Sunday, 26 July 2026

मोदी मुल्ला प्रेम 1

आज भी मुगलों के अंडकोष पर झूला झूल रही है मोदी सरकार
कटु किंतु यही सत्य है 

-दिलीप पाण्डेय

ये लाइन लिखने के लिए इसलिए विवश हुआ क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद किसी चम्पू ने ये रोना रोया कि बताओ उस शिक्षा मंत्री को हटा दिया गया जिसने मुगलों को इतिहास से हटा दिया । 

ये पूरी तरह गलत है । आज भी भारत के स्कूलों में भोले भाले बच्चों को मुगलों का पाठ पढ़ाया जा रहा है । इतिहास में किसी का नाम लिखा जाना उसका महिमा मंडन ही होता है । या तो फिर नाम इस तरह लिखा जाए कि पाठक के मन में घृणा पैदा हो । लेकिन वर्तमान इतिहास की स्कूली पुस्तकें नीरस हैं जिनसे बच्चों को कोई भी प्रेरणा नहीं मिलती है ना ही विदेशी हमलावरों के खिलाफ कोई घृणा पैदा होती है । ये मर्द वाली बातें हैं जो जफर सरेशवाला के चरणचुंबक नपुंसक लोग कभी नहीं समझ पाएंगे । 

चलो वक्फ बोर्ड नहीं खत्म कर सके... एक कानून लाकर पुरानी अवैध वक्फ इमारतों को वैध कर दिखावे की मर्दानगी पर तालियां बटोर ली लेकिन कम से कम इतिहास तो सही कर सकते थे क्या इससे भी अमेरिका रोक रहा था ?

12 साल बहुत होते हैं । एक पीढ़ी तैयार हो जाती है । 12 साल हो गए मोदी सरकार को अगर इतिहास भी हिंदुत्ववादी लिख दिया होता तो भी हम मानते कि इस सरकार ने कम से कम कुछ तो सुधार किया स्कूली शिक्षा में ।

सीखो इजराइल से... क्या इजराइल ये पढ़ाता है कि हिटलर के नाजी साम्राज्य की वास्तुकला कैसी थी और उन्होंने कौन कौन से युद्धों में जीत दर्ज की थी ? 

सारी दुनिया मानती है कि इस्लामिक राज में हिंदुओं के साथ जो हुआ वो दुनिया के इतिहास में बर्बरता की पराकाष्ठा है लेकिन ये मोदी सरकार मुगलों की वास्तुकला का पाठ पढ़ाते हुए मुगलों के अंडकोष से खेलते हुए ये दावा भी करती है कि वो हिंदूवादी है । 

इसको वो मुगलिया वास्तुकला नजर नहीं आती जिसमें सिरों के मीनार बनाए गए थे । अरे ! तुम्हारे अंदर इतनी भी बौद्धिकता नहीं कि स्कूली इतिहास इस लायक लिख सको कि हिंदू बच्चों को हिंदुत्व की प्रेरणा मिले । 

कालापानी में जाकर सावरकर की फोटो के आगे मत्था रगड़ते रगड़ते बोर हो गए तो ब्रह्माजी को रंडीबाज बताने वाले ज्योतिराव फुले के कदमों में लेट गए । यही तुम्हारी बौद्धिकता है । तुम सावरकर के अनुयायी हो कि फुले के ये तो तय कर लो ? 

अगर सच में कोई सावरकर के विचारों पर चलने वाली सरकार 12 साल तक चली होती तो आज देश में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिलता जो हमें बिलकुल भी नजर नहीं आ रहा है । नजर आ रहे हैं तो प्रधानमंत्री आवास के तहत हिंदुओं के टैक्स से बने हुए जिहादियों के करोड़ों मकान और उनमें चल रहे लव जिहाद ! 

और देखो कैसी अहसान फरामोशी है । हमने यूजीसी के खिलाफ इतना लिखा, यहां फेसबुक पर जो लिखा जाता था वो 24 घंटे में सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की जुबान से निकलता था । मां सरस्वती की कृपा से हमने अपनी लेखनी की ताकत से और लाखों बहादुर लोगों ने ऐसे काले कानून पर स्टे लगवाया । और मोदी समर्थकों की बहन बेटियों को ओबीसी जिहादियों से बचाया वरना यूजीसी के बाद तो ओबीसी जिहादी मोदी समर्थकों की बहन बेटियों को खुल्ले आम उड़ा ले जाते और किसी प्रधानमंत्री आवास योजना से बने मकान में ले जाकर अक्कड़ बक्कड़ खेलते । लेकिन इसके बाद भी निर्लज्ज मोदी के निर्लज्ज समर्थक हमारा अहसान ही नहीं मानते, इससे ज्यादा अहसानफरामोशी और क्या हो सकती है ? 


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