आँखों की पलक (निमेष) गिरने में जो काल लगता है उसका तीसवां भाग तत्पर और तत्पर के शतांशकाल को त्रुटि कहते है । अठारह वार पलक गिरने में जितना काल लगता है उतने काल की काष्ठा संज्ञा है । और तीस काष्ठा की एक फला होती है। तीस कला की एक नक्षत्र घड़ी और दो घड़ी का एक मुहूर्त एवं तीस मुहूर्त का एक दिन होता है । दश गुरु अक्षरों के उच्चारण में जितना काल
लगता है उसको प्राण कहते हैं। छः प्राण का एक पल और साठ पल की एक घडी होती है । साठ घड़ी का एक दिन, तीस दिन का एक मास और बारह मास का एक वर्ष होता है,।
सिद्धांत शिरोमणि ग्रंथ -- भास्कराचार्य
मध्यमाधिकारे कालमानाध्याय , गणित खंड से
अनुवादित अंश।
इसमें एक महत्वपूर्ण सूत्र मिला है कि दश गुरू अक्षरों के उच्चारण में जो समय लगता है उसको प्राण कहते हैं।
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