Thursday, 6 November 2025

साहित्य और समाज

कलम देश की बड़ी शक्ति है, भाव जगाने वाली
दिल ही नहीं दिमागों में भी आग लगाने वाली

- दिनकर (रश्मिरथी)

मैं धर्म और देश से जुड़ा तो इसमें दो पुस्तकें इसका कारण बनी थी - एक रोमा रोलां की विवेकानंद पर लिखी पुस्तक, दूसरी देशराज गोयल की पुस्तक "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ"

दुनिया भर में कम्युनिस्ट आंदोलन परवान चढ़ा मैक्सिम गोर्की की पुस्तक "मां" के कारण, बंगाल पीढ़ी दर पीढ़ी सेकुलर होता गया तो नजरूल इस्लाम की एक कविता के कारण, पूरा उत्तर भारत भक्तिधारा में बहकर आक्रांताओं का प्रतिकार कर सका तो इसका कारण तुलसीदास की रामचरितमानस थी, दक्षिण में तिरुवल्लुवर के कारण भक्ति और नैतिकता फैली, बहाबी आंदोलन अब्दुल बहाब नजदी की पुस्तक "किताबुत्त तौहीद" और शेख इस्माइल देहलवी की पुस्तक "तकवियतुल ईमान" के कारण दुनिया भर में काबिज है, सिख हिंदू नहीं, ये बात काहन सिंह नाभा की पुस्तक "असी हिंदू नहीं" के कारण स्थापित होना शुरु हुआ, महाराष्ट्र में हिंदू आंदोलन खड़े हुए तो स्वातंत्र्य वीर सावरकर की मोपला और गोमांतक के कारण, हिंदू समाज रूढ़ियों से मुक्त हुआ और देश को तेजस्वी क्रांतिकारी मिले तो महर्षि दयानंद की पुस्तक "सत्यार्थ प्रकाश" के कारण, उधर बंगाल में ऋषि बंकिम की "आनंद मठ" क्रांति की प्रेरणा बनी। 

इसलिए समाज और राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी कृतज्ञता होगी साहित्य सृजन....... सुंदर साहित्य रचिए, यही एक काम स्थायी है, प्रभावी है। धन, कृति, यश कुछ दे न दे, संतुष्टि जरूर देगी।

Abhijeet Singh

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