जिसमें मदनलाल पहवा नाम के एक व्यक्ति पकड़े जाते हैं। पुलिस की पूछताछ में मदनलाल पहवा, नाथूराम गोडसे जी और नारायण आपटे जी का नाम लेते हैं। पुलिस को सारी जानकारी होती है लेकिन पुलिस चुपचाप बैठ जाती है। उसके बाद आता है वह दिन 30 January,
1948 की शाम 5:17 पर नाथूराम गोडसे जी द्वारा गांधी के सीने में तीन गोलियां उतार दी जाती हैं और उसके बाद पूरे महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में यह बात फैल जाती है कि नाथूराम गोडसे एक चितपावन ब्राह्मण हैं
और उन्होंने ही गांधी की हत्या की है। सोचिए उस जमाने में ना Twitter था, ना Instagram, ना Facebook, ना WhatsApp, ना ही कोई संचार का कोई ऐसा माध्यम। फिर यह बात पूरे भारत में फैलती है और उसके बाद कांग्रेसियों और गांधीवादी विचारधारा के
लोगों द्वारा पूरे देश में से चितपावन ब्राह्मणों को खोज-खोज कर निकाला जाता है। घरों से खींच-खींच कर निकाला जाता है और सड़कों पर घसीट कर जलाकर मार दिया जाता है। उसके बाद उनके मां बहनों के साथ अत्याचार किया जाता था।
महाराष्ट्र के कपस नाम के गांव में दो ऐसे भाई थे जिनका सरनेम गोडसे था। उनको चारपाई में बांधकर जलाकर गांधीवादी विचारधारा के लोगों ने मार दिया। सोचिए जो गांधी अपने जीते जी लाखों लोगों को मरवाया, जो गांधी मरने के बाद हजारों लोगों को मरवाया तो इस भारत में पता नहीं क्यों लोग उसे महात्मा का दर्जा देते हैं।
यह दुर्भाग्य है इस भारत का। हर हर महादेव।
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