Monday, 17 August 2026

अटल बिहारी बाजपेई

अटल बिहारी बाजपेई जी का मैने कभी सम्मान नहीं किया।इसकी कुछ ख़ास वजह है। 1989 में अटल बिहारी बाजपेयी ने विश्वनाथ प्रताप सिंह को समर्थन देकर केंद्र में उनकी सरकार बनवा दी। ये व्यक्ति दलितों का मसीहा बनने के लिए पागल था। इसने आते ही मण्डल कमीशन लागू करने के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक दी। केंद्र का पूरा अमला मण्डल कमीशन पर ध्यान केंद्रित किये हुए था। कश्मीर में दूसरा ही षड्यंत्र चल रहा था । राज्यपाल जगमोहन के हटने के बाद पाकिस्तान के सहयोग से कश्मीर में व्यापक रूप से हिन्दू नरसंहार की तैयारी चल रही थी और केंद्र बेखबर था। जबकि कश्मीर की मस्जिदों से हिंदुओं को कश्मीर से बाहर जाने की चेतावनी बार बार दी जा रही थी इसके बावजूद केंद्र सरकार कश्मीर से आँखे मुदें हुए थी। अंततः 19 जनवरी 1990 को हिन्दू नरसंहार का जो खेल खेला गया वो दिल दहला देने वाला था। लाखों हिंदुओं का सुनियोजित तरीके से बर्बरतापूर्ण कत्ल हुआ। बलात्कार की घटनाओं ने भारत पाक विभाजन के रिकार्ड को तोड़ दिया। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस घटना को बैन करवाने में ज्यादा दिलचस्पी ली जबकि अटल जी ने केवल एक फीका सा दुःख व्यक्त किया। इस घटना पर अटल जी ने न वीपी सिंह से समर्थन वापस लिया और न उनकी इस बात के लिए आलोचना की कि 15 दिन से कश्मीरी मस्जिदों से जो चेतावनी जारी की जा रही थी उनका संज्ञान लेकर हिंदू और सिक्ख सुरक्षा के उपाय क्यों नहीं किए गए ? ये कैसे हिंदूवादी सम्राट थे, ये समझ से बाहर है। 

विश्वनाथ प्रताप सिंह का मण्डल आयोग हिंदुओं में विभाजन का बड़ा कारण साबित हुआ। जातीय खाई और गहरा गयी। हिन्दू खण्ड खण्ड हो गया। हज़ारों युवाओं ने आत्मदाह किया। ये सब जानते हुए भी अटल जी ने मण्डल आयोग पर वीपी का भरपूर समर्थन किया। क्या कोई अपने ही लोगों को खंड खंड करने का षड्यंत्र कर सकता है ?

अटल जी को अच्छी तरह पता था कश्मीर नरसंहार में पाकिस्तान का अहम रोल है इसके बावजूद वे पाकिस्तान से सम्बन्ध सुधारने को सबसे अधिक उत्सुक नज़र आये। अगर स्वर्गीय जनरल परवेज मुशर्रफ की मानें तो कुछ शर्तों पर अटल जी कश्मीर को पाकिस्तान को देने के लिए तैयार भी हो गए थे और इसका ड्राफ्ट मसौदा तैयार भी हो गया था पर अटल जी की सरकार दोबारा न आने से ये ड्राफ्ट परवान न चढ़ सका।समझौता एक्सप्रेस के जरिये हज़ारों आतंकी यात्री बनकर धड़ल्ले से भारत आये। इनकी गहन तलाशी इसलिए नहीं ली जा सकती थी क्योंकि इससे भारत पाक के बीच संबंध खराब होने का खतरा था। इस लापरवाही के फलस्वरूप भारत को कारगिल युद्ध का भी सामना करना पड़ा। 

अटल जी कारगिल युद्ध में वायुसेना का इस्तेमाल न करने की बार बार कसमें खा रहे थे और सीमा पार न करने के अपने वादे को बार बार दोहरा रहे थे, ऐसा कर वे किस नैतिकता का परिचय दे रहे थे ? जिस पाकिस्तान ने उनकी दोस्ती का सम्मान नहीं किया। उसके विरुद्ध वो इतने नैतिक क्यों थे ? अगर भारत वायुसेना का इस्तेमाल करता तो हमारे साढ़े पांच हज़ार सैनिक क्यों मारे जाते ?

अटल जी जिस इसराइल को पानी पी पीकर लगभग रोज कोसा करते थे उसी इसराइल ने अपने जीपीएस सिस्टम से आतंकियों के छिपे होने की स्थिति भारत को उपलब्ध कराई थी और वो भी तब जब दुनिया के सारे देशों ने अमेरिकी दबाव में भारत की किसी भी प्रकार की मदद करने से मना कर दिया था। अगर इसराइल जीपीएस सिस्टम से मदद न करता तो भारत किसी भी कीमत पर कारगिल को आतंकियों से मुक्त नहीं करा सकता था।

रोज़ शराब पीने वाले और टुंडे कबाब खाने वाले अटल जी किस तरफ से पंडित थे ये शोध का विषय है। अगर हिन्दू नेता ऐसे होते हैं तो नहीं चाहिए हमें ऐसे नेता। एक काम वो और कर गए थे जिस पेंशन के सहारे बुजुर्ग बुढ़ापा काटते थे उसे अटल जी ने रद्द कर दिया था और हज सब्सिडी तीन गुना कर गए थे।

लेकिन हां उनकी एक उपलब्धि की अवश्य तारीफ की जा सकती है और वो है पोखरण परमाणु विस्फोट।

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