Thursday, 8 January 2026

श्वेतार्क कल्प तंत्र

श्वेतार्क कल्प तंत्र

श्वेतार्क मूल तंत्र - श्वेत मदार की जड़ लाकर श्वेत चंदन के साथ मिलाकर उसका तिलक लगाने से मनुष्य संसार को मोहित कर लेता है। पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क की जड़ को खोदकर लायें। उस जड़ को दाहिने हाथ में बाँधने से साधक को सिंह की बाधा नहीं होती है।

पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क की जड़ खोदकर साफ स्वच्छ करके, पत्थर से पीसें, थोड़ी मात्रा में जल भी मिलायें। इसे किसी कपड़े से छानकर उसमें पंचगव्य तथा गोरोचन और चमेली में मिलाकर इसे दुकानादि व्यापार स्थल में रखें तो अद्भुत लाभ होता है। (परीक्षित है)।

आधि-व्याधिहर्ता श्वेतार्क- हर प्रकार की आधि-व्याधि और ऐसे
रोग जिनका निदान न मिल रहा हो अथवा कोई औषधि लाभ न कर रही हो तो आक (मदार) के फूल लाकर उन पर सिन्दूर लगायें। तदनन्तर अथर्ववेद काण्ड 9 सूक्त 8 शीर्षोत्क शीर्षामयं के प्रत्येक मंत्र के आदि में "ॐ श्री ह्रीं फट स्वाहा" बीज मंत्र लगाकर मंत्रों को पढ़ते हुए रोगीके सिर से पैर तक फूल उतारें और फिर उन फूलों को रोगीके घर के बाईं ओर गाड़ दें तो समस्त रोग दूर हो जाते हैं।

सौभाग्य प्राप्ति - श्वेत आक की जड़ पुष्य नक्षत्र में उखाड़कर दाहिनी भुजा में बाँधने से दुर्भगा स्त्री को भी स्वामी से सौभाग्य को प्राप्त होता है।

कामनासिद्धि - रविवार पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क की जड़ ग्रहण कर उसकी एक अंगुष्ठ के समान गणनाथ की प्रतिमा को बनाकर भक्तिभाव से लाल कनेर की कुसुम और गन्धादि उपचारों से पूजन कर हविष्य अन्न खायें, जितेन्द्रिय रहे। नाम मंत्र से पूजा करें और बीजादिके अन्त में नमः लगायें। इस प्रकार पूजन करें तो जिस वस्तु की इच्छा करें व्ह एक मास में पूर्ण होगी। प्रत्येक कामना की सिद्धि के निम्ति एक महीने भर पूजा करें।

गणेश मंत्र...................। पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क की जड़ ग्रहणकर उसे छाया में सुखाकर पूर्ण कर एक कर्ष या आधे पल प्रातः काल उठकर.................इस मन्त्र से अभिमंत्रण कर मट्ठे के साथ या घी के साथ खायें। यह औषधि पचने पर दूध भात खायें। ऐसा सात दिन खाने से बालक भी कवि हो जाता है। श्वेतार्क के वृक्ष का पीढ़ा बनाकर उसमें बैठकर धीरे-धीरे घी के साथ भोजन करें तो भीमसेन के समान भोजन करेगा।

पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क का पंचांग ग्रहणकर उसका चूर्ण बना लें उस चूर्ण को घी तथा मधु मिलाकर सेवन करें। एक मास तक इसका सेवन करना पुष्टिकारक तथा वीर्यवर्धक होता है।

सफेद आर्क (श्वेतार्क) के पौधे का पंचांग लेकर छाया में सुखाये और उसका चूर्ण बनाये। इस चूर्ण को गाय या भैंस के दूध में भिगो दें। इस प्रकार पाँच बार भक्ति करने की क्रिया से श्रेष्ठ औषधि तैयार हो जाती है।

औषधि के चूर्ण हो जाने पर इसे सौंठी के चावल और दूध से प्रयोग करें। इस प्रकार नियमित रूप से एक मास तक सेवन करें। औषधि सेवनकाल में तैलादि पदार्थों का ग्रहण करना वर्जित है।

इसके सेवन के फलस्वरूप शरीर में रक्त, मेद तथा माँस की वृद्धि होती है। यह बुद्धिवर्धक तथा वृद्धावस्था को भी दूर करता है। इस औषधि के सेवनादि से शरीर में सूर्य के समान दीप्ति आ जाती है।

श्वेतार्क की जड़ सुहागे के साथ घोटकर पिलाने से सर्पविष उतर जाता है। श्वेतार्क की जड़, नीम की पत्ती, काली मिर्च, पीसकर पानी के साथ पिलाने से सर्पविष नष्ट होता है। श्वेतार्क के कोमल पत्ते गुड़ में लपेटकर खिलाने से सर्पविष नष्ट होता है। श्वेतार्क का छिलका कूटपीसकर फिटकरी में मिलाकर विष स्थान पर लगायें इससे सर्पविष नष्ट होता है।

श्वेतार्क कल्प प्रयोग विधि शनिवार के दिन वृक्ष के पास निमंत्रण देने जायें तो सर्वप्रथम 'मम् कार्य सिद्धि कुरू कुरु स्वाहा'। यह मन्त्र वृक्ष के सामने हाथ जोड़कर बोलें और चन्दन चावल और पुष्प, नैवेद्य से पूजन करें धूपादि दें और मौली बाँधकर आ जायें। दूसरे दिन रवि पुष्य नक्षत्र को सुबह से पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण कर जायें निम्न मंत्र बोलकर खोदे और जड़ ले आए। जड़ को उत्तर या पूर्व की ओर मुँह करके खोदकर प्राप्त करना चाहिए।

मन्त्र - ॐ नमो भगवते ............... ॐ संतु स्वाहा।

इस मन्त्र से मूल (जड़) को लाकर पंचामृत से धोकर ऊँचे और शुद्ध स्थान पर रख दें, तत्पश्चात् पुष्य नक्षत्र रहते उस जड़ से भगवान गणेश जी की मूर्ति बनायें।

मन्त्र - .................। से अभिमंत्रित करके किसी भी कार्यवश साथ में लेकर जायें तो अवश्य सफल होता है। सूर्यग्रह शांति के लिए श्वेतार्क की समिधा से होम करने का शास्त्रीय विधान है।

आक का वास्तु पर कुप्रभाव

चूंकि आक दूध वाला वृक्ष है अतः इसे घर पर नहीं लगाना चाहिए। अथवा घर के पीछे लगा सकते हैं।


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