Tuesday, 28 July 2026

भीमा कोरेगांव का सच

यह समुदाय से कोई झगड़ा नहीं है लेकिन भीमकोरेगांव 1818 के नाम पर गलत नॉरेटिव फैलाया जाएगा तो उसका 
जवाब दिया जाएगा हमारा किसी की जाति या संप्रदाय से कोई झगड़ा नहीं है लेकिन सत्य को असत्य नही लिखने दिया जाएगा 
इतिहासकारों की दृष्टि से जनवरी 1818 भीमा कोरेगांव का मंजर था पेशवाओं की 30000 सेना के सामने अंग्रेजों की 90 हजार सेना खड़ी है यह पेशवाओं और अंग्रेजों के मध्य तीसरी लड़ाई भी है इससे पहले दो लड़ाई अंग्रेज बुरी तरह से हार चुके हैं और अपनी पूरी शक्ति के साथ तीसरी लड़ाई में डटे हुए है इस हार का मतलब है अंग्रेज देश छोड़कर भाग जाते हैं इस युद्ध में भी पेशवाओं की सेना अंग्रेजो भारी पड़ रही है लेकिन इसी बीच में पेशवाओं ने अपने रेजीमेंट में महार जाति के 500 जमादारों को पेशवाओं के सेना में गद्दारी करने के लिये इनाम के लालच में भेज दिया जो अंग्रेजों की नौकरी करने के नाम पर वहां पर गए और वहां जाकर उन्होंने धोखे से पेशवाओं के रसद में जहर मिला दिया जिसके कारण पेशवा बीमार पड़ने लगे कुछ मर गए और पेशवा वह युद्ध हार गए जिसके कारण देश गुलाम हो गया और पेशवा को लाकर बिठूर के जेल में अंग्रेजों ने कैद कर दिया महारों की इस गद्दारी को इतिहास में लिखा गया और देशवासियो ने गद्दारी की सजा में सामाजिक बहिष्कार में #म्हारो_को_अछूत_घोषित कर दिया गया दूसरी ओर अंग्रेजों ने महारो को इस बात के लिए आरक्षण दिय और #महारों के नेता अम्बेडकर ने इस गद्दारी को छुपाने के लिए नया स्वांग रचते हुए 1926 में भीमा कोरेगांव में 30हजारसाहसी पेशवाओ पर 500 महारों की जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया जो आजाद भारत में भी 2018 तक मनाया गया... अंबेडकर ने अपनी किताब में लिखा है कि अगर महार ना होते तो अंग्रेज इस देश पर शासन न कर पाते.. इसको कहते हैं चोरी और सीना जोरी..
 क्या कभी संभव है कि 500 महार 30000 परम् वीर अदमय साहसी पेशवाओं के सामने एक मिनट भी टिक पाते.. जिन्होंने 41 लड़ाईया में विजित रहकर मुगलों का लगभग लगभग सफाया कर दिया था.. जिनके डर से दिल्ली का मुगल शासक 3 दिन तक बंकर में छुपा रहा हो.. उनके लिए 500 जमादार ऐसी बातें कहेंगे तो चुप नहीं रहूंगा..
 जो अंग्रेजों की सेना में जमादार थे वह लोग भी जब अपना इतिहास बताते हैं तब मुझको अपनी लेखनी चलानी पड़ती है ताकि सत्यता सामने आ जाए और लोग दिशा भ्रमित ना हो..
 अपनी गद्दारी से देश को गुलाम बनाने वाले अपने आप को तीस मार खाँ ना लिखें..
 जिसको ना पता हो वे इतिहास के किताब को उठाएं गूगल सर्च करें और इतिहास के प्रोफेसर से डिस्कशन करें

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