आशिर्वाद अभिषेके च पादप्रक्षालने तथा। भोजने शयनेचैव पत्नी वामे सदा वसेतु।।
एक लाइन में --
सर्वेषु धर्मकृत्येषु पत्नी तिष्ठति दक्षिणे।
सभी पुण्य कार्यों में जो आपको ईश्वर प्राप्ति की ओर ले जाए पत्नी सदा आपके दाहिने बैठेगी।
कन्या दान से बड़ा पुण्य और क्या हो सकता है?
एक रुपए का भी दान आप करते हैं तो आपकी पत्नी आपके दाहिने रहेगी।
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