Sunday, 2 November 2025

शबर शाबर शबरी

शबर शाबर एक क्षेत्र का नाम है, जो दक्षिण ओड़िशा तथा उत्तर आन्ध्र प्रदेश में है। इस क्षेत्र में भी अन्य भागों की तरह सभी वर्णों के लोग थे। अतः इस क्षेत्र की तपस्विनी को शबरी कहा गया।
इस क्षेत्र का सम्बन्ध वराह अवतार से है। पुष्कर द्वीप के हिरण्याक्ष पर आक्रमण करने के लिए वराह अवतार ने समुद्र मार्ग से ही यात्रा की होगी। अतः समुद्र तट के पास अधिक वराह या शूकर क्षेत्र हैं। एक उत्तर प्रदेश में भी है जहां तुलसीदास जी ने रामकथा सुनी थी। 
शबर जाति के समय धातुओं का खनन हुआ। उसका शास्त्र वैखानस कहा गया है। शबर से ही साबल शब्द हुआ है जिससे भूमि खोदते हैं।
महादेव के शाबर मन्त्र तथा मीमांसा दर्शन का शाबर भाष्य प्रसिद्ध है।
पुरी में जगन्नाथ पूजा का आरम्भ विद्यापति शबर ने किया था। आज भी उनके वंशज ही जगन्नाथ मन्दिर के पारम्परिक पूजक हैं। पुरी से प्रायः ७० किलोमीटर दूर बिस्फी गांव है। मिथिला के विद्यपति का गांव भी बिस्फी था। पता नहीं विद्यापति-बिस्फी का क्या सम्बन्ध है।

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