गुप्त 'स्वर-सिद्धि' और कार्य-सफलता विधान
यह प्रयोग आपको तब करना है जब आप किसी बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य के लिए घर से बाहर निकल रहे हों।
साधना विधि:
जब आप पूरी तरह तैयार होकर घर के मुख्य दरवाजे पर खड़े हों, तो चौखट पार करने से पहले एक क्षण के लिए रुक जाएं।
अपनी दोनों आंखें बंद करें और अपने दाहिने हाथ की उंगलियों को अपनी नाक के दोनों छिद्रों के पास लाएं।
एक गहरी सांस बाहर छोड़ें और महसूस करें कि किस नाक से सांस का प्रवाह तेज चल रहा है— दाहिने (Right) से या बाएं (Left) से।
जो भी स्वर (सांस) उस समय तेजी से चल रहा हो, उसी तरफ के हाथ से अपने उसी तरफ के चेहरे (गाल) को स्पर्श करें और मन ही मन भगवान शिव के परम नाद 'हंस:' (Hamsah) का मात्र 3 बार मानसिक उच्चारण करें। (हंस: वह नाद है जो हमारी हर सांस के साथ अपने आप उत्पन्न होता है)।
अब घर की चौखट से बाहर अपना वही पैर सबसे पहले निकालें, जिस तरफ की सांस (स्वर) तेजी से चल रही थी।
परिणाम: शिव स्वरोदय के अनुसार, जो स्वर उस समय चल रहा होता है, ब्रह्मांड की पूरी अनुकूल ऊर्जा उसी हिस्से में केंद्रित होती है। जब आप उसी पैर को आगे बढ़ाकर 'हंस:' नाद करते हैं, तो आपकी ऊर्जा ब्रह्मांड की गति के साथ पूरी तरह जुड़ (Sync) जाती है। आप जिस भी काम के लिए जाएंगे, सामने वाले का अवचेतन मन आपके प्रभाव में आ जाएगा और वह काम शत-प्रतिशत आपके पक्ष में ही पूरा होगा। बाधाएं आपके रास्ते से खुद हट जाएंगी।
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