Sunday, 2 August 2026

भारत के निकटवर्त्ती द्वीप- वायु पुराण,

भारत के निकटवर्त्ती द्वीप-(१) वायु पुराण, अध्याय ३८ के अनुसार-(१) भारत वर्ष के दक्षिण १०,००० योजन का महासागर है जिसमें ३००० योजन विस्तार का ३ भागों में विभक्त एक द्वीप है जिसमें विद्युत्वान् नामक महाशैल है। असभ्य नील वर्ण मनुष्य। हजारों नदिया, वापी। (मलगासी?)
(२) अंग द्वीप (या अग्नि द्वीप, अग्नि = दक्षिण पूर्व दिशा में)-सुवर्ण, विद्रुम आदि की खान। चक्रगिरि में कई निर्झर और कन्दरा हैं। यह नागदेश के मध्य में है। (आस्ट्रेलिया, अग्नि कोण में, स्वर्ण खान, पूर्वी तट पर अर्ध चक्राकार पर्वत)
(३) यम द्वीप-धातु मण्डित द्युतिमान् पर्वत। यम का अर्थ युग्म है, यम दक्षिण दिशा का स्वामी है। अण्टार्कटिका में भी २ भूखण्ड हैं तथा यह सबसे दक्षीण में यम द्वीप है। इसके निकट का बड़ा द्वीप न्यूजीलैण्ड भी २ द्वीप का है। यह यम द्वीप के निकट होने से यमकोटि द्वीप है तथा इसके तट पर यमकोटिपत्तन उज्जैन से ९० अंश पूर्व कहा गया है। 
(४) मलय द्वीप-स्वर्ण और बहुमूल्य रत्न, चन्दन, रजत खान। महामलय तथा मन्दार पर्वतों पर अगस्त्य आश्रम। त्रिकूट पर्वत पर सोने-चान्दी की खान। पश्चिमी तट के गोकर्ण में शंकर मन्दिर। यह भारत के केरल जैसा है, उसके भी उत्तर में गोकर्ण है। मलय द्वीप मलाया है जहां आज भी चान्दी की खान हैं।
(५) शङ्ख द्वीप-१०० योजन का, शंखगिरि पर्वत तथा शंखनाग नदी। शंख को अरबी में जञ्ज कहते हैं, यह जंजीबार द्वीप है (अफ्रीका के पूर्व तट पर)।
(६) कुश या कुमुद द्वीप-अफ्रीका को कुश महाद्वीप कहा गया है। यह अन्य द्वीप है। कुमुद पर्वत थाईलैण्ड का दक्षिणी भाग है, जो गदा के आकार का है (कौमोदकी गदा-विष्णु की)। यहां का मुख्य पशु भू कोमोडो है।
(७) वराह द्वीप, असभ्य लोग, कई नगर, पर्वत, वन। वराह पर्वत, वराही नदी। विष्णु की वराह रूप में पूजा। 
भागवत पुराण (५/१९) के अनुसार जम्बू द्वीप के ८ उपद्वीप-
(१) आवर्तन (ब्रिटेन)-अरबी में बर्तानिया।
(२) नारमणक-नार्वे-स्वीडेन। इनके स्थानीय नाम नोर्गे-स्वर्गे हैं। शीत स्थान में समतल भूमि स्वर्ग तथा उच्च पर्वतीय भूमि नार्वे नर्क है।
(३) पाञ्चजन्य-पूर्व भाग में ५ द्वीपों का जापान-सखालिन (अभी रूस के अधिकार में), होनशू, होकैडो, शिकोक्यू, क्यूशू।
(४) चन्द्र शुक्ल = फिलिपाइन।
(५) स्वर्ण प्रस्थ-बोर्निओ, जावा (यव आकार का), सुमात्रा (इन्द्र = सुत्रामा के नाम पर, वर्ण-विपर्यय), सिंगापुर, पेनांग, निकोबार, अण्डमान।
(७) सिंहल-वर्तमान श्रीलंका। लंका-लक्कादीव (लंकाद्वीप) से मालदीव (रामायण के अनुसार लंका के दक्षिणी भाग में माली द्वीप)। ३० योजन चौड़ा तथा १०० योजन लम्बा (रामायण, सुन्दरकाण्ड, १/११५, २०३, २/३-४, उत्तरकाण्ड ५/५,६,१९, २१-२९, ४५, ६/७, १५, ८/२३-२४)।
भारत के भाग-केन्द्रीय भाग कुमारिका खण्ड है। इसके दक्षिण का समुद्र भी कुमारिका खण्ड है। आज भी इसे भारत महासागर ही कहते हैं। अन्य ८ खण्ड हैं (मधुसूदन ओझा-इन्द्रविजय, अध्याय २-३)-
(१) इन्द्रद्वीप-इन्द्रमन = अण्डमान।
(२) नागद्वीप = निकोबार।
(३) सौम्य द्वीप-सोमत्रा या सुमात्रा, यवद्वीप, बालिद्वीप (जावा, बाली)।
(४) गान्धर्व-फिलीपीन-लुम्बक, सुम्बाफ्लोरिन।
(५) वारुण-बोर्निओ (ब्रूनी)।
(६) कशेरुमान-कसेरू (सेलेबिस)
(७) गभस्तिमान मलक्का।
(८) ताम्रपर्ण-ताम्रपर्णी-टापूरोवेन (श्रीलंका)
इन्द्रविजय पुस्तक के अनुसार भारत के पश्चिमी खण्ड-
(१) गान्धार-अफगानिस्तान का पूर्व भाग गान्धार या कन्दहार, पश्चिमी भाग मद्र, जिसके उत्तर और दक्षिण भाग थे।
