सन् १९४९ में याज्ञिक सम्राट् पण्डित श्वेणी राम शर्मा गौड़ जी उत्तराखण्ड की यात्रा में आए थे। वे ज्योतिर्मठ में ठहरे थे।। उस समय में तत्कालीन शंकराचार्य अनन्त श्री विभूषित श्रीमद्ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामीश्री ब्रह्मानन्द सरस्वती जी महाराज भी उपस्थित थे। वे रात्रि में उनके दर्शनार्थ गये थे।। कुशल मंगल के अनन्तर उन्होंने श्री गौड जी से कहा :~ "आप प्रतिष्ठित बनारस (काशी विश्वनाथ जी) के वेदज्ञ ब्राह्मण परिवार के वेदज्ञ विद्वान् हो।अतः हम तुमको आशीर्वाद रूप में अत्यन्त प्राचीन हस्तलिखित :~ 🌹"हनुमन् मंत्र चमत्कारानुष्ठान पद्धति "🌹
नाम की लघु पुस्तिका दे रहे हैं।। इसे स्वीकार करो। उन्होंने सहर्ष पुस्तिका प्राप्त की।। जगद् गुरु शंकराचार्य ब्रह्मानंद सरस्वती जी ने कहा हमने जो पुस्तिका तुमको दी है। यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सिद्धप्रद है।। इसमें बीस मंत्र हैं। प्रत्येक मंत्र का ग्यारह~ ग्यारह हज़ार बार रुद्राक्ष की माला पर श्री हनुमान जी के किसी भी प्राचीन मन्दिर में ब्रह्मचर्य पूर्वक जप करने से सभी मंत्र सिद्ध हो जाते हैं।। मंत्रों को सिद्ध कर लेने के पश्चात् मन्त्रों का प्रयोग करने पर कठिन से कठिन कार्य सुसाध्य हो जाते हैं।"
🌹" हनुमन् मन्त्र चमत्कारानुष्ठान पद्धति "🌹
इसका अनुष्ठान करने वाला साधक को चाहिये।कि वह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर प्रत्येक मंत्र की ग्यारह ~ग्यारह हज़ार बार आवृत्ति करके मंत्र को सिद्ध कर ले । पश्चात् आवश्यकता पड़ने पर स्वयं अथवा दूसरे द्वारा अनुष्ठान कर या करवा सकता है।। जप के अनन्तर ११०० मंत्रों से आहुति दें।
सर्व कल्याणार्थ यह पद्धति प्रकाशित की जा रही है।।
ब्रह्मचारी रह कर अनुष्ठान कर्त्ता जिस कार्य के लिये जप तथा हवन करें । संकल्प में उसका नामोल्लेख अवश्य करें।।
।। मन्त्र।।
१)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय वायु सुताय अञ्जनी गर्भ संभूताय अखण्ड ब्रह्मचर्य व्रत पालन तत्पराय धवली कृत जगत् त्रितयाय ज्वलदग्नि सूर्य कोटि संप्रभाय प्रकट पराक्रमाय आक्रान्तदिङ् मण्डलाय यशो वितानाय यशोऽलंकृताय शोभिताननाय महासामर्थ्याय महातेजः पुञ्ज विराजमानाय श्री राम भक्ति तत्पराय श्री राम लक्ष्मणानन्द कारणाय कपि सैन्य प्राकाराय सुग्रीव सख्यकारणाय सुग्रीव साहाय्य कारणाय ब्रह्मास्त्र ब्रह्म शक्ति असनाय लक्ष्मण शक्ति भेद निवारणाय शल्य विशल्यौषधि समानयनाय वनरक्षाकर समूह विभञ्जनाय द्रोण पर्वतोत्पाटनाय स्वामि वचन सम्पादितार्जुन संयुग संग्रामाय गम्भीर शब्दोदयाय दक्षिणाशा मार्तण्डाय मेरु पर्वतपीठिकार्चनाय दावानल कालाग्नि रुद्राय, समुद्रलंघनाय सीताश्वासनाय सीतारक्षकाय राक्षसी संघ विदारणाय अशोक वन विदारणाय लङ्कापुरी दहनाय दशग्रीव शिरकृन्तकाय कुम्भकरणादिवध कारणाय वालि निवर्हण कारणाय मेघनाद होम विध्वंसनाय इन्द्रजिद् वध कारणाय सर्वशास्त्र पारंगताय सर्व ग्रह विनाशकाय सर्व ज्वर हराय सर्वभय निवारणाय सर्व कष्ट निवारणाय सर्वापत्ति निवारणाय सर्व दुष्टादि निवर्हणाय सर्व शत्रुच्छेदनाय भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी ध्वंसकाय सर्व कार्य साधकाय प्राणिमात्र रक्षकाय रामदूताय स्वाहा।
२)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्व रूपाय अमित विक्रमाय प्रकट पराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटि सम प्रभाय रामदूताय स्वाहा ।
