2. श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण में प्रयोग
रामायण में 'सनातन' शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से शाश्वत धर्म (नियम/कर्तव्य) के लिए हुआ है:
अयोध्या काण्ड (18.31): "एष धर्मः सनातनः" — माता-पिता और गुरु की आज्ञा का पालन करना सनातन धर्म है।
सुन्दर काण्ड (15.51): "आनृशंस्यं परो धर्मः त्वमेवं धर्मवित् सनातनः" — दया और क्रूरता न करना ही परम और सनातन धर्म है।
3. महाभारत में प्रयोग
महाभारत में सैकड़ों बार 'सनातन' शब्द का उल्लेख मिलता है:
भगवद्गीता (2.24): "अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च। नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः॥" — यहाँ श्री कृष्ण आत्मा को 'सनातन' (अजर-अमर और शाश्वत) कहते हैं।
भगवद्गीता (14.27): श्री कृष्ण को "शाश्वतस्य च धर्मस्य" और "सनातनः" कहकर संबोधित किया गया है।
अनुशासन पर्व: "अहिंसा परमो धर्मः... अहिंसा सत्यमणु सनातनम्" — अहिंसा और सत्य को सनातन धर्म कहा गया है।
4. उपनिषद और स्मृति ग्रंथों में
मनुस्मृति (2.138): "सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्। प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः॥" — (सत्य बोलो, प्रिय बोलो... यही सनातन धर्म है।)
कठोपनिषद (2.2.8): परमात्मा और ब्रह्म के स्वरूप को सनातन बताया गया है।
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