी बात रैदास के गुरु ब्राम्हण थे, ( गूगल कर लीजिए) और उनकी शिष्या मीरा राजमहिषी क्षत्राणी थी।

 समयकाल के बारे में मैन पूंछा था कि कितने सदियों से? राम दस हजार वर्ष पूर्व हुए। कृष्ण, एकलव्य और कर्ण पांच हजार वर्ष पूर्व हुए। रैदास चार सौ वर्ष पूर्व हुए। दस हजार वर्षों में मात्र चार पात्रों का नाम आप उल्लिखित कर पाए, और उसमें से सारे पात्रों के बारे में आपको ठीक से पता भी नहीं है?

 

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