Saturday, 29 August 2026

कृष्ण का एक अरबी version पकड़ा दिया गया कि तुम इसकी पूजा करो।

आज हम जिस योगेश्वर की पूजा करते हैं वो योगेश्वर कौन है? वो योगेश्वर एक वो कसर का एक अरबी अरेबियन version है, अरेबियन version. हमें एक मुसलमानी कसर पकड़ा दिया गया कि तुम इसकी पूजा करो। भाई साहब कहते हैं भागवत के करने वाले, कहते हैं सनातन धर्म के बड़े बड़े जानने वाले

कि जिस गांव में योगेश्वर ने जन्म लिया, जन्म तो उनका जेल में हुआ मथुरा के और फिर रहने लगे वो गोकुल में। गोकुल की प्रत्येक नारी उन्हें अपना पति, अपना वर समझती थी। भाई साहब आपका जन्म किसी गांव में हुआ या किसी शहर में हुआ था? मैं तो नगर में पैदा हुआ हूं।

भाई साहब मेरा जन्म एक गांव में पैदा हुआ। गांव की परंपरा है, जिस गांव में मेरा जन्म हुआ, उस गांव में प्रत्येक महिला हां मेरी बहन, मेरी शादी होकर आई, मेरी पत्नी के अलावा, उससे पहला रिश्ता मेरा परदादी का, दूसरा रिश्ता दादी का, तीसरा रिश्ता मां का,

चौथा रिश्ता बेटी समान भाई बहू, छोटे भाई की पत्नी, पांचवा रिश्ता पुत्र वधू, छठा रिश्ता पौत्र वधू। एक अपनी पत्नी को छोड़कर केवल यही मेरे रिश्ते उस गांव की महिलाओं से संभव है। और जिस भी महिला ने उस गांव में जन्म लिया,

सबसे पहला रिश्ता पिता की बुआ, फिर मेरी बुआ, फिर मेरी बहन, फिर मेरी बेटी, फिर मेरी पौती, फिर मेरी परपौती। भाई साहब क्या इनमें से कोई भी ऐसा रिश्ता है कि कोई भी महिला मुझे अपना पति मान ले? क्या यह भारतीय धर्म परंपरा में संभव है क्या भाई साहब?

ठीक बात है, बिल्कुल ठीक। यह कभी भी संभव नहीं था। और अगर मैं किसी महिला से यह रिश्ता जोड़ने की कोशिश करता हूं तो इसकी सजा हमारे धार्मिक संस्कारों में या तो death

sentence या परिवार का पूर्ण बहिष्कार, इसके अलावा कोई सजा नहीं थी। एक काम जो नरसिंगानंद नहीं कर सकता, पंडित विनय कसर चतुर्वेदी नहीं कर सकते, एक साधारण हिंदू नहीं कर सकता, तो हम सबका पिता,

जो हमारे धर्म का पिता है, वो ये काम कैसे कर सकता है भाई साहब? ये परंपरा कहां से आई? इस परंपरा को समझने के लिए आपको पचास, साठ और सत्तर के दशक की जो फिल्में हैं वो याद करनी पड़ेंगी।

ये संस्कार कहां से बोए गए? फिल्में दिखाती थी एक गांव में, एक घर में लड़का रहता है, बराबर के घर में लड़की रहती है, दोनों में प्यार हुआ, दोनों की शादी हो गई। गोत्र में भी शादी नहीं हो सकती।

गांव की तो बात छोड़ दीजिए। यह हमारी परंपरा नहीं, यह लुटेरों की परंपरा थी। जो अपनी बहनों से, अपनी बेटियों से, अपनी पौतियों से, अपनी माताओं से, अपनी पुत्र वधुओं से शादी और बलात्कार कर लेते थे। धर्म के नाम पर बिके हुए धर्मगुरुओं ने,

धर्म के नाम पर बिके हुए तथाकथित विद्वानों ने योगेश्वर के चरित्र को समाप्त करने के लिए, ताकि हिंदू मानस बिल्कुल कुचल जाए और हम इस गंदगी को स्वीकार करके गंदगी में लिप्त हो जाएं, इसके लिए यह अरेबियन परंपराएं, यह जाहिल लुटेरों की परंपराएं हम पर डाल दी।

यह तो धन्यवाद देता हूं, मैं अभी भी खाप पंचायतें हैं, अभी भी गांव का system है, जिसने इस बदतमीजी को रोके रखा है। वरना अपने आप को तथाकथित विद्वान कहने वाले तो बहुत दिन पहले से, अभी हमारे न्यायपालिका को देख लीजिए भाई साहब, हमारे विद्वान न्यायाधीशों को देख लीजिए,

वो तो तैयार बैठे रहते हैं कि गंदगी को अपने ऊपर थोप लो और समाज पर लगा दो। इन षड्यंत्रों से लड़ने के लिए आज बड़े धर्म के बारे में मनन, चिंतन, अध्ययन और सही धर्म के प्रचार प्रसार की आवश्यकता है भाई साहब।

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