३)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय राम सेवकाय राम भक्ति तत्पराय रामहृदयाय लक्ष्मण शक्ति भेदन निवारणाय लक्ष्मण रक्षकाय, दुष्ट निबर्हणाय रामदूताय स्वाहा। नगर निक
४)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्व शत्रु संहरणाय सर्व रोग हराय सर्व वशी करणाय राम दूताय स्वाहा।
५)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय आध्यात्मिकाधिदैविकाधिभौतिक ताप त्रय निवारणाय राम दूताय स्वाहा।
६)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय देवदानवर्षि मुनि वरदाय रामदूताय स्वाहा ।
७)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय भक्त जन मनः कल्पना कल्पद्रुमाय, दुष्ट मनोरथ स्तम्भनाय प्रभञ्जन प्राण प्रियाय महाबल परिक्रमाय महाविपत्ति निवारणाय पुत्र पौत्र धनधान्यादि विविध सम्पत् प्रदाय रामदूताय स्वाहा ।
८)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय बज्रदेहाय वज्रनखाय बज्र मुखाय बज्ररोम्णे कान वज्र नेत्राय वज्र दन्ताय वज्र कराय वज्र भक्ताय राम दूताय स्वाहा।
९)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय परयन्त्र मन्त्र तन्त्र त्राटक नाशकाय सर्व ज्वरच्छेदकाय सर्वव्याधि निकृन्तकाय सर्वभय प्रशमनाय सर्वदुष्ट मुख स्तम्भनाय सर्व कार्य सिद्धि प्रदाय राम दूताय स्वाहा ।
१०)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय देव दानव यक्ष राक्षस भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी दुष्ट ग्रह बन्धनाय राम दूताय स्वाहा।
११) ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय पंच वदनाय पूर्व मुखे सकल शत्रु संहारकाय राम दूताय स्वाहा ।
१२)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय पंच वदनाय दक्षिण मुखे कराल वदनाय नारसिंहाय सकल भूत प्रेत दमनाय रामदूताय स्वाहा।
१३)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय पंच वदनाय पश्चिम मुखे गरुडाय सकल विघ्न निवारणाय राम दूताय स्वाहा।
१४)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय पंच वदनाय उत्तर मुखे आदि वराहाय निट मिसकल सम्पत् कराय रामदूताय स्वाहा।
१५) ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय पूर्व मुखे हयग्रीवाय सकल जन वशीकरण रामदूताय स्वाहा।
१६)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वग्रहान् भूत भविष्यद् वर्तमानान् समीपस्थान् सर्वकाल दुष्टबुद्धीनुच्चाटयोच्चाटय परवलान् क्षोभय-क्षोभय मम सर्व कार्याणि साधय साधय स्वाहा।
१७) ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय परकृत यन्त्र मन्त्र पराहंकार भूत प्रेत पिशाच परदृष्टि परविघ्न तर्जन चेटक विद्या सर्वग्रहभयम् निवारय निवारय स्वाहा।
१८) ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय डाकिनी शाकिनी ब्रह्मराक्षस कुल पिशाचोरुभयं निवारय निवारय स्वाहा।
१९)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय भूत ज्वर प्रेत ज्वर चातुर्थिक ज्वर विष्णु ज्वर महेशज्वरं निवारय निवारय स्वाहा ।
२०)ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय अक्षि शूल, पक्ष शूल शिरोभयं करशूल पित्त शूल ब्रह्म राक्षस शूल पिशाच कुलच्छेदनम् निवारय निवारय स्वाहा।
ॐ अंजनीसुताय च विद्यमहे,वायुपुत्राय च धीमहि तन्नो हनुमंत प्रचोदयात।।
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