Sunday, 2 November 2025

अंग्रेज ओर धर्म

अंग्रेजों के सेवकों द्वारा अपने नाम पावर का ट्रांसफर करवाने के बाद से और फिर राज्य के बल से हिंदू समाज पर जबरन झूठ से भरी शिक्षा थोप दिये जाने के बाद से और फिर सनातन धर्म तथा आर्य समाज के कुछ मनीषी जनों द्वारा चलाए जाने वाले गुरुकुलों के अतिरिक्त शेष संपूर्ण हिंदू समाज द्वारा सरकार की शिक्षा का ही आश्रय लेने की विवशता से हिंदुत्व निष्ठ विचार समुदाय को भी सामान्य बातें तक ईसाइयों की धूर्तता और छल की नहीं पता। 
जैसे यह कि रिलिजन को धर्म क्यों लिखा गया, लोगों को नहीं पता। थियोलॉजी का अनुवाद ब्रह्म विद्या करने जैसा महापाप क्यों किया गया है, किसी को नहीं पता। 
चर्च को यहां गिरजाघर क्यों कहा गया है, यह महा पाप क्यों हुआ, यह भी किसी को नहीं पता । 
वह यह है कि पादरियों ने जानबूझकर अंग्रेजी हिंदी शब्द कोष (Dictionary) तैयार करने का काम किया

कामिल बुल्के जैसे लोग रामचरितमानस के जानकार थे और भारत में उसके प्रभाव के जानकार थे और जब वह देखते हैं कि सीता माता गिरिजा मंदिर में जाकर ही अपनी मनोकामना की विनती करती हैं तो उन्होंने गिरजाघर का महत्व समझ लिया और चर्च का अनुवाद गिरिजा घर कर डाला। 
यह बहुत ही धूर्तता थी लेकिन सामान्य हिंदू तो क्या अपने आप को बड़ा सजग हिंदू कहने वाले लोग कितनी मामूली बातें तक नहीं जानते? 
चर्च को गिरजाघर क्यों कहना? 

यह तो महा पाप है, झूठ है। 
Theology को ब्रह्म विद्या कहना महा पाप है, भीषण झूठ है, अनर्थ है। 
Religion को धर्म कहना महा पाप है, अनर्थ है,, झूठ है। 
अपने आप को प्रबुद्ध मानते हुए भी इन सब झूठ छलो और पापों को जानने का प्रयास न करना भी लज्जास्पद् है । 

मैं तो वर्षों से यह सब कह रहा हूं लेकिन जो प्रसिद्ध है चमकदार है शासन के द्वारा भी जिसको पद दिया हुआ है, अखबार में जो ज्यादा चमकता है या चैनल में, 
उसको ही लोग सुनते हैं
 बाकी को तो गुनते ही नहीं। 
झूठ ही आकर्षक है , 
 सत्य अनाकर्षक लगता होगा शायद।

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