Friday, 24 July 2026

सभ्यता का पालना मेसोपोटामिया नहीं बल्कि भारत है

निक कोलिंस समुद्री इतिहासकार, उन्होंने वेस्टर्न इतिहासकारों को धता बताते हुए दावा किया कि cradle of Civilization अर्थात सभ्यता का पालना मेसोपोटामिया नहीं बल्कि भारत है

इसके लिए उन्होंने लोथल में मिले बंदरगाह का उदाहरण दिया जो मानव निर्मित थी और ज्वारीय तरंगों को कंट्रोल करती थी, ये एक समय में 60 टन के तीस जहाज को सम्भाल सकती थी 

इसकी इंजीनियरिंग इतनी उन्नत थी कि यूरोप या पश्चिमी दुनिया को 4,000 साल का समय लगा इसे मैच करने में, औद्योगिक क्रांति के बाद जाकर वे इसे कंपीट कर पाए

उनके अनुसार मेसोपोटामिया को सभ्यता का पालना कैसे कहा जा सकता है जब वे भारत पर व्यापार के मामले डिपेंडेंट थे, मेसोपोटामिया के खत्म हो चुके शहरों में आज भी भारतीय मुहरे, मोती और कपास मिले है इसके अतिरिक्त सागौन की लकड़ी और खाद्यान्न भी भारत आपूर्ति करता था

वे आर्यन थ्योरी को नकारते है, वे कहते है कि आर्यन आक्रमण की थ्योरी इसलिए गढ़ी जाती है क्योंकि अंग्रेज ये स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि वे जो सबसे शक्तिशाली है उनके जैसे श्वेत लोगों के बिना ये गहरे रंग वाले भारतीय इतने महान कैसे हो सकते है

उन्होंने अपनी श्वेत प्रतिष्ठा को बचाने के लिए मेसोपोटामिया को तो प्राचीन माना बल्कि भारत की महान विरासत को भी यूरोपीय शाखा की देन घोषित कर दी

ब्रिटिशों ने अपने शासन को भी स्थाई बनाने के लिए ऐसा किया था ताकि उनका विरोध कम हो क्योंकि हम यहां शासन करने वाले नए थोड़े है 

निक के अनुसार भारत 4,000 साल तक दुनिया की समुद्री महाशक्ति थी, इसी को लेकर रोम सम्राट ने शिकायत की थी कि भारत से सामान लेने के कारण हमारा सारा सोना हर साल भारत चला जा रहा है, उन्होंने चीन से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक फैले भारतीय व्यापार के बारे में जिक्र किया है 

उन्होंने सरस्वती नदी के बारे में भी बात की है, उनके अनुसार सरस्वती नदी को लेकर भ्रम फैला है कि वे काल्पनिक थी और केवल वेदों की लिखित थी, बल्कि वर्तमान वैज्ञानिक स्रोतों से पता चला है कि सरस्वती नदी वास्तव में एक्जिस्ट करती थी और वे इसे केवल सिंधु सभ्यता नहीं मानते बल्कि इसे सिंधु सरस्वती सभ्यता कहते है जिनके किनारों में पूरी जनसंख्या बसी थी

बाद में ये नदी भूकंपों की श्रृंखला के कारण सुख गई,

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