बीजेपी के लगता है बुरे दिन नहीं बुरा साल
चल रहा है एक मुसीबत जाती नहीं कि दूसरी पहुंच जाती है
या खुद मुसीबत बुलाते हैं
अभी तिलचट्टों के हाथों पटखनी खाने के बाद आराम कर ही रहे थे कि
#ReservationHataoAndolan शुरू हो गया
हालांकि मैं भी जानता हूं कि इसका परिणाम कुछ नहीं निकलेगा, सिर्फ सवर्ण समाज अपनी भड़ास निकालेगा तो बाकी दूसरे वर्ग एक दूसरे की मां बहन करेंगे
क्योंकि 75 वर्ष से जो आरक्षण की चाशनी चटाई गई है
वो अब पूरा शक्कर की फैक्ट्री चाहते हैं
मुझे लगता है अंग्रेज कभी गया ही नहीं आज भी उनके द्वारा फैलाया जाल में फंसा भारत फड़फड़ा रहा है
एक अंग्रेज लार्ड था #मैकाले
उसके आने के बाद एक सर्वे कराया गया था मद्रास प्रेसीडेंसी, बंगाल प्रेसीडेंसी, और भी कई इलाकों का ,
जिसमें शिक्षा की स्थिति की रिपोर्ट पेश की गई जिसमें पता चलता है कि भारत के सभी रजवाड़ों में जो भी गुरुकुल थे उस समय स्कूल तो थे नहीं तो जो अपने बच्चों को भेज सकते थे भेजते थे उसमें ऐसा नहीं था कि कोई जाति नहीं थी
और जाति की अवधारणा भी अंग्रेज ही लेकर आए
हमारे भारत में वर्ण था ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र
अंग्रेजी शासन ने सबके काम के आधार पर उनकी जाति बना दी और सरनेम भी रिकार्ड में लिख लिया जो आज भी आर्काइव में मिल जाएगा
और चूंकि क्षत्रिय अनेकों जगह शासन किए और अपने राज्य की प्रजा की रक्षा करने और उनका पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी तो उनको और ब्राह्मण जो प्रायः गरीब ही थे लेकिन ज्ञान रखते थे वेद शास्त्र पुराण उपनिषद और व्यापार करने वाले बनिया समाज और भी जोड़कर उसे उच्च वर्ग बना दिया, जो जिस काम में निपुण था उसकी जाति बन गई।
और अंग्रेज़ ने जिस क्रम में लिखा उसे उससे ऊंचा और नीचा बना दिया।
मैकाले ने शिक्षा नीति बनाई और जो 1947 के बाद भी हमारे देश के कर्णधारो ने वैसा ही अपना लिया, वहीं जाति विभाजन,
ऊंच नीच , तो छोड़िए संविधान ने नया चार वर्ग बना दिया
जनरल , ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति
कहते हैं कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति गरीब थे पिछड़ा थे सामाजिक आर्थिक रूप से।
मानता हूं लेकिन बाकी वर्ग भी कोई अमीर नहीं था हमने तो 80 के दशक तक भी अपने गांव के सवर्ण परिवारो को देखा है
जो अत्यंत गरीबी की जिंदगी जिए है जिनके पास ना पर्याप्त जमीन थी ना धन
लेकिन उनके माथे पर चिपका दिया गया कि तुम शोषण करते हो , हां मानता हूं भेदभाव था लेकिन वैसा नहीं था जेसा वामपंथियों ने प्रचार किया
ये तो अपने अपने इलाके में जनसंख्या के ऊपर था अब छत्तीसगढ़ और उड़ीसा, महाराष्ट्र के अनेक इलाकों को मैं जानता हूं जहां दूर दूर तक कोई सवर्ण है ही नहीं , फिर वह गरीब और पिछड़े क्यों रह गए
असली बात है शिक्षा।
जो शिक्षा पाएगा या पाया था उसने उपयोग किया, भाई संपत्ति में था ही क्या, हमने देखा है सिर्फ जमीन थी और जैसा सबका मकान मिट्टी का और खपरैल वाला होता था सवर्णों का भी वैसा ही था
आसपास के आदिवासियों का एक तबका जो मेहनती थे वे काम करने आते थे और बदले में उस समय रूपया नहीं अनाज देते थे
अब फिर आते हैं संविधान पर , अंबेडकर के अंदर चुल्ल मची थी अलग दलित कांस्टिटेंसी बनाने की जिसका जबर्दस्त विरोध हुआ
तब संविधान में ही उनको 145 सीट दिए गए जिससे केवल वही चुनाव लड़ सकते थे
और आरक्षण दिया गया हर चीज में नौकरी में शिक्षा में
चलो ठीक है दिया भाई ठीक है
परंतु कोई आंकड़ा है कि इससे किसका फायदा हुआ किसका नहीं हुआ, कोई दस्तावेज नहीं बस यही कहानी है कि पांच हजार साल से अत्याचार हुआ, पानी नहीं पीने दिया।
उसके बाद हमारे होनहार नेता भी समझ गया कि वोटबैंक बनाओ चुनाव जीतो बल्कि और बढ़ाओ ।
। ये चीज आगे जाकर विकराल रूप धारण करेगी , जिस हिसाब से दलितों के एक वर्ग में देवी देवताओं को लेकर अपशब्द पढ़ा दिया गया है और हर दिन अपमान करते हैं
कभी ऐसी नौबत ना आ जाए कि खून की नदियां बह जाए
सच कह रहा हूं नफ़रत बढ रही है
उधर जिहादी भी टकटकी निगाह लगाए हैं कि खुद तो लड़कर सब करके देख लिया, सवर्णों के कारण ना तो खुलकर धर्म परिवर्तन करवा पा रहे ना ईसाई मिशनरियों का मंसूबा पूरा हो रहा है
इसलिए सवर्णों को दलितों से मारकाट करवा दो
सब गड़बड़झाला है भाई
आरक्षण नहीं जाएगा मैं भी जानता हूं बल्कि बढ़ता जाएगा
जातिवाद को मंसूबा धारी साजिशकर्ता जाने नहीं देंगे
देश ऐसे ही चलेगा
जयश्री राम 🙏 🚩
#castism #UGC #viralpost
No comments:
Post a Comment