हथकांत चतुर्वेदी ब्राह्मणों की आश्रय स्थली
हथकांत को बाह तहसील में #चतुर्वेदी ब्राह्मणों के प्राचीन स्थलों में जाना जाता है। अलाउद्दीन खिलजी के समय में समस्त चतुर्वेदी मथुरा से पलायन करके #भदावर महाराज के शरणागत हुए तो उन्हें हथकांत, चंद्रपुर, होलीपुरा, कमतरी, बटेश्वर में बसाया गया। यहाँ का चतुर्वेदी समाज स्वामी श्री हरिदास जी महाराज (टटिया स्थान) को अपने गुरू के रूप में देखता है। श्री स्वामी परम्परा के आचार्य, आचार्य श्री ललित किशोरी देव जी भदावर के हथकांत के ही चतुर्वेदी थे।
यहाँ की आबादी बढ़ती रही और ये एक क़स्बा बना जहां अलग अलग मोहल्ले हो गए और यहाँ कई दर्जन #होली जलती थी। सन 1386 के आस पास सुल्तान फिरोजशाह ने आक्रमण किया, जिससे नगर को भारी क्षति पहुँची थी। हथकांत की जैन धर्म में भी विशेष महत्ता थी यहाँ एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल था, एक प्राचीन जैन मंदिर स्थित बना जिसमे 51 प्रतिष्ठाएँ हुई थीं। सन् 1638 में, हथकांत के #जैन मंदिर से कुछ प्राचीन जैन प्रतिमाओं को ऊँट पर रखकर इटावा के जैन धर्मशाला मंदिर में ले जाया गया था।
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