Friday, 31 October 2025

अग्निवास का परिहार

।। अग्निवास का परिहार ।।

विवाहयात्रा व्रत गोचरेषु चूड़ोपनीति ग्रहणे युगादौ। दुर्गा विधाने सुत प्रसूते नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनीयम् ॥

तिष विज्ञान अर्थात् नित्य नैमित्तिक कार्य, जन्म व मृत्यु के समय, विवाह में, यात्रा आरम्भ या यात्राकाल में, व्रतोद्यापन में, ग्रहों की अनिष्ट गोचर स्थिति में, मुण्डन, उपनयादि संस्कार में, ग्रहण शान्ति, रोग-पीड़ा की शान्ति, नवरात्र-दुर्गा-पूजा, पुत्रादि) सन्तान जन्म काल में अग्निवास का विचार नहीं किया जाता ।

No comments:

Post a Comment