गया जी में पितृ श्राद्ध एवं पिंण्डदान के लिए जाने से पहले घर पर कुछ आवश्यक धार्मिक कार्य पूर्ण कर लेना चाहिए। यह सभी कार्य अपने कुलाचार एवं आचार्य पंडित जी के मार्गदर्शन में करना उचित है। नीचे दिए अनुसार नियमों का पालन करें -
① गया जी तीर्थ विष्णुपद का स्मरण करते हुए पूजन
गया धाम तीर्थ में वैदिक विधि विधान से पिंडदान का संकल्प
अपने समर्थ अनुसार खर्च श्रद्धा से करें
② नान्दीमुख श्राद्ध
गया जी जाने से पहले घर पर नान्दीमुख श्राद्ध विधिपूर्वक करवाना चाहिए। इसमें देवताओं, पितरों एवं कुल के पूर्वजों का पूजन करके गया श्राद्ध के लिए संकल्प किया जाता है। यह कार्य आचार्य पंडित जी के निर्देशानुसार करें।
③ प्रस्थान से पूर्व की तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान श्री गणेश, कुलदेवता एवं पितरों का स्मरण करें । आचार्य पंडित जी के निर्देशानुसार यात्रा का संकल्प लें और घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर गया जी के लिए प्रस्थान करें।
④ साथ में ले जाने योग्य सामग्री
स्वच्छ धोती, गमछा, वस्त्र, तिल, कुश, पूजा की सामग्री (आवश्यकतानुसार), पितरों के नाम व गोत्र की सूची, व्यक्तिगत आवश्यक वस्तुएँ तथा यात्रा से संबंधित दस्तावेज अपने साथ रखें।
⑤ यात्रा के दौरान आचरण
यात्रा के दौरान सात्विक एवं संयमित जीवन का पालन करें। मांसाहार, मदिरा, तंबाकू, गुटखा एवं अन्य नशीले पदार्थों का पूर्ण त्याग रखें। क्रोध, विवाद, अनावश्यक मनोरंजन एवं अपशब्दों से बचें। पितरों का स्मरण करते हुए शांतिपूर्वक यात्रा करें।
⑥ भोजन संबंधी नियम
यात्रा एवं श्राद्ध के दिनों में यथासंभव सात्विक भोजन करें। बाहर का अनावश्यक भोजन न करें। भोजन के संबंध में अपने आचार्य पंडित जी के निर्देशों का पालन करें।
⑦ पितरों की सही जानकारी
जिन पितरों का श्राद्ध एवं पिंण्डदान करना है, उनके नाम, गोत्र, संबंध एवं कुल की सही जानकारी पहले से तैयार रखें, ताकि पूजा विधि में किसी प्रकार की त्रुटि न हो।
⑧ गया जी में पूजा-विधि
गया जी पहुँचने के बाद पिंण्डदान, तर्पण, श्राद्ध एवं विभिन्न वेदियों की पूजा आचार्य पंडित जी के मार्गदर्शन में विधिवत संपन्न करें। कोन-सी वेदी पर किस क्रम से पूजा करनी है, यह वहाँ के निर्धारित पांडत और आचार्य में निर्देशानुसार किया जाएगा।
⑨ क्षौर कर्म (मुंण्डन)
मुंडन अथवा क्षौर कर्म का नियम प्रत्येक कुल एवं परंपरा में अलग हो सकता है। इसे अपने आचार्य पंडित जी के निर्देशानुसार ही करें ।
विशेष
- गया श्राद्ध अत्यंत श्राद्धा एवं पितृ स्मरण का धार्मिक अनुष्ठान है। इसलिए पूरी यात्रा के दौरान मन, वचन और कर्म से संयम रखते हुए श्राद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करें और सभी धार्मिक विधियौं आचार्य पंडित जी के मार्गदर्शन में पूर्ण करें
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