Wednesday, 26 August 2026

भारत की अधिकतम जातियां या तो म्लेच्छ है या तो

भारत की अधिकतम जातियां या तो म्लेच्छ है या तो बाहर से आए हुए गुलामो से उपजी है । जैसे कि शक, हूण, सिद्दी, क्रिसाई, यहूदी, पारसी, मुगल और मंगोलियाई आदि साथ ही कुतुब, तुगलक, बहनवी, आदिलशाही, पश्तून (लोध) आदि ।। 

इसलिए इनमें देश के गुलामी विरुद्ध भाव आना संभव न है। इसलिए यह देश के मर मिटने से दूर भागते है । उन्हें बस इससे मतलब है कि इनकी रोजी रोटी चलती रहे, इन्हें मतलब नहीं की सत्ता में कौन है, शासक का धर्म व आइडियोलॉजी क्या है आदि आदि । तो या तो ये जातियां वर्णसंकर संबंधों से उपजी है या फिर उन्हीं के यहां गहन नौकरी में रही है । 

इनके अंदर #anti_brahman आइडियोलॉजी इनकी जेनेटिक आइडियोलॉजी हो चुकी है तो अगर ये जातीय कभी शासक भी बनी तो इनका मूल स्वभाव प्रजा हितैषी शासक न होकर या तो किसी का गुलाम बनना होगा या फिर लूटपाट जो कि इनके जेनेटिक में है। 

अतएव ऐसे लोगों को या तो आप इनके मूल कार्य की ओर लौटाओ या फिर इनसे दूरी बना लो अन्यथा आपका पतन निश्चित है ।

अगर कोई इस बात से इंकार करता है कि नहीं नहीं ऐसी जातियां इस देश में नहीं है तो उससे पूछिए कि शक, हूण, सिद्दी, अरब के लाये गुलाम, ब्रिटिश, फ्रांसीसी, पुर्तगाली आदि स्वयं व उनके गुलाम किधर है? 

किधर है तुगलकशाही, कुतुबशाही, निजामशाही आदिलशाही के संपर्क से उपजे लोग व उनके बनाए हुए गुलाम व नौकर ?

किधर है मंगोलियाई लोग आदि ?

No comments:

Post a Comment