Sunday, 9 November 2025

राम कृष्ण

श्री राम और श्री कृष्ण में एकमात्र समानता यही थी कि दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार थे। कृष्ण ने बाल्यकाल से ही न सिर्फ चमत्कार और अमानवीय पराक्रम प्रदर्शित किया बल्कि अपना विराट स्वरूप भी दिखाया। राम ने उतने ही पराक्रम दिखाए जितनी एक मनुष्य की क्षमता होती है। श्री राम एकं पत्नी व्रता थे जबकि कृष्ण अष्टभार्या कहलाये। राम ने जन्म सूर्य वंश में लिया था यह स्थापित करने के लिए कि एक राजा को कैसा होना चाहिए। कृष्ण ने जन्म चन्द्रवंश में लिया था, यह स्थपित करने के लिए कि प्रजा को कैसा होना चाहिए। 

श्री राम ने अयोध्या पर राजा के रूप में ग्यारह हज़ार वर्षों तक राज किया और रामराज की स्थापना की। कृष्ण कभी राजा नहीं बने, न मथुरा के न ही द्वारिका के। अपनी बनाई नगरी में भी वो द्वारिकाधीश बने, द्वारिका के संरक्षक। राम राजतन्त्र के प्रतीक पुरुष थे जबकि कृष्ण प्रजातन्त्र के प्रतीक पुरुष। राम भाइयों में सबसे बड़े थे, उनका मर्यादित होना आवश्यक था इसलिए वह मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। कृष्ण भाइयों में सबसे छोटे थे, उनका चंचल होना स्वाभाविक था, इसलिए वह लीला पुरुषोत्तम कहलाते हैं।

कृष्ण ने अपनी लीलाओं में पूतना को फंसाया, बकासुर को फंसाया। साड़ी की लीला रच दुःशासन को थकाया, गज़ अश्वत्थामा की लीला में द्रोणाचार्य को और शिखंडी की लीला रच भीष्म को फंसाया। इसके विपरीत राम स्वयं मरीच की लीला में फंस गए। सोने का हिरण नहीं होता, यह जानते हुए भी वह उसके पीछे गए। राम ईश्वर थे, फिर भी वह स्वर्ण मृग का रूप धारण किये मारीच को पहचानने में धोखा खा गए फिर हम तो इन्सान हैं, धोखा खा जाना स्वाभाविक है।

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