विश्वनाथ प्रताप सिंह का मण्डल आयोग हिंदुओं में विभाजन का बड़ा कारण साबित हुआ। जातीय खाई और गहरा गयी। हिन्दू खण्ड खण्ड हो गया। हज़ारों युवाओं ने आत्मदाह किया। ये सब जानते हुए भी अटल जी ने मण्डल आयोग पर वीपी का भरपूर समर्थन किया। क्या कोई अपने ही लोगों को खंड खंड करने का षड्यंत्र कर सकता है ?
अटल जी को अच्छी तरह पता था कश्मीर नरसंहार में पाकिस्तान का अहम रोल है इसके बावजूद वे पाकिस्तान से सम्बन्ध सुधारने को सबसे अधिक उत्सुक नज़र आये। अगर स्वर्गीय जनरल परवेज मुशर्रफ की मानें तो कुछ शर्तों पर अटल जी कश्मीर को पाकिस्तान को देने के लिए तैयार भी हो गए थे और इसका ड्राफ्ट मसौदा तैयार भी हो गया था पर अटल जी की सरकार दोबारा न आने से ये ड्राफ्ट परवान न चढ़ सका।समझौता एक्सप्रेस के जरिये हज़ारों आतंकी यात्री बनकर धड़ल्ले से भारत आये। इनकी गहन तलाशी इसलिए नहीं ली जा सकती थी क्योंकि इससे भारत पाक के बीच संबंध खराब होने का खतरा था। इस लापरवाही के फलस्वरूप भारत को कारगिल युद्ध का भी सामना करना पड़ा।
अटल जी कारगिल युद्ध में वायुसेना का इस्तेमाल न करने की बार बार कसमें खा रहे थे और सीमा पार न करने के अपने वादे को बार बार दोहरा रहे थे, ऐसा कर वे किस नैतिकता का परिचय दे रहे थे ? जिस पाकिस्तान ने उनकी दोस्ती का सम्मान नहीं किया। उसके विरुद्ध वो इतने नैतिक क्यों थे ? अगर भारत वायुसेना का इस्तेमाल करता तो हमारे साढ़े पांच हज़ार सैनिक क्यों मारे जाते ?
अटल जी जिस इसराइल को पानी पी पीकर लगभग रोज कोसा करते थे उसी इसराइल ने अपने जीपीएस सिस्टम से आतंकियों के छिपे होने की स्थिति भारत को उपलब्ध कराई थी और वो भी तब जब दुनिया के सारे देशों ने अमेरिकी दबाव में भारत की किसी भी प्रकार की मदद करने से मना कर दिया था। अगर इसराइल जीपीएस सिस्टम से मदद न करता तो भारत किसी भी कीमत पर कारगिल को आतंकियों से मुक्त नहीं करा सकता था।
रोज़ शराब पीने वाले और टुंडे कबाब खाने वाले अटल जी किस तरफ से पंडित थे ये शोध का विषय है। अगर हिन्दू नेता ऐसे होते हैं तो नहीं चाहिए हमें ऐसे नेता। एक काम वो और कर गए थे जिस पेंशन के सहारे बुजुर्ग बुढ़ापा काटते थे उसे अटल जी ने रद्द कर दिया था और हज सब्सिडी तीन गुना कर गए थे।
लेकिन हां उनकी एक उपलब्धि की अवश्य तारीफ की जा सकती है और वो है पोखरण परमाणु विस्फोट।
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