#मनुस्मृति -
आज जिस मनु स्मृति के नाम लेकर सनातन को गरियाने का प्रपंच विभिन्न मंचों से जार्ज सोरेस के पिठ्ठू कर रहे है उन्हें पता होना चाहिए कि मनु स्मृति न तो कोई नित्य पूजनीय धार्मिक ग्रंथ है न ही कोई कानूनन प्रतिबंधित साहित्यिक कृति है. न ही स्वतंत्र भारत वर्ष की संवैधानिक व्यवस्था में उसकी कोई कानूनी मान्यता है.!!!
मनु स्मृति तात्कालिक राज व्यवस्था की तत्समय की सामाजिक व्यवस्था की नीति निर्धारक संहिता पुस्तक है जिसे समकालीन परिस्थितियों के रूप में ही जानना समझना हर समाजशास्त्री के लिए अध्ययन का विषय है क्योंकि उसके बहुसंख्यक प्रसंग आज भी मानव सभ्यता की अमूल्य निधि है..!!!
आज मनु स्मृति के आधार पर न तो भारत का संविधान है न ही कानून व्यवस्था है न ही कोई सर्व मान्य सामाजिक व्यवहार है इसलिए मनु स्मृति को लेकर वर्तमान भारतीय समाज को लांक्षित करने का प्रयास एक विदेशी सोच की नियोजित सनातन विरोधी कुंठा है ..!!!
मनु स्मृति का विरोध वस्तुत: प्रकारांतर सनातन गरिमा को धूमिल करने का कुचक्र है क्योंकि ऐसी मंचीय धृष्टता के दायरे में शरीयत शासन में मध्ययुगीन धार्मिक ग्रंथों के ज्यों का त्यों लागू करने का कोई उल्लेख आपने कहीं नहीं पाया होगा तो उनका तो नाम भी लेने में मैकाले पुत्र कांपते हैं..!!!
जिस स्मृति ग्रन्थ की कोई विधि व्यवस्था नहीं है उसे लेकर सनातन स्मृति परम्परा को स्त्री विरोधी बताना दरसल सनातन विरोधी कुकृत्य है क्योंकि नारी सम्मान सनातन की धुरी है धुरी थी धुरी रहेगी इसे किसी विदेशी मानस संतति से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है..!!!
विचित्र केतु जैसे स्व नाम धन्य हालिया मनु स्मृति को कोस कोस कर उसके नाम पर नारी शक्ति के ठेकेदार बनने का जो नाटक कर रहे है उन्हें दूसरे पंथ की किताबों के स्त्री विरोधी उद्धरण देने में लकवा मार जाता है वैसे भी ऐसे तत्वों की महिला सशक्तिकरण की असलियत शाहबानो- तीन तलाक प्रकरण में दुनिया देख चुकी है और हालिया देख भी रही है..!!!
मनु स्मृति भारतीय लोकतांत्रिक परम्परा का ऐसा हिस्सा है जो आलोचना समीक्षा से परे नहीं है उसकी समालोचना निरंतर होती रही है आगे भी होती रहनी चाहिए इस पर किसी सनातनी को कोई आपत्ति न थी न है न रहेगी उसके हर प्रसंग पर आम सहमति भी नहीं है ..!!!
ऐसे में मनु स्मृति के नाम पर पूरी सनातन परंपरा को निशाने पर लिया जाना पूर्णतः सोचा समझा साम्प्रदायिक कृत्य है..बाकी जो पूरी मनुस्मृति न पढ़ पाए न समझ पाए उन्हें बौद्धिक समाधान हेतु आदरणीय श्री मनोज श्रीवास्तव सर की मनु स्मृति पर फेस बुक पोस्ट की श्रृंखला अवश्य पढ़नी चाहिए .. सत्यमेव जयते ..!!!
सादर -बृजेश कुमार त्रिपाठी
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