Sunday, 23 August 2026

स्तन टैक्स

ऐसी गलती ना करो... यही तो चाहते हैं अंबेडकरवादी
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- दिलीप पाण्डेय

हमारे देश के कुछ सामान्य वर्ग के क्रिएटर और लेखक बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं । 

मटका झाडू और स्तन टैक्स की झूठी अवधारणाएं वामपंथियों और अंबेडकरवादियों द्वारा फ्लोट की गईं । आज जाने अनजाने कुछ सामान्य वर्ग के ही लोग अंबेडकरवादियों के झूठे नैरेटिव का हिस्सा बन रहे हैं ।

कई पोस्ट में लगातार देख रहा हूं कि अंबेडकरवादियों को जवाब में ये लिखा जा रहा है कि

तुम खुद भेजते थे अपनी मां को स्तन टैक्स देने हमारी क्या गलती है ? (ऐसे जवाब भोले भाले दलितों को दिखाकर भड़काया जा रहा है)

इसी तरह दलित माता नाम से फर्जी वीडियो कुछ सामान्य वर्ग के क्रिएडिव लेकिन मूर्ख लोगों के द्वारा गीत बनाकर प्रचारित किए जा रहे हैं जिसमें ये लाइन लिखी जा रही है कि दलित माता ने झाडू और मटका हटा दिया । जो कभी लगा ही नहीं वो हटाया कैसे जा सकता है ?

दोनों नैरेटिव झूठ हैं अगर कोई ये सब बोले तो उसको ये उत्तर दीजिए जो मैं लिख रहा हूं-

1- झाडू मटका बांधा गया- अंबेडकर ने खुद बहुत कोशिश की थी कि उनको इसका कोई प्रमाण मिल जाए लेकिन वो कोई प्रमाण नहीं दे सके । उन्होंने अपने साहित्य में इसका जिक्र भी किया है कि उनके पास इस घटना का कोई सबूूत ही नहीं है ।

2- स्तन टैक्स- ये केरल के त्रावणकोर साम्राज्य की घटनाएं कहकर झूठी प्रचारित की जाती हैं । पहली बात ये कि त्रावणकोर साम्राज्य के राजा नायर जाति के होते थे और नायर जाति केरल में ओबीसी के तहत आती है । इस साम्राज्य का सामान्य वर्ग से कोई रिश्ता ही नहीं है । दूसरी बात ऐसे फोटो मौजूद हैं कि तब त्रावणकोर के राजपरिवार की स्त्रियों के स्तन भी खुले हुए थे तो क्या वो भी स्तन टैक्स दे रही थीं ? इन्हीं तस्वीरों से ही ये प्रोपागेंडा पहले ही ध्वस्त हो चुका है ।

आप सभी सामान्य वर्ग के लोगों से निवेदन है कि व्यंग्य कसते वक्त भी इस तरह के झूठे नैरिटिव का हिस्सा कभी ना बनें नहीं तो एक झूठ बात सच हो जाएगी और इसका नुकसान आपको तो नहीं लेकिन आपकी आने वाली पीढ़ियों को पक्का उठाना पड़ेगा ।

क्योंकि आम तौर पर देश के लोग व्यंग्य को व्यंग्य की तरह ही देखें, या आपका व्यंग्य समझ पाएं, ये कोई जरूरी नहीं है ।

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बाकी मोदी तो खुद ही हिसाब चुक्ता करने की बात करता है वो खुद गलत नैरेटिव को आगे बढ़ा रहा है इसलिए आपकी चुनौतियां और ज्यादा बड़ी हैं । ये ध्यान रखना ।

-दिलीप पाण्डेय

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