Sunday, 9 August 2026

सरस्वती पुराण ब्रह्मा ने सरस्वती

अक्सर मुस्लिम और वामपंथी दुष्प्रचार करते हैं कि ब्रह्मा ने सरस्वती से शादी किया था लेकिन जब आप उनसे पूछोगे यह किस किताब में लिखा है तब वह कहेंगे #सरस्वती पुराण में लिखा है। 

उसके बाद जब आप उनके सामने 18 पुराणों के नाम बता देंगे और फिर आप पूछेंगे इन 18 पुराणों में कोई सरस्वती पुराण तो है ही नही, तो वह गूगल पर सर्च करेगा और कहेगा #डीएनझा की किताब में लिखा है। 

यह डीएन झा, रोमिला थापर, इरफान हबीब यह भारत के सभी इतिहासकार एक ऐसी संस्था की उपज है, जो संस्था मार्कसिस्ट हिस्टोग्राफी कहलाती है।

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के अधिवेशन में वामपंथी नेताओं ने एक प्लानिंग बनाया कि भारत जैसे देश पर वामपंथ का शासन कैसे हो सकता है क्योंकि भारत के युवा वामपंथियों के जाल में इतनी आसानी से नहीं फंसने वाले है।

तब एक क्यूबा का वामपंथी जिसका नाम में भूल रहा हूं उसने कहा था कि हमें 10 साल या 20 साल की प्लानिंग नहीं करनी होगी, हमें सबसे पहले जिस भी देश पर कब्जा करना है उस देश के इतिहास को विकृत करना पड़ेगा, उस देश के शिक्षा संस्थानों में घुसना पड़ेगा । फिर उन शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों में हम उनकी मूल संस्कृति मूल धर्म के प्रति ऐसा जहर बोयेंगे कि वह धीरे-धीरे वामपंथी विचारधारा का हो जाएगा । इसके लिए हमें कम से कम 50 से 80 साल की प्लानिंग लेकर चलनी होगी। 

 जब भारत को आजादी मिली तब वामपंथी दलों ने नेहरू से एक समझौता किया । समझौता ये कि आप देश चलाइए हम आपको देश चलाने में कोई डिस्टर्ब नहीं करेंगे और हमें आप देश के कुछ शिक्षा संस्थान दे दीजिए, इतिहास लिखने का काम दे दीजिए और हमारी पसंद का शिक्षा मंत्री नियुक्त करते रहिए। 

और आप जानते हैं कि देश की आजादी के बाद भारत का जो पहला शिक्षा मंत्री बना उसके पास कोई डिग्री नहीं थी बल्कि उसके पास मुफ्ती की डिग्री थी, वह मक्का में पैदा हुआ था और 30 साल से मक्का की मस्जिद में तकरीरें देता था। ऐसे व्यक्ति यानी मौलाना अबुल कलाम आजाद को देश का पहला शिक्षा मंत्री बनाया गया जो कट्टरपंथी हनफी की विचारधारा का मुस्लिम था और सऊदी अरब का आधिकारिक नागरिक था। 

उसके बाद वामपंथियों ने भारतीय इतिहास प्रतिष्ठान से लेकर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी तमाम जगहों पर कब्जा किया। अपने विचारधारा के इतिहासकारों से किताब लिखवाई और यह सारी किताब झूठ का पुलिंदा साबित हुई।

नेहरू के बाद इंदिरा गांधी ने भी इस परंपरा को जारी किया इंदिरा गांधी ने भी वामपंथियों को खुली छूट दे दिया कि वह इतिहास को विकृत करते रहें, अपने मनपसंद शिक्षा संस्थानों में जो चाहे वह करते रहें बस उन्हें सत्ता में कभी डिस्टर्ब ना करें। इसीलिए वामपंथियों ने इंदिरा गांधी के खिलाफ कभी कोई आवाज नहीं उठाई बल्कि इन वामपंथियों ने आपातकाल का समर्थन किया था। आपको जानना चाहिए कि एक भी वामपंथी नेता आपातकाल के समय जेल नहीं गया था।

मार्क्सवादी इतिहास इतिहासकार में से सबसे बड़े इतिहासकार प्रोफेसर डीएन झा की गवाही राम मंदिर केस में हुई थी उन्होंने बयान दिया था राम कभी हुए ही नहीं थे मुस्लिम पक्ष ने प्रोफेसर डीएन झा को अपनी ओर से अदालत में पेश किया था।

डीएन झा ने अदालत में कहा कि उन्होंने जो शोध किया है उसके अनुसार भगवान राम अयोध्या में कभी थे ही नहीं, भगवान राम एक काल्पनिक हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके ही शोध के आधार पर केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रामसेतु तोड़ने का आदेश दिया था और सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया था कि भगवान राम काल्पनिक है वह मेरी ही शोध थी। 

हिंदू पक्ष के वकील ने डीएन झा का एक सेमिनार में दिया गया वीडियो चलाया जिसमें वह भगवान राम को शराबी और मांसाहारी बता रहे थे। उसके बाद जज ने उनसे सवाल किया कि आप एक व्यक्ति को काल्पनिक बताते हैं फिर दूसरे सेमिनार में उसी व्यक्ति को शराबी और मांसाहारी बताते हैं, ऐसा कैसे हो सकता है कि जो व्यक्ति काल्पनिक है तो आपने यह कैसे शोध कर लिया कि वह शराबी और मांसाहारी भी है? उसके बाद डीएन झा की बोलती बंद हो गई और उनकी गवाही को और उनके रिसर्च को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

अभी रक्षाबंधन के दिन तमाम अखबारों में प्रोफेसर इरफान हबीब ने जो इसी मार्कशिष्ट हिस्ट्रोग्राफी के जुड़े हुए हैं, उन्होंने एक लेख लिखा कि रक्षाबंधन के दिन अकबर से लेकर जहांगीर के दरबार में लाखों महिलाएं आती थी और मुगल बादशाह सबसे राखी बधवाते थे।

 जबकि सच्चाई यह है कि अकबर ने अपनी सगी फुफेरी बहन जो बैरम खान की पत्नी थी। जब अकबर छोटा था तब से बैरम खां और बैरम खान की पत्नी सलीमा सुल्ताना बेगम अकबर की संरक्षक थी। अकबर ने अपने ही बहनोई बैरम खां का कत्ल करवा कर अपनी सगी फुफेरी बहन से निकाह कर लिया। 

अब ऐसे दरिंदे मुगलों के दरिंदे आचरण को किस तरह से यह इतिहासकार छुपाकर एक इनकी शानदार छवि बनाने की कोशिश करते हैं सोचिए ।
भारत के इतिहासकारों ने जो गंदगी फैलाई है उसे मिटाने में कई सदी लगेगी। 

साभार

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