Saturday, 27 June 2026

श्राद्ध में खाने-खिलाने वाले सावधान मौन रहें

🦀श्राद्ध में खाने-खिलाने वाले सावधान- जो मृतपितरों के निमित्त एकोद्दिष्ट, पार्वण आदि में ब्राह्मणभोजन करते-कराते हैं; वे सावधान रहें। मरे हुए माता-पिता आदि के श्राद्धनिमित्तक भोजन में पितर तभी तृप्त होते हैं, जब भोज्यपदार्थों के गुणों को कहे विना मौन होकर भोजन किया जाय। मौन भोजनपर्यन्त ही ब्राह्मणरूप पितर भोजन करते हैं। मौन भोजन के अभाव में भोजन का सूक्ष्म तत्त्व पितरों तक पहुँचता नहीं। व्यर्थ बकवास करते हुए भोजन करनेवाले ब्राह्मणों के सप्तधातुओं में श्राद्धीयान्न का सूक्ष्म-स्थूलांश टिक जाता है, परिणामत: अतृप्त पितर उन अमौनभोजी ब्राह्मणों को भी विविध प्रकार से व्यथित करते रहते हैं। खाने-खिलाने वाले इस पर ध्यान नहीं दे सकते तो श्राद्धनिमित्तक खाना-खिलाना बन्द कर दें, अन्यथा वह श्राद्धान्न ही दोनों के तेज को खा जाएगा। आजकल हमारे समाज में भी एक गन्दी परिपाटी चल गयी है कि माँ-बाप की मृततिथि में चतुर्वर्णेतर मित्र एवं स्टाफों को समान पंक्ति में बैठा कर नियमबद्ध ब्राह्मणों की उपेक्षा करना चाहते हैं! ऐसा संक्रमित भोजन दोनों के पतन का कारण होता है। हमारे समाज में भी ऐसे घिनौने कृत्यों का बढ़ना दु:खद है। सार्ववर्णिक श्राद्धीय सहभोजन में बुफेलो सिस्टम या जूते पहने ही लाल कुर्सी-टेबल पर श्राद्धपार्टी मनाना बहुत व्यथाकर है। बन्धो! आप किसी को खिलाना चाहते हो तो उसे खिलाने की योग्यता अपनाओ; कोई तुम्हारी श्राद्धपार्टी के भरोसे नहीं जी रहा! आश्चर्य तो तब बढ़ जाता है जब उस असंस्कृत माहौल में भी कोई कुछ नियम पालन करना चाहते हैं तो ये ब्रह्मासुरसमूह उनकी खिल्ली उड़ाते हैं! सावधान! तुम अमुक को खिलाने में सक्षम नहीं हो; तो ब्राह्मण के नाम पर उन्हें खिलाना-बुलाना एकदम बन्द करो। तुम्हारे यहाँ एक ज़ूम की पार्टी कर भ्रष्ट होना आवश्यक नहीं!.




👺बान्धवो! बहुरूपियों को बहुत बखारिए परन्तु सनातन को सुसंरक्षित करने में हमी लोग काम आएँगे। हम्हीं लोग नमक-रोटी खाकर भी अन्तिम साँस तक सनातन को समृद्ध करते रहेंगे। मोहमाया के ब़ाज़ार में अमिथ्या कुछ नहीं!...

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