बिल्व वृक्ष में भगवान् शिव का निवास तथा अश्वत्थ में विष्णु का निवास होता है l शिरीष वृक्ष में इन्द्र देव का तथा निम्ब और अर्क (मदार) में सूर्य देव का निवास होता है l ये वृक्ष इन देवों के विग्रह माने गए हैं l अतः इनका विनाश वर्जित है—-
तत्र बिल्वे स्थितः शम्भु: अश्वत्थे हरिरव्ययः l
शिरीषेऽभूत् सहस्रक्षो निम्बे देवः प्रभाकर: ll
स तु तन्मयताँ यातः तस्मात् तं न विनाशयेत् ll पद्म पुराण ll
ऋग्वेद के अनुसार बिल्व वृक्ष श्रीदेवी का वृक्ष है—
वनस्पतिस्तव वृक्षोथ बिल्व: ll देवासुर युद्ध के समय संकट काल में इन वृक्षों में इन देवों ने गुप्त रूप से निवास किया था l
अतः इन वृक्षों का छेदन वर्जित है l
ग्रहों की समिधा के वैदिक वृक्ष निम्नवत् हैं—
सूर्य का मदार, चंद्र का पलाश, मंगल का खदिर, बुध का अपामार्ग (चिड़चिड़ा),गुरु का अश्वत्थ,शुक्र का औदुम्बर (गूलर),
शनि का शमी, राहु का दूर्वा तथा केतु का कुशा l
तिल अन्न को विष्णु का प्रत्यक्ष प्रकटी करण माना गया है l पृथ्वी को तिल तिल में व्याप्त कर विष्णु ने अपने को तिल रूप में प्रकट किया था l अतः इसे हवनीय माना गया है l
इसी तरह से २७ नक्षत्रों के २७ वनस्पति प्रसिद्धि को प्राप्त हैं l
वेदों में अथवा ब्राह्मण ग्रंथों में किस वृक्ष से हवन करने से क्या मिलता है यह वर्णित है जैसे खदिर से हवन से बल तेज की वृद्धि,
पलाश से हवन से विद्या वृद्धि तथा गूलर से हवन से वंश वृद्धि होती है l देवी के निवास के लिए निम्ब वृक्ष लोक प्रसिद्ध है ही l
प्रेत निवास वृक्ष के रूप में विभीतक (बहेड़ा) माना गया है l
ये वृक्ष पृथ्वी के रोम माने गये हैं l ये पृथ्वी की सम्पदा हैं l देवता के निवास स्थान हैं l पर्जन्यों के आकर्षण केन्द्र हैं l
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