एक साथ अमर के देखते थे दोनों। जयचंद छोटे थे, पृथ्वीराज चौहान बड़े थे। तो पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली मिल गई। वरना पृथ्वीराज चौहान अजमेर के राजा थे और यह राजा थे कन्नौज के। दोनों एक ही आश्रम में रहकर पढ़े।
और जयचंद जो है पृथ्वीराज चौहान के बहुत ही आज्ञाकारी थे। पृथ्वीराज चौहान जब भी कोई लड़ाई लड़ते थे, बड़ी लड़ाई, जयचंद उनके general रहते थे। लेकिन 65 साल के बूढ़े ने जब अपने सगे छोटे मौसेरे भाई की 13
साल की बेटी का अपहरण कर लिया और लाखन जो था उनका मुँहबोला बेटा, उनका भतीजा था जयचंद का, उनका अपना बेटा तो था नहीं। तो लाखन को बुलाकर कत्ल कर दिया। तो जयचंद बेचारा क्या करता?
हम सच को स्वीकार ही नहीं कर पाते। हम केवल भाटों की भाषा बोलते हैं। हम केवल गुलामों की भाषा बोलते हैं। हम कभी भी सत्य का आकलन नहीं करते। तो गांधी नेहरू की गलती नहीं थी।
उस समय सावरकर को छोड़कर बाकी जितने सरदार पटेल को बहुत महान बताया जाता है। अगर सरदार पटेल चाहते तो क्या एक भी मुसलमान भारत में रह जाता? केवल दो नेता हैं एक भीमराव अंबेडकर और एक वीर सावरकर। ये दोनों चिल्लाते रहे। आज हमें महान लोग भी तो क्योंकि हमें गुजराती महान बनाने हैं।
तो मैं फिर कह रहा हूं अच्छे थे। सरदार पटेल ने रियासतों का एकीकरण किया। अच्छी बात है। लेकिन इस्लाम के बारे में तो वो गांधी के तो follower थे। और संघ पर प्रतिबंध किसने लगाया?
सरदार पटेल ने लगाया ना। लेकिन फिर भी आज संगी जो हैं सारे क्योंकि गुजराती अब चलो छोड़ो यार। ये मेरे बाद की बातें हैं। ये मेरे बाद लोग discuss करेंगे। लेकिन कुल मिलाकर बात यह है कि
कुल मिलाकर बात यह है कि सत्ता की गुलामी छोड़नी पड़ेगी। और हमें बातों के, देखिए हिंदू सत्य को नहीं पसंद करता। हिंदू केवल सत्ता की गुलामी को पसंद करता है। इसलिए आज तक हम जयचंद को गाली देते हैं। जयचंद जो सबसे बड़ा पीड़ित था उस समय का।
जो पृथ्वीराज चौहान का सबसे बड़ा वफादार था। आज भी हिंदू अगर गद्दार किसी को कहता है तो जयचंद को बताता है। ये नहीं कहता कि भाई किसी की बेटी को kidnap करने की जरूरत क्या थी पृथ्वीराज चौहान को? अपने भाई की तो बेटी kidnap कर ली और मोहम्मद गौरी को जिंदा छोड़ दिया।
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