(२) राजा सगर ने भारत के पश्चिमी भाग की ५ जातियों को निष्कासित किया था-पारद, पह्लव, कम्बोज, शक, यवन। यवन पारद जातियों ने कालकेय (काल्डिया, काकेसस) असुरों की रीति अपना ली। धनुष धारी को अरबी में पारद कहते हैं; इससे अंग्रेजी में पार्थिअन हो गया।
(३) पह्लव-इसी प्रकार का पल्लव वंश तमिलनाडु में शासन करता था। पल्लव का अर्थ पत्ता या फूल की पंखुड़ी है, जिसमें रेशे दीखते हैं। परिश्रम करने पर मांस पेशियों में भी रेशे दीखते हैं। अतः मल्ल को पल्लव = पहलवान् कहते हैं। इसे ऐतरेय ब्राह्मण (३२/१) में पुष्पित कहा गया है। बाद में पल्लवों को सासनी, पार्थव भी कहा गया। मार्कण्डेय पुरान, अध्याय ५४ के अनुसार कश्मीर के लोगों जैसी ये जातियां हैं-बाह्लीक, वाटधान, पह्लव, चर्मखण्डिक, गान्धार, पारद, हारभूषिक, काम्बोज, दरद।
(४) कम्बोज का मूल है काम-भोज, अर्थात् स्वेच्छाचारी। यह पश्चिम में था और थाइलैण्ड के दक्षिण के कम्बुज (कम्बोडिया) से भिन्न है।
(५) शक जाति जरथ-उष्ट्र (बूढ़ा ऊंट) या जोरोस्टर के अनुयायी थे। भविष्य पुराण (१३९/४३-४५, अध्याय १४) के अनुसार ये अफगानिस्तान के पश्चिम थे। शक द्वीप अलग है।
(६) यवन भारत की पश्चिमी सीमा पर थे। सगर द्वारा खदेड़े जाने पर ये ग्रीस चले गये जिससे उस देश का नाम यूनान हुआ।
(७) हेलि या हैलेय असुर ग्रीस में रहते थे} इनके विशाल शरीर के कारण इनको गिरिकाय कहते थे, जिससे ग्रीक नाम हुआ।
दुहरे नाम-विष्णु पुराण (२/३) के अनुसार शिक्षा और सभ्यता में भारत को प्रमाण मानते थे अतः इसके नामों का अनुकरण निकटवर्त्ती भागों में होता है-
(१) मलय -केरल में मलयगिरि तथा मलयालम भाषा है। केरल की राजधानी का समुद्र तट पर कोवलम है, मलयेसिया की राजधानी भी कुवालालम्-पुर है।
(२) उत्तर किष्किन्धा में बाली का प्रभुत्व था। इनके ओड़िशा में कई स्थान है-बालिकुदा, बालिगुड़ा, बालिमेला आदि। इसके जैसा इण्डोनेसिया में बाली द्वीप है।
(३) अंग-भारत में पश्चिम बंगाल है। आस्ट्रेलिया को भी अंग कहते थे।
(४) कन्या कुमारी-पूर्व अफ्रीका में केन्या है। इसका अनुवाद बाइबिल में वर्जिन मदर है।
(५) मुम्बई-पूर्व अफ्रीका में मोम्बासा।
(६) मालदीव-पश्चिम अफ्रीका में माली।
(७) बंग-बंगलादेश। बोर्निओ में कालीबंगन, कालीमन्तन।
(८) चम्पा-भागलपुर, चम्पारण। कम्बोडिया। 
(९) सुह्म-मिदनापुर, स्याम (थाईलैण्ड)।
इस प्रकार भारत की मुख्य भूमि तथाउसके अन्य ८ खण्डों के स्थान नाम समान हैं- 
(१) इन्द्रद्वीप (क) इरावती के पूर्व बर्मा का महेन्द्र पर्वत, लाओस जहां का हाथी ऐरावत श्वेत था। (ख) पश्चिम सीमा पर जहां पाक दैयों क दमन किया वहां इन्द्र का नाम पाकशासन हुआ। जहां इस प्रकार शक्ति प्रदर्शित की वह स्थान शक्र (सक्खर जिला, हक्कर नदी) हुआ (पाकिस्तान में)। वहां आक्रमण के लिये जहां छावनी बनाई वह इन्द्रप्रस्थ हुआ, जो नागों के अधिकार में खाण्डव-प्रस्थ तथा अर्जुन द्वारा कब्जा करने के बाद पुनः इन्द्रप्रस्थ हुआ।
(२) कशेरुमान-इण्डोनेसिया का दक्षिण पूर्व, वियतनाम (आन्ध्र तट पर अनाम), मेकांग (मा गंगा) तथा गोदावरी डेल्टा।
(३) गभस्तिमान-कशेरु के दक्षिण, मलक्का समुद्र। गोदावरी से महानदी के बीच ऋक्ष और मलय पर्वत।
(४) ताम्रपर्णी-तमिलनाडु का समुद्र तट, श्रीलंका का दक्षिण भाग।
(५) नागद्वीप-तमिलनाडु और श्रीलंका में नागपत्तनम्, अण्डमान-निकोबार।
(६) सौम्य (उत्तर में तिब्बत-ब्रह्मपुत्र, गंगा और सिन्धु के स्रोत ब्रह्म, शिव तथा विष्णु विटप हैं। सुमात्रा भी सौम्य है।
(७) वरुण-पूर्व में बोर्निओ। पश्चिम में अरब देश, जहां की ५ जातियां पञ्चजन थीं, इनको भगवान् कृष्ण ने पराजित कर अपहृत लोगों को छुड़ाया था।

No comments:

Post a Comment