कुछ दिनों पूर्व एक दिल्लीवासी मंगोलायड जीव मुझ पर बरस पड़ा था कि मैं किताब शब्द के स्थान पर पुस्तक या ग्रंथ शब्द का आग्रही क्यों हूँ? उस जीव (एनिमल) के कथनानुसार संस्कृत मृत भाषा है और उसके उपयोग का कोई तुक नहीं है! और कि मैं राष्ट्रवादी हूँ मूर्ख हूँ आदि आदि! चूँकि उस मूढ़ को मैं पूर्व में ही हकाल बाहर खदेड़ अपनी मित्र सूची स्वच्छ कर चुका था इसलिए उसकी पीड़ा को समझ सकता था।
बहुत से मित्र "भाखा बहता नीर" वाले मुझ पर क्रोध करते रहते हैं! जिसे स्वीकार करता हूँ!
लेकिन किसी भाषा के शब्दों का अ-व्यवहार उस भाषा को मृत बनाता है! हम अपनी तत्सम शब्दावली को त्यागते चलेंगे, भाषा मृत होती चलेगी! हम भारतीयों में वह जीवट भी नहीं है कि पुस्तकों में बंद हिब्रू भाषा को जैसे यहूदियों ने पुनर्प्राणित कर दिया वैसे कर सकें! जबकि हमें तो वह दुरुह कार्य नहीं करना है जो यहूदियों को करना पड़ा!
आटे में नोन का पक्षधर मैं हो सकता हूँ लेकिन नोन में आटा मुझे न रुचता है न पचता है!
अब मोनियर विलियम्स को ले लीजिए, (क्योंकि भारतीय महर्षि तो लोगों को पच न पाएँगे!) वे कूट शब्द के कितने अर्थ प्रस्तुत करते हैं -
कूट = माथे की हड्डी जिसमें उभार हो, सींग!
कूट = एक प्रकार का बर्तन या उपकरण
कूट = कोई उभार
कूट = किसी पहाड़ का शिखर, चोटी (जैसे चित्र-कूट)
कूट = शिखर, सबसे ऊंचा, सबसे उत्कृष्ट, पहला
कूट = ढेर, भीड़ (जैसे अभ्र या बादलों की भीड़)
कूट = हल का हिस्सा, हल का फाल, हल का शिरा!
कूट = लोहे का हथौड़ा, हिरण को पकड़ने के लिए एक जाल, छिपा हुआ हथियार (लकड़ी के बक्से में खंजर, तलवार-छड़ी, आदि)
कूट = भ्रम, धोखाधड़ी, चाल, असत्य, मिथ्यात्व, एक कठिन प्रश्न , पहेली,
कूट = एक प्रकार का हॉल(या मण्डप)
कूट = एक विशेष तारामंडल, 16 कोटि , ग्रहों का एक उपविभाग।
कूट = अक्षर का एक रहस्य
कूट = अगस्त्य (देखें. कुटज)
कूट = विष्णु के एक शत्रु,
कूट = एक समान पदार्थ (ईथर तत्व आदि के रूप में)
कूट = एक जल-जार
कूट = एक प्रकार का पौधा
कूट = एक घर, आवास(देखें - कुटंद कुटी)
कूट = मिथ्या, असत्य, धोखेबाज
कूट = आधार (सिक्के के रूप में)
कूट = मिलावटी वस्तुएँ (एक व्यापारी की)
अब बताइये इतनी समृद्धि पर अपने कथित मंगोलायड जलें तो उनको वामपंथी न कहें तो क्या कहें?
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