Saturday, 27 June 2026

ब्राह्मण पंडित की दुर्दशा

🌺अतिसमादरणीय कर्मकाण्डी पण्डितो! ब्रह्मवृत्तिविघातक जिन मूढ़ प्रलापियों ने कर्मकाण्ड से परिवार पालने के संघर्ष का सामना नहीं किया है, उन क्रूर के कर्कश दुरुपदेशों का विधिवत् कर्मकाण्ड कर दो। ऐसे जन्तु अपनी दुकानदारी मात्र के लिए आपकी विगर्हणा का अपप्रदर्शन करते हैं। इससे इन लोगों को एक-दो विगर्ह्य प्रोग्राम मिल जाते हैं, जहाँ चढ़ावे और खुरपुजाई के लिए इन्हें वर्णाश्रमादि का कोई बन्धन स्वीकार्य नहीं। आप जैसे निरीह पण्डितों को फटकार कर ही ऐसे दुष्टों का दुर्धन्धा आगे बढ़ता है। आपने वेद-पुराणों में इन सबसे अधिक श्रम किया है, आप अपनी अस्मिता पर हो रहे दुष्प्रहार का प्रतीकार करो। इन बहुरूपियों को कर्मकाण्डियों की वेदना से कुछ लेना देना नहीं। आज देश के महानगर ही नहीं; गाँवों में भी शिखा-सूत्र धारण करने वाले द्विजों का दर्शन कठिन हो गया है। हिन्दुस्थान के ९९% ब्राह्मण भी शिखा-यज्ञोपवीत से विरहित हैं, अत्यल्प अपवाद छोड़ क्षत्रिय, वैश्यों के शिखा-सूत्र की कथा ही समाप्त हो चुकी है। ये सर्वथा विगर्हित उपदेशक इन बाबुओं से क्यों नहीं कहते कि तुम शिखा-सूत्रधारी नहीं होने के कारण हमारी खुरपुजाई के अधिकारी नहीं हो? आप पण्डितों का ही अपमान क्यों? आप विश्वास के साथ अस्मिता की रक्षा करो। ये दुष्ट जन वेद, कर्मकाण्ड बिल्कुल नहीं जानते। ये सत्समाज के उपयोगी नहीं होने से आप परशुरामवंशज निरीहों पर भड़ाँस निकालते रहते हैं। सावधान...

🌺ऐसी दु:स्थिति में वेदादिशास्त्रों का क्या उपयोग? वेदबहिष्कृतों के द्वारा भी वेद वेद क्यों चिल्लाये जा रहे हैं? कथा-पुजारीपन तो ब्राह्मणों से छिन ही चुके हैं; वेद-शास्त्र भी पढ़ कर ब्राह्मण क्या करेंगे? ये दुष्टजन अपने दुष्प्रारब्धवान् परिकरों को बाप का श्राद्ध करने में मना कर देते हैं और अपनी भागवतकथा से डायरेक्ट मुक्त कर देने का उपदेश देते हैं। सम्प्रति बड़े मञ्च का एक भी सर्वज्ञ ऐसा नहीं जो श्रीमद्भागवत के पहले श्लोक का ही पदार्थविवेचन मात्र कर दे। शुद्ध कर्मकाण्डजीवी पण्डितों को देश में कितने शुद्धतम यजमान मिलेंगे? यदि लाखों में एक तो क्या यह शोचनीय नहीं है? इन लाखों में एक से कितने विशुद्धतम कर्मकाण्डी अपने बच्चों का योगक्षेम चला सकते हैं? इन दुष्टों ने कर्मकाण्डी पण्डितों की जीविका के लिए कितने बृहद् यज्ञों का आयोजन किया-कराया है? इन्होंने देश में कितने शुद्ध द्विजश्रेष्ठ बनाये हैं? यदि कभी नहीं तो इन निकम्मे सर्वज्ञमन्य ब्रह्मद्रोहियों को बक बक करने का अधिकार कैसे? क्या वेद, धर्मशास्त्र या कर्मकाण्डादि का नामोनिशान मिटा दिया जाय? सरकारी वैदिक-धर्मशास्त्री भी कितने विधि-निषेधों का खुला व्याख्यान दे सकते हैं? पण्डितो! वेद, कर्मकाण्ड को आप कर्मकाण्डी लोग ही कुछ भी बचा रखे हो, इन साण्डों को वेद, कर्मकाण्ड के ककहरा का भी ज्ञान नहीं। ये अपनी दुकानदारी का खूब प्रचार करें परन्तु कर्मकाण्डियों के योगक्षेम में बाधा बनें तो आप उन बाधाओं का सद्य: कर्मकाण्ड करा दो। मुझे स्थायिवृत्तिविहीन कर्मकाण्डी पण्डित मिलते रहते हैं, जिनकी कौटुम्बिक मनोवेदना से दु:ख होता है। ये दुष्टसमुदाय क्या जाने वेद, कर्मकाण्ड और कर्मकाण्डियों का बुरा हाल⁉️ 

🌺ये धर्मभ्रष्ट उपदेशक क्षत्रिय, वैश्य, शूद्रों को नहीं फटकारते; कर्मकाण्डी निरीहतम ब्राह्मण ही इनके निशाने पर शिकार होते हैं। जो भ्रष्टतम धनपशु ब्राह्मण भी इनकी प्रचुर खुरपुजाई कर देता है; वह इनके दिल का महान् टुकड़ा हो जाता है। सावधान पण्डितो! जो कर्मकाण्ड की दयनीय दशा झेल रहे हैं, कदाचित् कुछ सुनना ही है तो उन्हीं की सुनो। अपने वृत्तिविघातकों का मुखमर्द्दन करने में पीछे मत रहो। दुनियाँ आपका कुछ नहीं बिगाड़ रही; कोई अपना ही आपका शुभेच्छु बन कर आपको खा रहा है। इनमें कोई एक भी जन्तु साङ्ग वेद, कर्मकाण्ड या कर्मकाण्डी पण्डितों का शुभ चिन्तक नहीं है। इन लोगों ने मात्र धन्धे के लिए वेदविद्यालय आदि खोल रखा है। आपको जो जन्तु नीचा दिखाए; उससे किसी शाखा के मात्र एक मन्त्र का सस्वर वीडियो माँगो, किसी शाखा की कुशण्डी या सपिण्डी का वीडियो माँगो, इन मूर्ख सर्वज्ञों की पोल खुल जायगी। कर्मकाण्डी पण्डितो! आपके योगक्षेम का जो चिन्तन करे, उसका सुनो। आप किसी के किये सोशल अपमान का बढ़ चढ़ कर प्रतीकार करो। आपसे ही वेद या कर्मकाण्ड बचेगा। यथासाध्य परम्परा की रक्षा करते हुए आगे बढ़ो और दुष्टमुखभञ्जन में भी पीछे मत रहो। पुन: सावधान- जिसे वेद, कर्मकाण्ड के ककहरा का भी ज्ञान होगा; वही ब्राह्मण होगा और वह आपका अपमान कभी नहीं कर सकता। आपको जो जैसे भजता है; उसे वैसे ही भजो.....

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